Pothole Free Roads India
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    Pothole Free Roads India: क्या आपको लगता है, कि भारत में कोई ऐसी सड़क हो सकती है, जिसमें गड्ढे न हों? शायद आप मुस्कराते हुए कहेंगे, कि यह तो असंभव है। लेकिन पुणे की जेएम रोड (जंगली महाराज रोड) ने यह असंभव को संभव कर दिखाया है। यह सड़क 48 सालों तक बिना किसी गड्ढे के चलती रही, जो कि भारत के सड़क निर्माण के इतिहास में एक अनूठा रिकॉर्ड है।

    रेकॉंडो कंपनी की बेहतरीन इंजीनियरिंग-

    एक पारसी कंपनी थी – रेकॉंडो, जिसे दो पारसी भाइयों द्वारा चलाया जाता था। जब इन्होंने जेएम रोड का निर्माण किया, तो वह अपने काम पर इतने कॉन्फिडेंट थे, कि उन्होंने एक चिट्ठी लिखकर पुणे सरकार को गारंटी दी थी। उनका वादा था, कि इस सड़क में कोई भी दिक्कत अगर अगले 10 सालों तक आई, तो वह बिल्कुल फ्री में रिपेयर करके देंगे।

    यह गारंटी सिर्फ एक दिखावा नहीं थी, बल्कि कंपनी के क्वालिटी स्टैंडर्ड का प्रूफ था। 10 साल बीते, 20 साल बीते, 30 साल बीते, 40 साल भी पार हो गए, लेकिन सड़क में कोई समस्या नहीं आई। यह था उनकी इंजीनियरिंग एक्सीलेंस का स्टैंडर्ड।

    2024 में आया पहला क्रैक-

    साल 2024 में फाइनली इस हिस्टोरिक सड़क में एक बड़ा क्रैक आया, लेकिन यह भी कंपनी के कंस्ट्रक्शन की वजह से नहीं, बल्कि म्युनिसिपैलिटी की गलती के कारण। नीचे ड्रेनेज का काम गलत तरीके से किया गया था, जिसकी वजह से यह लीजेंडरी सड़क टूट गई। यानी सड़क कंस्ट्रक्शन में कोई कमी नहीं थी, बल्कि बाद के मेंटेनेंस वर्क में लापरवाही हुई थी।

    सरकार ने क्यों नहीं दिया इस कंपनी को दोबारा प्रोजेक्ट?

    यहां आती है, असली पॉलिटिक्स की बात। रेकॉंडो कंपनी को इसके बाद कभी भी कोई और गवर्नमेंट प्रोजेक्ट नहीं मिला। आपको लगता है, यह को-इंसीडेंस है? या इसके पीछे करप्शन का पूरा सिस्टम है। आज के समय में लगभग हर सड़क सालभर में खराब हो जाती हैं, फिर रिपेयर के लिए नए टेंडर निकलते हैं और करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। लेकिन फिर भी सरकरार इस तरह से काम नहीं करवाती की सड़कें सालों साल चलें। जिससे पैसों की भी बचत होगी और लोगों को परेशानी का सामना भी नहीं करना पड़ेगा।

    इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स बनाम इंडियन रियलिटी-

    जर्मनी और अन्य डेवलप्ड देशों की सड़कें 50 सालों से वैसी की वैसी चल रही हैं। वहां सड़क कंस्ट्रक्शन इस फिलॉसफी से होता है, कि एक बार बनाकर दशकों तक चलाना है। लेकिन भारत में प्लानिंग यह होती है, कि हर कुछ सालों में रिपेयर वर्क निकलना चाहिए। यह सिर्फ टेक्निकल प्रॉब्लम नहीं है बल्कि सिस्टेमिक प्रॉब्लम भी है। अच्छी सड़कें बनाने की टेक्नोलॉजी हमारे पास है, एक्सपर्टीज भी है, लेकिन इंटेंट नहीं है। क्योंकि ड्यूरेबल सड़कें बनाने से बार-बार के टेंडर बिजनेस खत्म हो जाते हैं।

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    आम आदमी को क्यों झेलने पड़ते हैं पॉट होल्स?

    आज हर इंडियन सिटीजन को डेली बेसिस पर पॉट होल भरी सड़कों पर ट्रैवल करना पड़ता है। वीकल डैमेज होता है, एक्सीडेंट होते हैं, फ्यूल कंजम्पशन बढ़ता है, और टाइम वेस्ट होता है। लेकिन यह सब इसलिए है, क्योंकि सिस्टम में बिल्ट-इन इनएफिशिएंसी है।

    जेएम रोड का एग्जाम्पल प्रूव करता है, कि हम वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर बना सकते हैं। बस जरूरत है, ऑनेस्ट इंटेंट और लॉन्ग-टर्म विजन की। रेकॉंडो कंपनी ने 1976 में दिखा दिया था, कि कैसे क्वालिटी वर्क करके सिटीजन सर्विस की जा सकती है।

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