Story of Haiti: दुनिया में ऐसे बहुत से देश हैं, जहां लोग ठाठ-बाट से रहते हैं और खुशहाल ज़िंदगी जीते हैं। लेकिन कुछ देश ऐसे भी हैं, जहां हालात इतने खराब हैं, कि आपको सुनकर यकीन ही नहीं होगा। हम बात कर रहे हैं हैती नाम के देश की, जहां गरीबी इतनी भयानक है, कि लोगों को भूख मिटाने के लिए मिट्टी की रोटियां खानी पड़ती हैं। जी हां, आपने बिल्कुल सही पढ़ा, मिट्टी की रोटियां।
Haiti में कैसे लोग खाते हैं मिट्टी की रोटी?
हैती कैरेबियन सागर के हिसप्पानियोला द्वीप पर बसा एक छोटा सा देश है। यहां के हालात इतने बुरे हैं, कि लोगों के पास खाने के लिए कुछ नहीं है। ऐसे में वे पीली चिकनी मिट्टी को इकट्ठा करते हैं और उसे अच्छे से छानकर साफ करते हैं। फिर इस मिट्टी को पानी में घोला जाता है और इसमें थोड़ा सा नमक और तेल मिलाया जाता है।

जिसके बाद इस मिश्रण को रोटी का आकार देकर धूप में सुखाया जाता है। जब असली खाना नहीं मिलता, तो यहां के लोग भूख मिटाने के लिए इन्हीं मिट्टी के बिस्किट को खाते हैं। हालांकि यह सोचकर ही दिल दहल जाता है, कि किसी इंसान को इतनी मजबूरी में जीना पड़ रहा है।
Haiti का दर्दनाक इतिहास-
हैती की यह दुर्दशा एक दिन में नहीं हुई है। इस देश का इतिहास बहुत दर्दनाक रहा है। साल 1492 से 1697 तक हैती पर स्पेन का कब्जा था। फिर 1697 से 1804 तक फ्रांस ने इस देश पर राज किया और लोगों का शोषण किया। साल 1804 में हैती को फ्रांस से आजादी तो मिली, लेकिन यह आजादी भी ज्यादा दिन टिक नहीं सकी। साल 1915 में अमेरिका ने हैती में अपनी सेना भेज दी और देश को अपने कंट्रोल में ले लिया। करीब 19 साल तक अमेरिका ने हैती पर कब्जा रखा और फिर 1934 में इस देश को इसके हाल पर छोड़ दिया गया।

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सवाल जो हर किसी के मन में उठता है-
यह देखकर मन में सवाल उठता है, कि दुनिया के अमीर देश जो खुद को बड़ा धार्मिक और इंसानियत का पैरोकार बताते हैं, वह इस मामले में क्यों खामोश हैं। जिन देशों ने सदियों तक हैती का शोषण किया, क्या उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती? क्या उनसे सवाल नहीं पूछे जाएंगे, कि उन्हें इतनी दौलत दी गई थी, फिर भी दुनिया के कुछ हिस्से में लोग मिट्टी की रोटियां खाने को मजबूर हैं। हैती की यह कहानी से पता चलता है, कि दुनिया में अभी भी बहुत कुछ बदलने की जरूरत है और इंसानियत को सच्चे मायनों में जिंदा रखने की जरूरत है।
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