India Pakistan Military Comparison
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    India Pakistan Military Comparison: अभी हाल ही में पाकिस्तान के डिप्टी पीएम ने बयान दिया है, कि सिंधु नदी का पानी रोकना एक्ट ऑफ वॉर माना जाएगा। इधर पीएम नरेंद्र मोदी ने डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह के साथ हाई लेवल मीटिंग की है, जिसमें से अजीत डोभाल, अनिल चौहान और तीनों सेनाओं के मुख्य मौजूद रहे। मीटिंग में पीएम मोदी ने कहा, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का तरीका टारगेट और वक्त सेना तय करें। होम मिनिस्टर अमित शाह ने भी NCG, BSF, CRPF और SSB को सीनियर अधिकारियों के साथ बैठक की है. रशियन मीडिया के बाद, अमेरिकन अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी कहा है, कि भारत पाकिस्तान पर हमले की तैयारी में दिख रहा है. अब तैयारी की बात तो ठीक है, लेकिन अगर सच में जंग हुई तो वो पाकिस्तान जिसमे डीज़ल भी 280 रुपए है. जहां महंगाई की मार से पब्लिक परेशान है, वो इंडिया के सामने अगर जंग हुई तो कितने दिन टिक पाएगा और जो एक्ट ऑफ फॉर एक्ट ऑफ का रोना लगाया जा रहा है क्या उसकी पोजीशन है कि वो इंडिया से जंग जीत सकता है।

    India Pakistan Military Comparison इंवॉल्वमेंट से इनकार-

    पहलगाम अटैक के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। एक तरफ पाकिस्तान इस हमले में किसी भी तरह के इंवॉल्वमेंट से इनकार कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ उसने लश्करे तैवा के आतंकियों को पनाह दे रखी है। वहीं इस हमले के जवाब में भारत के एक्शन पर पाकिस्तान सरकार ऐसे रिस्पॉन्स दे रही है, मानो जंग ही होने वाली है। अब अगर जंग होती है तो कौन जीतेगा और कौन हारेगा ये देखने से पहले ये समझते हैं, कि ये जंग होती कैसी है. ये जो पाकिस्तान ऐलान किए जा रहा है कि हम ये कर देंगे हम वो कर देंगे.

    देखो असल में कोई भी देश जंग का ऐलान करके जंग नहीं लड़ता है। जी हां किसी एक देश की कार्रवाई के बदले में. दूसरी तरफ से जैसा रिएक्शन आता है उसके हिसाब से तय होता है, कि आगे का एक्शन कितना सख्त होगा यानी अगर दोनों तरफ से कार्रवाई बढ़ती है तो कहा जाता है, की अब लड़ाई बढ़ रही है. इस लड़ाई में अब आर्मी एयर फोर्स और नेवी सेना के तीनों संग शामिल हो जाते हैं, तो इसे पूरी तरह से शुरू हो चुकी जंग कह सकते हैं। मतलब ये बिल्कूल अलग होती है. अब आप इसका अंदाजा इससे भी लगा सकते हो की एक हजार नौ सौ निन्यानवे में हुई कारगिल की लड़ाई एक सीमित जंग यानी लिमिटेड war थी. हमारे टारगेट तय थे, की हमे अपनी जमीन को वापस पाना है. लड़ाई में हमने अपने प्वाइंट्स वापस पा लिए और जंग में जीत का ऐलान कर दिया। वहीं इस वक्त के जो हालात हैं। उन्हें देखकर ऐसा नहीं लग रहा है कि जंग छिड़ जाएगी।

    लेकिन अगर दोनों तरफ से जवाबी कार्रवाई बढ़ी तो बात जग तक पहुंच सकती है। लेकिन फिर भी एक फूल फैज़ वॉर के आसार तो नजर नहीं आ रहे। लेकिन फिर भी पाकिस्तान पर कौन भरोसा करे, वो तो कभी भी बेवकूफी कर सकता है, तो ऐसे में ये भी हमें पता होना चाहिए ना कि अगर वॉर हुई तो इंडिया की मिलिट्री ताकत के आगे पाकिस्तान कितना कमजोर है. फायर पावर इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया पाकिस्तान से तीन गुना ज्यादा ताकतवर है. एक सौ पैंतालीस देशों की लिस्ट में अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चौथे नंबर पर है जबकि पाकिस्तान बारहवे नंबर पर है।

