Viral Video: मलेशिया से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जो इंसानियत को शर्मसार करने वाला है। तमिलनाडु के एक मजदूर को बैंक के बाहर सोने की ‘गलती’ पर पानी की तेज बौछार से नहलाया गया और लातों से पीटा गया। वायरल हो रहे वीडियो में 39 साल के सफीउद्दीन पक्कीर मोहम्मद को फुटपाथ पर बैठे देखा जा सकता है, जब एक सिक्योरिटी गार्ड उन पर पानी की तेज धार से हमला करता है। कुछ देर बाद एक और शख्स आता है और उन्हें लात मारकर वहां से भगाने की कोशिश करता है। लेकिन इस शर्मनाक घटना के पीछे की कहानी और भी दर्दनाक है।
सफीउद्दीन ने फ्री मलेशिया टुडे से बात करते हुए बताया, कि वे भारत वापस लौटना चाहते हैं लेकिन उनके पूर्व नियोक्ता ने उनका पासपोर्ट और बकाया वेतन दोनों रोक रखे हैं। 2024 में तमिलनाडु से अपनी पत्नी और दो छोटे बेटों को सपोर्ट करने की उम्मीद में वे मलेशिया आए थे। मार्च में उन्होंने कुआला लंपुर के श्री गोम्बक में एक रेस्टोरेंट में कुक के तौर पर काम शुरू किया था।
नौकरी के नाम पर लूट और शोषण-
काम शुरू करने से पहले सफीउद्दीन ने अपने एम्प्लॉयर को वर्क परमिट के लिए RM 3,500 और हेल्थकेयर के लिए RM 1,200 दिए। लेकिन उनका नियोक्ता बार-बार उन्हें वेतन देने में विफल रहा। कई बार तो महीनों तक सैलरी नहीं दी गई, जिससे वे घर पर पैसे नहीं भेज पाए। उनका पासपोर्ट भी रोक लिया गया, जिससे वे न तो नौकरी छोड़ सकते थे और न ही भारत लौट सकते थे। जब उन्होंने इस्तीफा देने की कोशिश की तो उन्हें ऐसा करने की इजाजत नहीं दी गई, जिसके बाद उन्होंने करीब छह महीने पहले काम करना बंद कर दिया।
Hanya seorang tukang kasut dan pengawal keselamatan, tapi lagaknya nauzubillah… sampai sanggup simbah air dan naik kaki halau gelandangan, seolah² manusia tu takdak maruah. Dari sini jelas, perancangan Allah itu Maha Tepat. Tidak hairanlah rezeki mereka ditetapkan hanya sebagai… pic.twitter.com/mS1lq8mAqM
— 𝙸𝚗𝚌𝚎𝚔 𝚂𝚝𝚎𝚊𝚍𝚢 (@amr_zhn01) November 25, 2025
बिना आमदनी, बिना दस्तावेज और रहने की जगह के बिना सफीउद्दीन कुआला लंपुर की सड़कों पर रहने को मजबूर हो गए। कई दिनों तक वे तमन मलूरी के एक AmBank ब्रांच के बाहर सोते रहे, जब तक कि यह वायरल घटना नहीं हो गई। सफीउद्दीन ने कहा, कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था, कि दुनिया उन्हें इस तरह की कमजोर स्थिति में देखेगी। उन्होंने FMT से कहा, कि अगर उन्हें बस जाने के लिए कहा जाता तो वे चुपचाप चले जाते। वे बहुत कमजोर, भूखे, तनावग्रस्त और डिप्रेशन में थे।
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मदद के लिए आगे आए सामाजिक कार्यकर्ता-
वीडियो वायरल होने और लोगों के गुस्से के बाद बेघरों के लिए शेल्टर चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता टोनी लियान ने सफीउद्दीन को एक सुरक्षित जगह देने के लिए कदम उठाया। न्यू स्ट्रेट्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, लियान नियोक्ता पर दबाव बनाने की योजना बना रहे हैं, ताकि सफीउद्दीन का पासपोर्ट लौटाया जाए। वे उन कर्जों को चुकाने में मदद के लिए फंड जुटाने की भी कोशिश कर रहे हैं, जिसने सफीउद्दीन को इस हालत में पहुंचा दिया। यह घटना विदेशों में काम करने वाले भारतीय मजदूरों की दुर्दशा और शोषण की एक और दर्दनाक मिसाल है।
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