China Cyber War: चीन के हैकर्स पहले दुनिया भर के हैकिंग कॉम्पटीशन में हिस्सा लेकर पहली पोजीशन हासिल करते थे, लेकिन 2017 के बाद अचानक उनकी प्रेज़ेंस गायब हो गई। पहले तो किसी को समझ नहीं आया, कि आखिर चाइनीज़ हैकर्स हिस्सा क्यों नहीं ले रहे, लेकिन फिर 2019 में कुछ ऐसा हुआ, जिसने चाइना के डेंजरस प्लान का पर्दा फाश़ कर दिया।
दरअस मार्च 2017 में चीन से हैकर्स का एक ग्रुप कनाडा के शहर वेंकूवर जाता है, उनका मिशन दुनिया के सबसे ज्यादा यूज़ होने वाले सॉफ्टवेयर और डिवाइसेज के अंदर छुपी हुई कमजोरी ढूंढना था। उनके निशाने पर थे गूगल के क्रोम ब्राउज़र, माइक्रोसॉफ्ट विंडो और एप्पल के आईफोन्स। लेकिन ये लोग किसी गलत काम के लिए नहीं गए थे, ये लोग एक लीगल हैकिंग कंपटीशन में हिस्सा लेने गए थे। जिसे पॉन टू ऑन (pwn2on) कहा जाता है, यह दुनिया का एक बहुत बड़ा हैकिंग कंपटीशन है। जिसमें हैकर्स कंपनीस के सॉफ्टवेयर को हैक करके उसमें सिक्योरिटी लॉस या लूप होल ढूंढते हैं और इसके बदले में उन्हें कैश प्राइज मिलता है।
China Cyber War सबसे बड़ा प्राइस-
इस कंपटीशन में अलग-अलग प्राइस होते हैं, डेढ़ लाख डॉलर से लेकर 1 मिलियन डॉलर्स तक। सबसे बड़ा प्राइस कोई ऐसी वलनेरेबिलिटी ढूंढने में मिलता है, जिसे पहले किसी ने नहीं ढूंढा हो और इसे कहते हैं ज़ीरो वलनेरेबिलिटी, जब कोई हैकर ऐसा कोई फ्लो ढूंढता है, तो वह डिटेल्स उस कंपनी को दी जाती है, जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट या फिर एप्पल। ताकि वह उस प्रॉब्लम को नई अपडेट रिलीज करके फॉरेन ठीक कर सके और हैकर्स को मिलता है, लाखों डॉलर्स का कैश प्राइज। यानी ये एक एथिकल हैकर्स कंपटीशन होता है, जिसमें हैकिंग से किसी को नुकसान नहीं बल्कि सिक्योरिटी और ज्यादा बेहतर बनाई जाती है।
कई सालों तक चीनी हैकर्स ऐसे कंपटीशन में सबसे आगे रहते थे, चाहे वह पॉन टू ऑन हो या कोई और हैकिंग इवेंट। चीनी हैकर्स हमेशा बाजी ले जाते थे, पर 2017 के बाद सब कुछ अचानक बदल गया। चीनी हैकर्स जो दुनिया भर के हैकिंग इवेंट्स में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे। अचानक कहीं गायब हो गए 2017 के बाद जितने भी हैकिंग इवेंट्स हुए उनमें चीनी हैकर्स की कमी सब ने नोटिस की। यह खामोशी सबको तंग कर रही थी, खासकर अमेरिका को और इसी दौरान चीन की एक बड़ी साइबर सिक्योरिटी फॉर्म की तरफ से एक रेंडम मैसेज ने सबके कान खड़े कर दिए।
China Cyber War चीन की न्यूज़ एजेंसी-
Qihoo 360 चीन की एक टॉप साइबर सिक्योरिटी फॉर्म है। उसके सीईओ जो हंगेई का एक बयान सामने आया। जिसमें वह इन चीनी हैकर्स को काफी क्रिटिसाइज करते हुए नजर आए। उनका कहना था, कि वह अपनी हैकिंग स्किल बाहर के देशों को जाकर क्यों दिखाते हैं। यह बयान उन्होंने चीन की न्यूज़ एजेंसी सीना को दिया, जिसमें उनका कहना था, कि ऐसे इवेंट्स में अच्छा परफॉर्म करना सिर्फ एक ख्याली जीत है, यानी सिर्फ एक दिखावा। उनका कहना था, कि जो वूलनेरेबिलिटीज आप लोग ढूंढते हो, उनकी कीमत चंद लाख डॉलर्स नहीं बल्कि बिलियंस आफ डॉलर्स है। Qihoo 360 के सीईओ का यह बयान आने के कुछ समय बाद ही चीनी हैकर्स ने इंटरनेशनल हैकिंग कंपटीशन में हिस्सा लेना बंद कर दिया।