    India Pakistan Military Comparison टॉप 10 देशों की लिस्ट से बाहर-

    दौ हजार तेईस में पाकिस्तान सातवें नंबर पर था, लेकिन फिर दौ हजार चौबीस में फिसल कर नवे पर पहुंच गया और दौ हजार पच्चीस में टॉप टेन देशों की लिस्ट से बाहर हो गया. यानी भारत के पास दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर सेना है. जबकि पाकिस्तान, आठ नंबर पीछे है और ये ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स कोई दो-चार पैरामीटर के हिसाब से रैंकिग नहीं देता। बल्कि साठ अलग-अलग पैरामीटर्स पर देशों की ताकत को परखा जाता है। किसी देश की ताकत उसके स्कोर पर depend करती है. जिस देश का स्कोर जितना ज्यादा होता है उसकी ताकत उतनी ही कम आंकी जाती है। भारत का स्कोर 0.1184 है जबकि पाकिस्तान का स्कोर 0.2513 है. तो इस रैंकिग को कोई फालतू या बेतूके स्टेटमेट में खारिज भी नहीं कर सकता। अब यह जरा डिटेल में भारत वर्सेस पाकिस्तान करते हैं और समझते हिसाब के भारत इसमें कहां ठहरता है. जैसा हमने पहले बताया आपको की भारत इस लिस्ट में 0.1184 स्कोर के साथ चौथे नंबर पर है, जो किसी भी देश में आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को मिलाकर बनती है। इंडियन आर्म फोर्सेज और अगर इंडियन आर्मी की बात की जाए, तो उसके पास चौदह लाख पचपन हजार पाँच सौ पचास एक्टिव फोर्सेस है. जबकि रिजर्व फोर्स की संख्या ग्यारह लाख पचपन हजार, एयरफोर्स के पास तीन लाख दस हजार पांच सौ पिचहत्तर सैनिक है. वहीं इंडियन नेवी के पास एक लाख बयालीस हज़ार दौ सौ बावन सैनिक है।

    ग्लोबल फायर पावर अर्धसैनिक बलों यानी पैरा मिलिट्री फोर्स के नंबर भी पब्लिक करता है। पच्चीस लाख सत्ताईस हजार सैनिकों के साथ दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी पैरा मिलिट्री फोर्स भारत के पास है. सेना और पैरा मिलिट्री फोर्सेस की संख्या को अगर जोड़ दें तो भारत के पास कूल इक्यावन लाख सैंतीस हज़ार पांच सौ पचास ऐसे सैनिक हैं, जो किसी जग या मुश्किल हालातों के लिए हमेशा तैयार रहते है। अब बात करते हैं पाकिस्तान की पाकिस्तान और भारत के बीच अब तक चार बार जंग हो चुकी है.

    पाकिस्तान की मिलिट्री क्षमता पर हमेशा से भारत की नजर रहती है. जैसे मैंने आपको पहले बताया कि दौ हजार पच्चीस में तो टॉप टेन से बाहर होकर बारहवें नबर पर खिसक गया। साल दौ हजार तेईस में जो पाकिस्तान सातवें स्थान पर था उसकी रैंकिंग में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। भारत के मुकाबले पाकिस्तान इस लिस्ट में काफी पीछे है. अब एक नजर डालते हैं आंकडों पर और समझते हैं के भारत और पाकिस्तान के बीच कितना फासला है. भारत के पास चौदह लाख पचपन हजार पाँच सौ पचास एक्टिव फोर्स, वहीं पाकिस्तान के पास 6 लाख चौवन हजार एक्टि फोर्सेज हैं‌।

