Kalyanasundareswarar Temple: तमिलनाडु के तंजावुर जिले में एक ऐसा मंदिर है, जहां रोज एक अनोखा चमत्कार होता है। यहां स्थित शिवलिंग दिन में पांच बार अपना रंग बदलता है और हर बार एक नया रूप दिखाता है। नल्लूर गांव में स्थित कल्याणसुंदरेश्वर मंदिर की यह खासियत सदियों से भक्तों को अपनी ओर खींचती आ रही है। यह सिर्फ आस्था की बात नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
मंदिर में सुबह से लेकर आधी रात तक अलग-अलग समय पर अलग-अलग रंग दिखाई देते हैं। सुबह की आरती में शिवलिंग काला नजर आता है, दोपहर में सफेद, शाम को लाल, रात में हल्का नीला और आधी रात की पूजा के समय चमकीला हरा रंग धारण कर लेता है। हर रंग के साथ अलग पूजा विधि और अलग भाव जुड़े हुए हैं। भक्तों का मानना है, कि यह सब भोलेनाथ की कृपा से होता है, इसमें कोई मानवीय हस्तक्षेप नहीं है।
हजार साल पुराना है यह पवित्र स्थल-
कल्याणसुंदरेश्वर मंदिर तंजावुर से करीब सात किलोमीटर दूर नल्लूर गांव में स्थित है। यह मंदिर करीब एक हजार साल पुराना है और इसका निर्माण महान राजा राजराज चोल प्रथम के शासनकाल में हुआ था। दक्षिण भारतीय शैली में बना यह मंदिर अपनी बारीक पत्थर की नक्काशी और प्राचीन मूर्तियों के लिए जाना जाता है। समय के साथ कई बार इसका जीर्णोद्धार किया गया है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक परंपराएं आज भी वैसी ही बरकरार हैं।

मंदिर में भगवान शिव को कल्याणसुंदरेश्वर के रूप में पूजा जाता है और यहां भगवान मुरुगा का भी खास महत्व है। यह स्थान सिर्फ हिंदुओं के लिए ही नहीं, बल्कि हर धर्म के लोगों के लिए खुला है। यहां श्रद्धा, जिज्ञासा और परंपरा एक साथ मिलती है।
दो शिवलिंग और ब्लैक पगोडा की खासियत-
इस मंदिर को ब्लैक पगोडा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यहां काले पत्थर के दो शिवलिंग स्थापित हैं। एक शिवलिंग गर्भगृह में है, जिसे सोने से ढका गया है। दूसरा शिवलिंग प्रवेश द्वार के पास है और हर सुबह इस पर चंदन का लेप लगाया जाता है। दोपहर तक आते-आते यह एक चमकदार रूप धारण कर लेता है, जो भक्तों का स्वागत करता है।
पांच तरह की पूजा का विधान-
दिनभर में पांच अलग-अलग समय पर भगवान शिव के पांच अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। सुबह की आरती में उन्हें वैद्यनाथ के रूप में पूजा जाता है, जिसमें उनके सिर पर सोने का मुकुट होता है और नंदी उनके साथ होते हैं। दोपहर की पूजा में अन्य पूजनीय रूपों का ध्यान किया जाता है और भक्त परंपरा के अनुसार फूल और चंदन चढ़ाते हैं।

क्या है रंग बदलने की मान्यता-
भक्तों का मानना है, कि शिवलिंग का रंग बदलना एक दैवीय घटना है, जो खुद भगवान शिव की कृपा से होती है। इसके पीछे कोई वैज्ञानिक व्याख्या नहीं है और ना ही कोई मानवीय छेड़छाड़ का सबूत मिला है। यही विश्वास इस मंदिर के आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ा देता है। भक्त इसे प्राकृतिक, पवित्र और नियंत्रण से परे मानते हैं।
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अलग-अलग समय पर आने वाले श्रद्धालु अलग-अलग रंग देखते हैं और हर बार उनकी यात्रा को एक नया अर्थ मिलता है। यह अनुभव सिर्फ दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक एहसास है। कल्याणसुंदरेश्वर मंदिर आज भी वह स्थान है, जहां समय, रंग और भक्ति एक साथ मिलते हैं। यहां की परंपराएं धैर्य, विश्वास और उपस्थिति की मांग करती हैं।
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