लेकिन चीनी हैकर्स ने वोलंटीयरली ऐसा नहीं किया, बल्कि चाइनीस गवर्नमेंट ने उनको रोक दिया था। Qihoo 360 के बयान को अगर किसी ने सिरियसली लिया, तो वह थी चाइनीज़ गवर्नमेंट। चाइनीज़ गवर्नमेंट ने ऑफिशियली बैन लगा दिया। कि अब साइबर सियोक्योरिटी रिसर्चर्स और हैकर्स ओवरसीज़ कॉम्पटीशन में हिस्सा नहीं ले सकते। ये बैन लगने के तुरंत बाद चाइना के अंदर एक हैकिंग कॉम्पटीशन किया गया। जिसका नाम था, टियनफू कप। ये कॉम्पटीशन इन्टरनेशनल कॉन्टेस्ट का अलटर्नेटिव बन गया और इसमें प्राइज़ मनी 1 मिलियन डॉलर से भी ज्यादा रखी गई। इस कॉम्पटीशन के लॉन्च ने कई देशों के कान खड़े कर दिए। क्योंकि सबको पता चल गया था, कि चाइना ये सब करके अपने आप को साइबर वॉरफेयर के लिए तैयार कर रहा है।
China Cyber War 2 लाख डॉलर का इनाम-
नवंबर 2018 में इस कॉम्पटीशन का पहला इवेंट चाइना के शहर चंडकू में ऑर्गेनाइज़ किया गया। इसमें 2 लाख डॉलर का इनाम जीता Qihoo 360 के ही एक रिसर्चर कीजिन जाऊ ने। उसने एक बहुत ही पावरफुल डेंजरस हैक पकड़ा था, वह भी एप्पल के आईफोन में, उसने सफारी ब्राउजर के थ्रू अटैक स्टार्ट किया। फिर आईफोन के कोर सिस्टम में एक लूप हॉल ढूंढा और फिर इस ब्लॉक के जरिए वह रीमोटली किसी भी आईफोन को सिर्फ एक वेब पेज ओपन करवा कर कंट्रोल करने में कामयाब हो गया। इसका मतलब यह था, कि अगर कोई शख्स अपने आईफोन के जरिए उस खास वेब पेज जाएगा, तो उसका फोन बिना उसके नोटिस हुए हैकर के कंट्रोल में चला जाएगा।
किजन ने इस एक्सप्लइट को क्योस का नाम दिया और ये नाम बिल्कुल पर्फेक्ट भी था। क्योंकि ये हैक अगले कुछ दिनों में दुनिभर के साइबर एक्सपर्ट्स के लिए मुसीबत बनने वाला था। दरअसल चाइना के Tianfu Cup और pw2own में फर्क यह था, कि वह हैक ढूंढ कर डायरेक्टली कंपनी को देते थे। लेकिन Tianfu Cup ने ऐसा किया जरूर पर चीनी गवर्नमेंट के जरिए, चाइनीस गवर्नमेंट ने उनको बाउंड किया, Tianfu Cup में जो भी हैक मिलेगा, वह डायरेक्टली कंपनी को नहीं दिया जाएगा। बल्कि पहले वह चीनी गवर्नमेंट को मिलेगा और गवर्नमेंट फिर उसे खुद कंपनी तक पहुंच जाएगी और इसी के बीच होनी थी, असल तबाही यह एक ऐसा हैक था जो अगर ब्लैक मार्केट में बेचा जाए, तो मिलियंस ऑफ डॉलर्स मिल सकते थे और इसे क्रिमिनल्स या गवर्नमेंट यूज़ करके हजारों लोगों की जासूसी कर सकती थी।
ब्लॉक को खामोशी से फिक्स China Cyber War-