    India Pakistan Military Comparison रिजर्व सैनिकों की संख्या-

    भारत के रिजर्व सैनिकों की संख्या ग्यारह लाख पचपन हजार है, जबकि पाकिस्तान के पास कुल पाँच लाख पचास हज़ार रिजर्व सैनिक है, पैरा मिलिट्री फोर्स को अगर देखें तो भारत के पास जहां पच्चीस लाख सत्ताईस हजार सैनिकों की क्षमता है, वहीं पाकिस्तान के पास पाँच लाख की पैरामिलिट्री फोर्स है। अब आते है हथियारों पर अब भाई फोर्स चाहे कितनी भी बड़ी ही क्यों ना हो पर हथियार भी तो तगड़े होने चाहिए, तो इसलिए अब देखते हैं की पाकिस्तान के मुकाबले भारत के पास हथियारों का कितना बड़ा जखीरा है. ग्लोबल फायर पावर इंडेक्स के मुताबिक, भारत के पास पाकिस्तान की तुलना में करीब तीन गुना ज्यादा बड़े हथियारों का जखीरा है।

    भारत के पारा मिसाइल ड्रोन अटैक और समुद्री जमीनी लड़ाई के लिए हथियारों का बड़ा जखिरा है और हर तरह के वॉरशिप है। सबसे पहले बात करते हैं ग्राउंड फोर्स की. ग्राउंड फोर्स उन बलों को कहते हैं, जो जमीनी लड़ाई लड़ते हैं. इसमें मेनली थलसेना और उससे जुड़े सातों सामान मसलन टैंक, तोपे, बख्तरबंद गाड़ियां, रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम आदि ये सब आते हैं। अब एक न डालते हैं भारत और पाकिसतान दोनों के ग्राउंड फोर्सस पर। यहा एक टर्म आता है, सेल्फ पॉपिल्ड और टोल्ड आर्टिलरी। सेल्फ प्रोपर्ल्ड आर्टलरी का मतलब है, ऐसी तोपें जो खुद से मूव करने के लिए काबिल होती है। वहीं टोड आर्टिलरी उसे कहते हैं, जिन्हें किसी गाड़ी से बांधकर खींचा जाता है। ये दोनों ही चीजें याद रखें आगे काम आएंग। तो साहब, जमीनी मोर्चे पर भारत ज्यादा मजबूत है। क्योंकि हमारे पास रात में लड़ाई करने के हथियार तक बड़े amount में मौजूद हैं।

    भारत के पास T90 भीष्म और अर्जुन जैसे ताकतवर टैंक है. हालांकि रोल्फ प्रोपल्ड आर्टिलरी यानी तोपों के मामले में पाकिरतान के पास बढ़त है. लेकिन मोबाइल आर्टिलरी यानी एक जगह से दूसरी जगह ले जाए जाने वाली तोपें भारत के पास बहुत ज्यादा है. पाकिस्तान के मुकाबले भारत के पास एक दशमलव छः गुना ज्यादा तोपे हैं। भारत के पास रात में लड़ाई करने के लिए अपग्रेडिङ हथियार हैं. वहीं डिजिटल वॉर फेयर के मामले में भारत कही आगे है।. Air power 1971 की जंग में इंडियन एयरफोर्स के हंटर जेट्स ने लोंगे वाला बॉर्डर पर पाकिस्तानी टैंकों का शिकार किया था। एक 1999 में हुई कारगिल की जंग के दौरान भी इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तान की नाक में दम कर दिया था.

    जासूसी निगरानी और लॉजिस्टक्स-

    मॉडर्न वॉर फेयर में एयरफोर्स न सिर्फ हमला करने बल्कि जासूसी निगरानी और लॉजिस्टक्स में भी अहम भूमिका निभाती है। अब इस लिहाज से ही जरूरी है कि भारत की एयरफोर्स भी लगातार मॉडर्न और एडवांस रहे। हालाकि फिलहाल हम एयरफोर्ट के जहाजों की कमी से जूझ रहे है. बयालीस स्क्वाड्रन की एक्सटेंडेड नंबर के बावजूद indian air force इस वक्त सिर्फ इकतीस के साथ ऑपरेट कर रही है। दूसरी तरफ पाकिस्तानी बेडे में कुछ नए प्लेन जैसे जेएफ 17 और थंडर शामिल हुए हैं. पाकिस्तान ने इन्हें चीन से लिया है.

