Puja Rules: भारतीय परंपरा में सुबह-शाम दीपक जलाना सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि घर में सकारात्मकता और ईश्वरीय कृपा को आमंत्रित करने का तरीका है। जलती लौ अंधकार और अज्ञान को दूर करती है और घर में प्रकाश और शांति का संचार करती है। लेकिन पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, केवल भक्ति से काम नहीं चलता, पूजा में कुछ ज़रूरी नियमों का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इन्हें जाने बिना की गई पूजा अपेक्षित फल नहीं देती।
घी का दीपक क्यों है सबसे श्रेष्ठ?
अक्सर लोग सोचते हैं, कि तेल और घी में से किससे दीपक जलाएं। धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक ज्ञान दोनों के अनुसार देसी गाय का घी सबसे श्रेष्ठ माना गया है। मान्यता है, कि घी में प्राकृतिक गुण होते हैं, जो हवा में मौजूद हानिकारक तत्वों को कम करते हैं। जब घी की लौ जलती है, तो वातावरण शुद्ध होता है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में एक शांत और सात्विक माहौल बनता है।
साथ ही यह भी ध्यान रखें, कि एक ही दीपक में घी और तेल कभी एक साथ न मिलाएं। शास्त्रों के अनुसार, घी सात्विक गुण का और तेल राजसिक गुण का प्रतीक है, इन्हें मिलाने से तामसिक ऊर्जा बढ़ती है, जो घर में नकारात्मक कंपन पैदा कर सकती है।
कितनी बातियां जलाएं-
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल होता है, कि दीपक में कितनी बातियां रखनी चाहिए। परंपरा के अनुसार, एक दीपक में दो बातियां एक साथ इस तरह रखी जा सकती हैं, कि वो एक ही लौ की तरह जलें। अगर ज्योति दीपक जलाना हो तो तीन या पांच बातियां शुभ मानी जाती हैं क्योंकि विषम संख्या को पूजा में अधिक फलदायी माना गया है।
दीपक की दिशा-
किस दिशा में रखा जाए दीपक यह भी बेहद महत्वपूर्ण है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, तेल का दीपक देवता की बाईं तरफ और घी का दीपक दाईं तरफ रखना चाहिए। अगर बाती उत्तर दिशा की ओर हो तो आर्थिक कठिनाइयां दूर होती हैं और समृद्धि आती है। घर में कोई बीमार हो तो पूर्व दिशा की ओर दीपक जलाना लाभकारी माना जाता है। दक्षिण और पश्चिम दिशा की ओर दीपक रखने से अनावश्यक परेशानियां बढ़ सकती हैं।
दीपक बुझ जाए तो घबराएं नहीं-
पूजा के दौरान अगर दीपक हवा से बुझ जाए, तो यह कोई अपशकुन नहीं है। मन में देवता से क्षमा मांगें और शांति से दोबारा जलाएं। हां अगर आरती के दौरान दीपक गिर जाए, तो देवता का नाम लेकर परिवार की परंपरा के अनुसार, एक छोटी शांति पूजा करना उचित माना गया है।
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तुलसी के पास दीपक रखते हैं तो यह ज़रूर करें-
तुलसी के पास दीपक रखते समय इसे सीधे ज़मीन पर न रखें। पहले अखंड चावल यानी अक्षत ज़मीन पर रखें और उस पर दीपक स्थापित करें। मान्यता है, कि अक्षत पर दीपक रखने से मां लक्ष्मी वहां विराजमान होती हैं और पूजा को सहर्ष स्वीकार करती हैं।
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