2026 Gravity Rumor
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    2026 Gravity Rumor: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक अजीब और डराने वाली साजिशी थ्योरी तेजी से वायरल हो रही है। दावा किया जा रहा है, कि 12 अगस्त 2026 को ठीक 14:33 GMT पर धरती सात सेकंड के लिए अपनी ग्रैविटी खो देगी, जिससे लाखों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। X (पहले Twitter), TikTok और YouTube पर फैले इन दावों ने कई लोगों को वाकई डरा दिया है। हालांकि, अब NASA से जुड़े वैज्ञानिकों और फैक्ट-चेकिंग एक्सपर्ट्स ने इस पूरे दावे को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है।

    क्या है वायरल दावा और क्यों लोग डर गए?

    वायरल पोस्ट्स में कहा जा रहा है कि NASA को इस घटना की जानकारी सालों से है और इसी वजह से एक सीक्रेट प्रोग्राम “Project Anchor” चलाया जा रहा है। कुछ पोस्ट्स तो यहां तक दावा करती हैं, कि ग्रैविटी के अचानक खत्म होने से करीब 4 करोड़ लोग मर सकते हैं। इतनी बड़ी बात जब बार-बार वीडियो और शॉर्ट्स के जरिए सामने आती है, तो आम लोगों का घबराना स्वाभाविक है। लेकिन सवाल यह है, कि क्या सच में ऐसा कुछ मुमकिन है?

    NASA से जुड़े एक्सपर्ट्स ने किया साफ इनकार-

    हालांकि NASA ने इस पर कोई अलग से प्रेस रिलीज नहीं जारी की, लेकिन एजेंसी के एक प्रवक्ता ने फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट Snopes को साफ तौर पर बताया, कि यह दावा पूरी तरह बेबुनियाद है। प्रवक्ता के मुताबिक, ग्रैविटी कोई स्विच नहीं है, जिसे ऑन-ऑफ किया जा सके। धरती की गुरुत्वाकर्षण शक्ति उसकी कुल मास यानी द्रव्यमान पर निर्भर करती है। जब तक धरती का द्रव्यमान अचानक खत्म न हो जाए, तब तक ग्रैविटी गायब होने का सवाल ही नहीं उठता।

    ‘Project Anchor’ का कोई सबूत नहीं-

    सोशल मीडिया पर जिस कथित डॉक्यूमेंट का हवाला दिया जा रहा है, वह नवंबर 2024 का बताया जाता है। ऑनलाइन इन्वेस्टिगेशन करने वालों को न तो NASA के किसी बजट में, न किसी इंटरनल मेमो में और न ही किसी लीक फाइल में Project Anchor नाम की किसी योजना का जिक्र मिला है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह डॉक्यूमेंट पूरी तरह फैब्रिकेटेड यानी मनगढ़ंत लगता है।

    साइंस की बेसिक समझ की कमी-

    वैज्ञानिकों के अनुसार, यह थ्योरी इस बात का उदाहरण है, कि कैसे ग्रैविटी को लेकर लोगों में बेसिक साइंस की समझ की कमी है। ग्रैविटी कोई मशीन या सिस्टम नहीं है, जिसे रोका या रीसेट किया जा सके। यह एक नेचुरल और कॉन्स्टेंट फोर्स है, जो धरती के द्रव्यमान से पैदा होती है।

    सूर्यग्रहण से जोड़कर भी फैलाया गया डर-

    कुछ वायरल पोस्ट्स में इस कथित घटना को आने वाले सूर्यग्रहण से भी जोड़ा गया। NASA एक्सपर्ट्स ने इस कनेक्शन को भी पूरी तरह खारिज कर दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है, कि सूर्य और चंद्रमा ज्वार-भाटा जरूर प्रभावित करते हैं, लेकिन उनका असर पहले से ज्ञात और दशकों पहले तक कैलकुलेट किया जा सकता है। इससे धरती की ग्रैविटी पर कोई अचानक या खतरनाक असर नहीं पड़ता।

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    NASA का साफ संदेश-

    NASA और वैज्ञानिकों का संदेश बिल्कुल क्लियर है, ग्रैविटी न तो झपकती है, न रुकती है और न ही गायब होती है। 2026 में धरती की ग्रैविटी खत्म होने वाली नहीं है और Project Anchor सिर्फ इंटरनेट की अफवाह है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।