    लेकिन फिर भी पाकिस्तान के मुकाबले इंडियन एयर फोर्स कही ज्यादा मजबूत है। rafail और सुखोई जैसे भारतीय फाइटर जेट के आगे पाकिस्तानी f16 जैसे जैट्स कमजोर हैं. भारत के पास हीरोन, हारोप और हरमिस जैसे इजराइली ड्रोन भी हैं, जो साढे चार सौ किलोमीटर से लेकर हजार किलोमीटर तक वॉर कर सकते हैं।

    भारत के पास हम अमेरिकी mq9b रीपर जैसे बड़े और सबसे ताकतवर ड्रोन हैं जो ins विक्रात वॉरशिप से समुद्र में उड़कर टारगेट पर हमला कर सकते हैं। नवल पावर। अब नेवी वो फोर्स है जो किसी भी जंग का रुख पलटने की ताकत रखती है। 1971 के युद्ध में इंडियन नेवी ने पाकिस्तान के कराची पोर्ट पर बड़ा हमला किया था। इससे उनके तेल और गैस के डिपो में आग लग गई। इससे कराची बंदरगाह कई दिनों तक धूं धूं करके जलता रहा और आज के वक्त में भारत के पास आईनएस विक्रमादित्य और आईनएस विक्रात जैसे भारी एयरक्राफ्ट केरियर हैं।

    जबकि पाकिस्तान के पास कोई भी एयरक्राफ्ट cariere नहीं है. भारत और पाकिस्तान के बीच लंबी कॉस्टल लाइन यानी समुद्री तट रेखा है। ऐसे में ये एयरक्राफ्ट कैरियर भारत के लिए समुद्र से फाइटर जेट्स लॉन्च करने में मददगार होंगे। इसके अलावा भारत के पास न्यूक्लियर सबमरीन है जो अभी पाकिस्तान के पास नहीं है. हालांकि पाकिस्तान बाबर जैसी मिसाइल्स को पनडुब्बियों से लॉन्च करने की तकनीक develop कर रहा है लेकिन फिलहाल तो इन सभी जगह इंडिया काफी नहीं, बहुत ज्यादा आगे है। अब nuclear power की बात की जाए तो भी भारत सिर्फ आगे नहीं है बल्कि ज्यादा बेहतर misiles के साथ है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट की स्टेटस ऑफ वर्ल्ड न्यूक्लियर forces. रिपोर्ट दौ हजार पच्चीस के मुताबिक, भारत के पास एक सौ अस्सी परमाणु हथियार हैं, वहीं पाकिस्तान के पास दस कम यानी एक सौ सत्तर है, परमाणु हथियारों वाली न्यूक्लियर पावर के मामले में भारत और पाकिस्तान लगभग एक जैसी ताकत रखते हैं.

