India Pakistan Tension
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    India Pakistan Tension: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार (8 मई, 2025) को अपने राष्ट्र को संबोधित करते हुए भारत के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। यह प्रतिक्रिया भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 आतंकवादी ठिकानों पर किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के एक दिन बाद आई है। शरीफ ने अपने तीखे संबोधन में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी, “पाकिस्तान बदला लेगा। हम इस जंग को अंत तक लड़ेंगे। मेरे पाकिस्तानी भाइयों और बहनों, आपकी सुरक्षा के लिए, हमारी सेना और हमारे नागरिक हमेशा एकजुट रहेंगे। पाकिस्तान आतंकवाद से सबसे अधिक पीड़ित देश है, लेकिन हम अपने दुश्मनों के खिलाफ अवश्य जीतेंगे।”

    इस प्रकार का आक्रामक बयान दोनों परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी देशों के बीच तनाव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।

    India Pakistan Tension सटीकता और रणनीतिक महत्व-

    भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई की देर रात 1:05 से 1:30 बजे के बीच एक उच्च-सटीकता वाला सैन्य अभियान चलाया। इस अभियान को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया, जो अपने आप में एक रणनीतिक और सांस्कृतिक संदेश है। भारत सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह ऑपरेशन लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ था, जिसमें कुल 26 आतंकवादी मारे गए।

    सूत्रों के अनुसार, यह अभियान अत्याधुनिक तकनीकों और खुफिया जानकारी के आधार पर सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध था। इसमें निम्नलिखित प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाया गया:

    मुजफ्फराबाद क्षेत्र: सवाई नाला कैंप, सयेदना बेलाल कैंप

    गुलपुर: गुलपुर कैंप

    अन्य PoK क्षेत्र: अब्बास कैंप, बरनाला कैंप, सरजल कैंप, महमूना जोया कैंप

    पाकिस्तान का आंतरिक क्षेत्र: मरकज तैबा और बहावलपुर में मरकज सुभान

    रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन ठिकानों का चयन रणनीतिक महत्व के आधार पर किया गया था, क्योंकि ये आतंकवादी प्रशिक्षण, नियोजन और भारत के खिलाफ हमलों के लिए लॉन्चिंग पैड के रूप में कार्य करते थे।

    India Pakistan Tension पाकिस्तान की आपातकालीन प्रतिक्रिया और रणनीति

    भारतीय हमलों के तुरंत बाद, पाकिस्तान ने कई आपातकालीन कदम उठाए:-

    1. राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तत्काल एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें सभी सेना प्रमुखों, कैबिनेट मंत्रियों और प्रमुख अधिकारियों ने भाग लिया।

    2. एयरस्पेस बंद: पाकिस्तान ने शुरू में अपने हवाई क्षेत्र को 48 घंटों के लिए बंद करने की घोषणा की, हालांकि, आठ घंटे बाद ही इसे फिर से खोल दिया गया। यह कदम देश की आर्थिक और रणनीतिक चिंताओं को दर्शाता है।

    3. राष्ट्र का सहारा: पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए कहा कि वह “अपने चुने हुए समय, स्थान और तरीके से” आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया करने का अधिकार रखता है।

    4. कूटनीतिक पहलगाम: पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने विभिन्न देशों के राजदूतों को ब्रीफ किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन मांगा।

    रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के अनुसार, “पाकिस्तान तनाव को कम करने के लिए तैयार है, लेकिन केवल तभी जब भारत भी ऐसा करे।” यह बयान बताता है कि पाकिस्तान अभी भी कूटनीतिक विकल्प खुले रखना चाहता है, हालांकि उनकी सार्वजनिक भाषा अधिक आक्रामक है।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और वैश्विक प्रभाव-

    भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंतित कर दिया है। विश्व के प्रमुख देश दोनों परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्रों से संयम बरतने का आग्रह कर रहे हैं।

    वैश्विक बाजारों पर भी इसका प्रभाव देखा जा रहा है, जहां तेल की कीमतें बढ़ी हैं और एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट आई है। वैश्विक अर्थव्यवस्था, जो पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है, इस नए भू-राजनीतिक तनाव से और अधिक प्रभावित हो सकती है।

    अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका प्रभाव केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर भी पड़ सकता है।

    क्या परमाणु खतरा वास्तविक है?

    दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच, परमाणु युद्ध की आशंका एक वास्तविक चिंता बन गई है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इसकी संभावना को कम आंकते हैं।

    रक्षा विशेषज्ञ डॉ. सुधीर सिंह का कहना है, “दोनों देशों के पास ‘नो फर्स्ट यूज’ की नीति है, और परमाणु युद्ध के विनाशकारी परिणामों से दोनों राष्ट्र भली-भांति परिचित हैं। वर्तमान स्थिति तनावपूर्ण है, लेकिन परमाणु संघर्ष तक पहुंचने की संभावना अभी बहुत कम है।”

    फिर भी, अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।

    आगे की संभावनाएं और भारत का रुख-

    भारत ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई विशेष रूप से आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ थी, न कि पाकिस्तान के लोगों या सरकार के खिलाफ। भारत का रुख हमेशा से यह रहा है कि वह आतंकवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाता है, और इसके लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

    सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निम्नलिखित परिदृश्य देखे जा सकते हैं:

    1. सीमित सैन्य कार्रवाई: पाकिस्तान भारतीय सैन्य ठिकानों या सीमावर्ती क्षेत्रों पर सीमित हमले कर सकता है।

    2. कूटनीतिक दबाव: पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ कूटनीतिक अभियान तेज कर सकता है।

    3. आर्थिक प्रतिबंध: द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

    4. साइबर हमले: आधुनिक युग में, साइबर हमले भी एक संभावित प्रतिक्रिया हो सकती है।

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    भारत के रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अशोक मेहता का कहना है, “भारत ने एक सटीक और सीमित ऑपरेशन चलाया है जो केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाता है। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया के लिए भारत तैयार है, लेकिन हमारा लक्ष्य तनाव बढ़ाना नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखना है।”

    क्या होगा आगे?

    भारत-पाकिस्तान के बीच यह नवीनतम तनाव दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर रहा है। हालांकि पूर्ण युद्ध की संभावना कम है, लेकिन आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है।

    अंतरराष्ट्रीय समुदाय और शांति प्रेमी नागरिकों की आशा है कि दोनों देश संयम बरतेंगे और कूटनीतिक माध्यमों से अपने मतभेदों को सुलझाएंगे। वर्तमान परिस्थितियों में, दोनों देशों की जनता के बीच शांति और सद्भाव की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।

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