दो महीनों के बाद जनवरी 2019 में ऐप्पल ने एक अपडेट रिलीज किया। जिसमें उस ब्लॉक को खामोशी से फिक्स कर दिया गया, जो किज़न ने ढूंढा था। लेकिन असली सरप्राइज तो अगस्त 2019 में आया यानी 7 महीनों के बाद गूगल ने एक रिसर्च पेपर पब्लिश किया। जिसमें उन्होंने बताया, कि आईफोन से एक मास लेवल हैकिंग कैंपेन चल रही थी और लोगों के फोंस बड़े स्केल पर हैक किए जा रहे थे। गूगल की इस रिसर्च ने पांच अलग-अलग एक्सप्लोइट चेंज को आईडेंटिफाई किया और उन्हीं पांच में से एक था वही क्योज़ नामी एक्सप्लोइट जो किजन ने Tianfu Cup में दिखाया था यानी जिस एक्सप्लोइट ने किजन को इनाम जितवाया, वही एक्सप्लोइट आईफोन की मास सर्विलियंस के लिए इस्तेमाल हो रहा था।
गूगल के रिसचर्स ने अपनी रिपोर्ट में यह बताया, कि जो हैकिंग अटैक्स उन्होंने रियल वर्ल्ड में पकड़े उन में बहुत सी चीज क्योंस एक्सप्लोइट से मिलती-जुलती थी। पर गूगल ने यह नहीं बताया, कि यह अटैक किसने किया था और हैक होने वाले लोग कौन थे। लेकिन बाद में पता चला, कि विक्टम्स विगर के मुसलमान थे और अटैकर कोई और नहीं बल्कि चीन की अपनी ही गवर्नमेंट थी। 2014 से चीन ने विगर मुस्लिम और दूसरी माइनॉरिटी के खिलाफ बहुत ही सीरियस ह्यूमन राइट वायलेशंस किए हैं। यह सब कुछ चीन की नॉर्थ वेस्टर्न प्रोविंस श़ीजांग में हो रहा है। यहां चीन ने बिना किसी जुर्म के लाखों लोगों को कैंप्स में बंद किया हुआ था। वहां की औरतों को स्टेरलाइज किया गया, ताकि उनकी आबादी कम हो।
सेक्सुअल एब्यूज के केसेस भी रिपोर्ट China Cyber War-
कैंप्स के अंदर टॉर्चर और सेक्सुअल एब्यूज के केसेस भी रिपोर्ट हुए। वहां के हर फोन को मॉनिटर किया गया, कि कहीं किसी के पास कोई रिलिजियस कंटेंट तो नहीं है। अगर किसी के पास कुछ निकल आए, तो उसको कड़ी से कड़ी सजा दी जाती थी। चीनी ऑफिशल्स का कहना है, कि यह सब हम एक्सट्रीमिस्म से बचने के लिए कर रहे हैं। लेकिन अमेरिका और कई और देशों ने इसे जेनोसाइड डिक्लेयर किया है। चीन की ये हैकिंग कैंपेन सिर्फ विगर के मुसलमान तक नहीं थी। बल्कि जर्नलिस्ट एक्टिविस्ट और वह लोग जो चीनी गवर्नमेंट की पॉलिसीज पर सवाल उठाते हैं। उन सब को भी टारगेट किया गया।
जब गूगल के रिसचर्स ने आईफोन हैकिंग के बारे में रिपोर्ट पब्लिश की, तो कुछ ही दिनों के बाद मीडिया ने सारे डॉट आपस में कनेक्ट कर दिए। फिर बाद में ऐप्पल ने भी एक पोस्ट में बताया, कि यह हैक वाकई दो महीनों तक चलता रहा और यह वही वक्त था। जब किजन ने Tianfu Cup जीता था। अमेरिकन एक्सपर्ट के सामने अब एक बात क्लियर थी, कि चीन ने qihoo 360 के सीईओ की बताई हुई स्ट्रेटजी को फॉलो किया है। यानी चीनी हैकर्स को बाहर जाने से रोक कर उनकी स्किल्स को चीन में ही यूटिलाइज करो और फिर उस हैक को इस्तेमाल करके लोगों की सर्विलांस करो।
इस बात को प्रूफ करने के लिए सर्विलांस एजेंसीज ने क्योज़ एक्सप्लोइट का फुल टेक्निकल ब्रेकडाउन किया और वह एक्जेक्टली Tianfu Cup वाले हैक से मैच कर गया। बाद में गूगल की डीप इन्वेस्टिगेशन ने भी यह कंफर्म किया, कि कियोज़ और रियल वर्ल्ड अटैक दोनों स्ट्रक्चर में एक जैसे ही थे। पर मामला सिर्फ यही नहीं रुका।
आईसोन नामी कंपनी का डाटा-
