Unique House
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    Unique House: ज़रा सोचिए आप सुबह उठे, भारत में नाश्ता किया और रात का खाना खाने के लिए बस कुछ कदम चले और पहुंच गए म्यांमार। यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि नागालैंड के लोंगवा गांव की हकीकत है। यहां एक ऐसा घर है, जो सचमुच दो देशों में बंटा हुआ है भारत और म्यांमार। ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर स्वाति और प्रतीक ने इस अनोखे घर का एक वीडियो शेयर किया, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

    राजा का घर आधा भारत में, आधा म्यांमार में-

    यह घर कोन्याक नागा जनजाति के वंशानुगत राजा यानी ‘आंग’ का है। यह विशाल लकड़ी का घर ठीक उस अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा पर बना है, जो भारत और म्यांमार को अलग करती है। वीडियो में स्वाति बताती हैं, “यहां का राजा एक साथ दो देशों में रहता है। किचन बर्मा यानी म्यांमार में है और खाने की जगह भारत में। वो एक देश में खाना खाता है और दूसरे देश में सोता है।” यह सुनने में जितना अजीब लगता है, उतना ही दिलचस्प भी है।

    सदियों पुरानी विरासत का जीता-जागता घर-

    यह घर सिर्फ एक भौगोलिक अजूबा नहीं है, यह कोन्याक नागा संस्कृति का एक जीवंत संग्रहालय है। इस जनजाति ने इन ज़मीनों पर तब से बसेरा किया है, जब आधुनिक सरकारों ने नक्शे पर लकीरें खींचना भी शुरू नहीं किया था। घर की ऊंची छत, खुले सामुदायिक कक्ष और दरवाज़े पर बने योद्धाओं व जंगली जानवरों की लकड़ी की नक्काशी इस जनजाति की समृद्ध परंपरा की गवाही देती है। दीवारों पर जानवरों की खोपड़ियां, पारंपरिक घंटियां और पुराने हथियार टंगे हैं, जो इस जनजाति के बहादुर इतिहास की याद दिलाते हैं।

    देश की सीमा से बड़ी है यहां की आत्मीयता-

    स्वाति और प्रतीक ने अपने वीडियो के साथ एक भावुक कैप्शन लिखा, “यह शायद वो सबसे अनोखा घर है, जो हमने भारत में देखा है। बीच से गुज़रती सीमा तो बस शुरुआत है, इसके पीछे एक ऐसा इतिहास है, जिसमें जनजातियां देशों से पहले अस्तित्व में थीं और जहां समुदाय प्रशासन से ज़्यादा मायने रखता था। नागालैंड आज भी वो भावना अपने अंदर समेटे हुए है।” यहां आने वाले मेहमानों को पारंपरिक पोशाक पहनकर स्थानीय संस्कृति में खुद को डुबोने का मौका भी मिलता है।

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    जब नक्शे की लकीरें बेमानी लगने लगें-

    लोंगवा गांव का यह घर हमें याद दिलाता है, कि दुनिया के नक्शे पर खिंची लकीरें भले ही देशों को बांटती हों, लेकिन इंसानी रिश्ते, संस्कृति और जड़ें किसी सीमा की मोहताज नहीं होतीं। कोन्याक नागा जनजाति के लिए यह घर सिर्फ एक इमारत नहीं, यह उनकी पहचान है, उनका इतिहास है, उनका गर्व है और इसीलिए यह वीडियो लाखों लोगों के दिल को छू रहा है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।