Trump-Netanyahu Differences: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग तीसरे हफ्ते में दाखिल हो गई है। इस बीच खबरें आईं, कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच मतभेद हैं, लेकिन ट्रंप ने इसे सिरे से नकारते हुए कहा, कि दोनों नेताओं के बीच संबंध बेहद मजबूत हैं। साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए 7 देशों से बातचीत का खुलासा किया।
ट्रंप ने उड़ाए अफवाहों के परखच्चे-
एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने नेतन्याहू से मतभेद की सभी खबरों को ‘झूठी खबर’ करार दिया। उन्होंने कहा, कि उनका और नेतन्याहू का रिश्ता बेहद शानदार है और दोनों मिलकर पूरी स्थिति की अगुवाई कर रहे हैं। ट्रंप ने यह भी कहा, कि नेतन्याहू खुद इस बात की तसदीक करेंगे। यह बयान ऐसे वक्त आया, जब अमेरिका और इजराइल ईरान के खिलाफ अपना सैन्य अभियान जारी रखे हुए हैं और यह संघर्ष पूरे मध्य-पूर्व को अस्थिर कर चुका है।
होर्मुज की सुरक्षा-
ट्रंप ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया, कि उनका प्रशासन होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 7 देशों से बातचीत कर रहा है। यह वही जलमार्ग है जिससे दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल गुजरता है और जो इस युद्ध की शुरुआत से ही बड़े पैमाने पर बंद पड़ा है। ट्रंप ने खाड़ी के तेल पर निर्भर देशों से सीधे तौर पर कहा, कि वो इस रास्ते की रक्षा के लिए आगे आएं क्योंकि यही उनकी ऊर्जा का स्रोत है।
हालांकि उन्होंने उन 7 देशों के नाम नहीं बताए लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन इस संभावित गठजोड़ में शामिल हो सकते हैं। खबरें यह भी हैं, कि अमेरिका जल्द ही एक बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभियान का ऐलान कर सकता है जिसके तहत व्यावसायिक जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित गुजारा जाएगा।
नहीं दिया तो बुरा होगा-
फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने यूरोपीय सहयोगियों पर भी दबाव बनाया। उन्होंने चेतावनी दी, कि अगर NATO के सदस्य देश समुद्री सुरक्षा में अमेरिका का साथ नहीं देते तो गठबंधन का भविष्य बेहद खतरनाक हो सकता है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया, कि कुछ देश माइनस्वीपर और विशेष जहाज तैनात कर सकते हैं।
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ईरान बोला न युद्धविराम मांगा, न बातचीत-
दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था, कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच संपर्क है। उन्होंने CBS के कार्यक्रम में साफ कहा, कि ईरान ने न कभी युद्धविराम मांगा है और न ही बातचीत की कोई गुजारिश की है। ईरान अमेरिका और इजराइल के हमलों के बावजूद खुद को मजबूत बता रहा है और कह रहा है, कि वो जब तक जरूरत हो अपनी रक्षा करने में सक्षम है।
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