फरवरी 2024 में कोड शेयरिंग वेबसाइट गिटहब पर कुछ डाटा लीक हुआ। यह चीन की आईसोन नामी कंपनी का डाटा था, जो एक आईटी सिक्योरिटी फर्म है। इस डाटा में कंपनी की ईमेल्स, चैट और एक्सपायवेयर की डेवलपमेंट डिटेल्स थी। लीक हुए डाटा से पता चला, कि यह कंपनी साइबर स्पाइन टूल्स बनाती है और बाद में यह टूल्स चाइनीस गवर्नमेंट और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को दिए जाते हैं, जो चैट्स लीक हुई उनमें चाइनीस मिनिस्ट्री आफ पब्लिक सिक्योरिटी और आईसोन के बीच कॉन्ट्रैक्ट का जिक्र हुआ है। यह बात सामने आई, कि आईज़ोन हर हैक्ड ईमेल इनबॉक्स के लिए गवर्नमेंट से $10000 से 75000 चार्ज करती है। आज Tianfu Cup अपने आठवें साल में आ चुका है और इसे स्पॉन्सर कर रहे हैं, चीन के सबसे बड़े टेक जॉइंट्स जैसे टॉप सेक अलीबाबा और qihoo 360, लेकिन अब अमेरिकन ऑफिशल्स बहुत ज्यादा कंसर्न है।
क्योंकि इस कंपटीशन में शामिल लोगों और कंपनी के चाइनीस मिलट्री के साथ लिंक नजर आ रहे हैं। टॉप सेक एक बीजिंग बेस्ड कंपनी है, जो Tianfu Cup को ऑर्गेनाइजर करती है। यूएस ऑफिशियल्स के मुताबिक, ये कंपनी असल में Tianfu Cup की आड़ में चीन के नेशन्लिस्ट हैकर्स को रिक्रूट कर रही है। ये सारी चीज़ें हमें इशारा देती हैं, कि Tianfu Cup की आड़ में चीन अपने साइबर वेपंस तैयार कर रहा है और जब नेशनल पावर हैकर्स को सपोर्ट करती है, तो वह अवॉर्ड जीतने के लिए नहीं बल्कि उनका मकसद कुछ और ही होता है।
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ट्रेजरी डिपार्मेंट का डाटा हैक-
2024 में यूएस ट्रेजरी डिपार्मेंट का डाटा हैक हुआ था। अमेरिका के मुताबिक, चीनी स्टेट स्पॉन्सर्ड हैकर्स ने यूएस ट्रेजरी डिपार्मेंट के कंप्यूटर्स को हैक किया और सेंसिटिव डॉक्यूमेंट चुरा लिए। 2024 में ही चीनी हैकर्स ने कम से कम नो यूएस टेलीकॉम कंपनी के नेटवर्क को हैक किया। जिसमें एटीएडी, वोराइज़न और टीम मोबाइल भी शामिल है। 2021 में वोल्ड टाइफून, जो कि एक चीनी हैकिंग ग्रुप है। उसने यूएस के एनर्जी और वॉटर फिल्ट्रेशन सिस्टम को टारगेट किया था। 2023 में भी एक मालवेयर अटैक सामने आया, जो गोवा में यूएस मिलट्री बेस पर किया गया।
एक्सपर्ट का कहना है, कि चीनी हैकिंग ग्रुप जब भी किसी इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट करते हैं, तो वह कई सालों तक खामोशी से सिस्टम के अंदर ही अपना एक्सेस बनाए रखते हैं और सिर्फ वक्त आने पर नुकसान पहुंचाते हैं। यह सब बातें जाहिर करती हैं, कि चीन अपने अंदर ही साइबर वॉर की तैयारी के लिए हैकर्स की एक आर्मी तैयार कर रहा है। एक ऐसी जंग जिसमें मिसाइल नहीं सिर्फ कोड ही पूरा देश घुटनों पर ला सकता है। जहां एयर स्ट्राइक से ज्यादा नेटवर्क जेम्स नुकसान पहुंचाएंगे, रियल लाइफ एजेंट से ज्यादा खतरनाक फोन में मौजूद स्पाइन टूल काम करता है और जिसमें सिर्फ एक क्लिक पर स्टॉक मार्केट क्रैश लोगों में खौफ की लहर दौड़ा सकता है।
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