Motivational Story: गाँव के छोटे से घर में रहने वाली रीना के मन में हमेशा से एक सपना था – एक दिन शहर जाकर डॉक्टर बनना। उसके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। पिता खेतों में काम करते थे और माँ घर संभालती थी।
“बेटी, हमारे जैसे गरीब लोगों के सपने सिर्फ सपने ही रहते हैं,” अक्सर उसके पिता कहते। लेकिन रीना के मन में दृढ़ विश्वास था।
हर दिन, स्कूल जाने के लिए उसे पाँच किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। बारिश हो या धूप, वह कभी नहीं रुकती थी। रात को लालटेन की रोशनी में पढ़ती और सुबह जल्दी उठकर घर के काम में हाथ बटाती।
दसवीं कक्षा में उसने पूरे जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया। यह खबर सुनकर गाँव के स्कूल के हेडमास्टर उसके घर आए। “रीना का भविष्य उज्जवल है। मैं एक छात्रवृत्ति के लिए उसका नाम भेज रहा हूँ,” उन्होंने कहा।
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उस छात्रवृत्ति के साथ, रीना शहर के होस्टल में रहकर पढ़ाई कर सकती थी। यह एक कठिन निर्णय था। कभी गाँव से बाहर नहीं गई थी वह।
“मुझे विश्वास है कि तुम सफल होगी,” उसकी माँ ने कहा, आँखों में आँसू लिए।
शहर में शुरुआती दिन बहुत मुश्किल थे। नया माहौल, नई भाषा, नए लोग। कई बार रीना ने हार मानने का सोचा, लेकिन फिर अपने सपने और परिवार के त्याग को याद करके वह फिर से जुट जाती।
दिन-रात मेहनत के बाद, रीना ने मेडिकल की परीक्षा पास की और एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला।
पाँच साल बाद, जब वह डॉक्टर बनकर अपने गाँव लौटी, तो पूरे गाँव ने उसका स्वागत किया। उसने अपने गाँव में एक छोटा सा क्लिनिक खोला, जहाँ वह गरीब लोगों का मुफ्त इलाज करती है।
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“कोई भी सपना छोटा नहीं होता, बस हमारी सोच छोटी हो जाती है,” रीना अक्सर गाँव के बच्चों को समझाती है। “अगर मैं कर सकती हूँ, तो तुम भी कर सकते हो।”
आज रीना के गाँव के कई बच्चे उसी के नक्शेकदम पर चल रहे हैं। उसकी कहानी सिर्फ एक डॉक्टर बनने की नहीं, बल्कि साहस, दृढ़ संकल्प और अपने सपनों को साकार करने की है।
सीख: जीवन में कई बाधाएँ आएँगी, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। अपने सपनों पर विश्वास रखें और कभी हार न मानें।
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