    पृथ्वी और अग्नि सीरीज की मिसाइल्स-

    न्यूक्लियर depins को भारत पृथ्वी और अग्नि सीरीज की मिसाइल्स जिनकी रेंज सात सौ से आठ हजार किलोमीटर से लॉन्च कर सकता है. आईनएस अरिहंत और अरिघाट जैसी न्यूक्लियर सबमरीन इनसे k15 सागरिका और k4 लॉन्च कर न्यूक्लिपर अटैक किया जा सकता है। वहीं मिराज दौ हजार और जैगुआर जैसे जहाज न्यूकिनयर मिसाइल लॉन्च कर सकते हैं. भारत के पास ऐसे चार सौ एयर डिफेंस सिस्टम हैं, जो पाकिस्तान की दागी हुई मिसाइल्स को ट्रैक करके हवा में ही खत्म कर सकता है। वहीं पाकिस्तान के पास दौ हजार सात सौ पचास किलोमीटर रेंज की शाहीन थ्री मिसाइल है। इसके अलावा सात सौ पचास किलोमीटर पर आर वाली बाबर और तीन सौ पचास किलोमीटर पर आर वाली और रात जैसी क्रूज मिसाइल है, जो न्यूक्लियर वेपन ले जा सकती है। उसके पास f16 और f17 जैसे न्यूक्लियर वेपन ले जा सकने वाले जेंट्स भी है। चलो फायर पावर की बात तो हो गई। लेकिन अब आते मुद्दे पर की जंग लड़ने के लिए पैसा है हमारे अगर फूल फलेज वॉर हुई तो दोनों देश कितना पैसा खर्च कर सकते हैं.

    देखो फूलफ्लज वॉर के हालात में रोजाना का खर्च, तैनाती, हथियारों के इस्तेमाल, लॉजिस्टिक्स, इंधन, रखरखाव और इंफ्रास्ट्रक्चर पर डिपेंड करता है। सरकार कभी भी जंग में रोजाना की खर्च का ऑफिशियल ब्यौरा जारी नहीं करती. हालांकि डिफेंस बजट मिलिट्री रिसोर्स और जंग की लागत से अंदाजा लगा सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौरान भारत ने रोजाना करीब एक हजार चार सौ करोड़ रुपए खर्च किए। जबकि पाकिस्तान ने सिर्फ तीन सौ सत्तर करोड़ रुपए खर्च किए‌। यानी भारत ने करीब चार गुना ज्यादा पैसा जंग में खर्च किया। अब छब्बीस साल बाद अगर फुल प्लेयर वॉर की स्थिति बनती है, तब भी भारत पाकिस्तान से कहीं ज्यादा पैसा खर्च कर सकता है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो भारत जंग में करीब एक हजार पाँच सौ से दो हजार करोड़ रुपए प्रतिदिन खर्च कर सकता है और पाकिस्तान चार सौ से छः सौ करोड़ रुपए खर्च कर सकता है. हालांकि ये सिर्फ एक अंदाजा है जरूरत पड़ने पर भारत फॉरेन रिज़र्व और इमरजेंसी पड़ने पर अलग से पैसा जुटा भी सकता है. क्योंकि इंडिया की जीडीपी और डिफेंस बजट पाकिस्तान से दस गुना ज्यादा है. पाकिस्तान की जीडीपी जहां 301 लाख करोड़ रुपए है, वहीं इंडिया की तीन सौ चौबीस दशमलव एक लाख करोड़ रुपए है.

    डिफेंस बजट पाकिस्तान का जहां सिर्फ चौसट हज़ार करोड़ रुपए का है, तो इंडिया का छः दशमलव आठ लाख करोड़ रुपए है. तो डॉक्टर तो टक्कर की बात तो छोड़ो पाकिस्तान भारत के आसपास भी नहीं है। तो ऐसे में अगर भारत औरपाकिस्तान में जग हुई तो पाक कितने दिन टीक पाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के पास चालीस आई लेवल का गोला बारूद है. इसका मतलब है कि फुल फ्लेयर यानी पूरी तरह जंग छिड़ भी जाए तो भारत का गोला बारूद चालीस दिन तक चलेगा, हालाकि दो हजार सत्रह में सीएजी की रिपोर्ट में कहा भी गया था, कि भारत के पास दस दिन तक लगातार जंग लड़ने लायक गोलाबारूद है.

