McKinsey AI Research
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    McKinsey AI Research: McKinsey की ताज़ा रिसर्च ने एक अहम सवाल का जवाब देने की कोशिश की है, जो आज हर कामकाजी इंसान के मन में है, क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारी नौकरियां छीन लेगी? लेकिन कंपनी का जवाब थोड़ा अलग है। उनकी नई स्किल चेंज इंडेक्स रिपोर्ट बताती है, कि AI नौकरियों को खत्म नहीं करेगी, बल्कि काम करने के तरीके को बदल देगी।

    McKinsey ने अपनी हालिया पोस्ट में साफ किया, कि AI ज्यादातर मानवीय कौशल को बेकार नहीं बनाएगी, लेकिन उनके इस्तेमाल का तरीका जरूर बदल जाएगा। कंपनी ने लगभग 6,800 स्किल्स का विश्लेषण करके यह समझने की कोशिश की, कि अगले पांच सालों में ऑटोमेशन का सबसे ज्यादा असर किन पर पड़ेगा। रिसर्च के मुताबिक, नेगोशिएशन और प्रॉब्लम सॉल्विंग जैसे स्किल्स और भी अहम हो जाएंगे, क्योंकि लोगों को AI एजेंट्स और रोबोट्स के साथ काम करना होगा।

    ये 5 नौकरियां हैं खतरे में-

    McKinsey की रिपोर्ट के अनुसार, जिन नौकरियों में रूटीन और रूल-बेस्ड काम होता है, उनमें ऑटोमेशन का खतरा सबसे ज्यादा है। क्लेरिकल और इनवॉइसिंग से जुड़े रोल्स इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। बिलिंग, रिकॉन्सिलिएशन और डॉक्यूमेंटेशन जैसे काम अब ऑटोमेटेड सिस्टम्स संभाल रहे हैं।

    इन्वेंटरी और स्टॉक मैनेजमेंट की नौकरियां भी रिस्क जोन में हैं, क्योंकि AI टूल्स अब डिमांड फोरकास्टिंग और सप्लाई ट्रैकिंग बेहतरीन तरीके से कर सकते हैं। क्वालिटी एश्योरेंस के वो रोल्स जो चेकलिस्ट-स्टाइल रिव्यू पर निर्भर हैं, खासकर डिजिटल ऑपरेशंस और मैन्युफैक्चरिंग में, वो भी प्रभावित होंगे। डेटा फोकस्ड रोल्स जिनमें SQL-बेस्ड रिपोर्टिंग होती है, वो भी इसी कैटेगरी में आते हैं, क्योंकि AI टूल्स रिपोर्ट्स जेनरेट करने और डेटा एक्सट्रैक्ट करने में माहिर हो चुके हैं। बैक-ऑफिस के वह काम जिनमें वेरिफिकेशन और कंसिस्टेंसी चेक्स होते हैं, वो भी खतरे में हैं, क्योंकि मशीनें रिपीटेटिव प्रिसिजन टास्क्स ज्यादा कुशलता से कर सकती हैं।

    ये 6 स्किल्स बचाएंगे आपकी नौकरी-

    स्किल चेंज इंडेक्स में नीचे वो स्किल्स हैं, जिन्हें ऑटोमेट करना मुश्किल है। प्रॉब्लम सॉल्विंग सबसे सेफ स्किल्स में से एक है, क्योंकि इसमें मुश्किल परिस्थितियों का आकलन और फैसले लेने की जरूरत होती है। लीडरशिप भी अहम बनी रहेगी, क्योंकि लोगों को मैनेज करना, प्राथमिकताएं तय करना और जवाबदेही संभालना आसानी से ऑटोमेट नहीं हो सकता।

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    नेगोशिएशन में विश्वास और सिचुएशनल अवेयरनेस की जरूरत होती है, इसलिए यह भी सुरक्षित है। कम्युनिकेशन और कस्टमर रिलेशनशिप स्किल्स, खासकर जहां लोगों को समझने और उनकी जरूरतों पर रिस्पॉन्स देने की ज़रुरत है, वो भी सुरक्षित रहेंगे। कोचिंग और पीपल डेवलपमेंट में भी इंसान जरूरी है, क्योंकि सीखना और विकास पर्सनल गाइडेंस पर निर्भर करता है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।