    रिस्क और फाइनेंस ऑडिट करने वाली फर्म केपीएमजी और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड industry यानी ficci ने दौ हजार चौबीस main AMU India 2024 नाम की रिपोर्ट जारी की थी, जिसके मुताबिक बीते सालों में भारत से गोलाबारूद का एक्सपोर्ट बढ़ा है. 2023 से 2024 में भारत ने आठ सौ सैंतीस करोड़ के सैतालीस लाख कम्यूनेशन यानी गोला बारूद दूसरे देशों से खरीदा है. जबकि इसी साल भारत ने एक हज़ार दौ सौ तीस करोड़ रुपए का गोला बारूद बेचा. दिसंबर दो हजार चौबीस में हिंदू बिजनेस लाइन अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत गोला बारूद के मामले में 88 प्रतिशत आत्मनिर्भर हो चुका है. अलग-अलग साइज और टाइप के कुल एक सौ पिचहत्तर तरह के गोला बारूद में से भारत एक सो चौवन तरह के गोलाबाद खुद बना रहे है।

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    पाकिस्तान के पास करीब सात दिन तक लड़ने का गोलाबारूद-

    मीडिया रिपोर्ट्स में दावा भी किया गया है, कि भीषण जंग के हालात में पाकिस्तान के पास करीब सात दिन तक लड़ने का गोलाबारूद है। इसके अलावा महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान के लिए जंग के दौरान दूसरे खर्च उठाना भी बहुत मुश्किल है।

    एक्सपर्ट्स का मानना है, कि ये महज एक थ्योरी होती है कि कोई देश कितने दिन तक जंग में टिक पाएगा। जंग की शुरुआत में देखा जाता है, कि दुश्मन के कमज़ोर पॉइंट कौन से है। ये नहीं देखा जाता कि किस देश के पास कितना गोला बारूद हैं. यानी दूसरे देश के गोला बारूद की संख्या से ये नहीं तय किया जाता, कि उस पर हमला करना है या नहीं करना। जब सेना के सारे फ्रंट खुल जाते हैं तब ये आंकडे देखे जाते हैं। हालांकि फूल प्लेयर वॉर के दौरान चाहे पाकिस्तान हो या भारत दोनों ही आपसी सैन्य ताकत और गोला बारूद बढ़ा सकते हैं, दूसरे देशों से भी मदद ले सकते। हालांकि पाकिस्तान का जंग के लिए बयान देना भी बेवकूफी से कम नहीं है क्योकि आज भारत की इकोनॉमी कई पैरामीटर्स पर पाकिस्तान से कई गुना बेहतर है और पाकिस्तान की हालत इस नक्त बेहद खराब है।

    पाकिस्तान की खराब माली हालत का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि इस वक्त पाकिस्तान में डीजल की कीमत ही दो सौ अस्सी रुपए प्रति लीटर से ज्यादा है. यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई दौ हजार तेईस में पाकिस्तान ने पूरे साल के लिए सभी युद्ध अभ्यास रोक दिए थे. उसकी वजह भी के reserv फ्यूल और लुविकेट की कमी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ही पाकिस्तान के पास फ्यूल तक नहीं है।

    इसके अलावा दौ हजार बाईस में पाकिस्तान ने शुक्रवार को driday घोषित किया था। इस दिन सरकारी गाडियां सिर्फ emrgency में चलती थी. इसके अलावा पार्क सेना ने कोविड फंड और हथियार खरीदने के लिए मिले तीन सौ करोड़ रुपये पाकिस्तानी सरकार को वापस कर दिए थे. फरवरी दौ हज़ार इक्कीस में पाकिस्तान ने भारत के साथ युद्ध विराम समझौते पर सहमति इसलिए जताई थी, क्योंकि इसकी बड़ी वजह जंग की लागत थी. एक तोप के गोले की कीमत लगभग छः लाख रुपए होती है, जबकि बारह बोर का एक कारतूस पाँच सौ से ज्यादा का आता है। फरवरी दो हजार इक्कीस में पाक आर्मी जनरल ने भी पत्रकारों के सामने माना था कि पाकिस्तान के टैंक और व्हीकल जंग खा चुके हैं और उनकी सेना के पास जंग लड़ने के लिए पैसे ही नहीं है। तो ऐसे में ये सारे बयान सिर्फ बेवकूफी के अलावा कुछ नहीं है।

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