Noida Workers Protest: नोएडा में एक बार फिर इंडस्ट्रीयल इलाके में हालात बिगड़ गए। जिस दिन हिंसा भड़की, उससे ठीक एक दिन पहले प्रशासन ने मज़दूरों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ एक हाई-लेवल बैठक की थी। सेक्टर 6 स्थित नोएडा अथॉरिटी के दफ्तर में हुई इस मिटिंग में CEO लोकेश एम, पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह और ज़िला अधिकारी मेधा रूपम जैसे बड़े अफसर शामिल हुए। श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल तरीके से जुड़े। सबने मिलकर भरोसा दिलाया, कि मज़दूरों की बात सुनी जाएगी और उनकी समस्याएं सुलझाई जाएंगी। लेकिन अगले ही दिन सोमवार को हालात इस कदर बिगड़ गए, कि पूरा इलाका सुलग उठा।
क्या हैं मज़दूरों की मांगें?
पिछले तीन दिनों से वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर धरना दे रहे, मज़दूरों का गुस्सा सोमवार को सड़कों पर फूट पड़ा। प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहा, पथराव हुआ, कई सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया, इमारतें तोड़ी गईं और कुछ जगहों पर आगज़नी की भी खबरें आईं। पुलिस को भीड़ को काबू में करने के लिए टीयर गैंस का इस्तेमाल करना पड़ा। मज़दूरों की मुख्य मांगें मिनिमम वेज की गैरेंटी, समय पर सैलरी का भुगतान, बराबर काम के लिए बराबर वेतन, ओवरटाइम का मुआवज़ा और EPF, ESI तथा ग्रेजुटी जैसे सोशल सिक्योरिटी फायदों से जुड़ी थीं, जो बैठक में भी प्रमुखता से उठाई गई थीं।
#WATCH | Uttar Pradesh: Vehicles and properties vandalised and stones pelted in Phase 2 of Noida where a large number of employees of a company gathered in protest over their demands for a salary increment. Heavy Police deployment made here to bring the situation under control.… pic.twitter.com/1B0axJZSBN
— ANI (@ANI) April 13, 2026
प्रशासन ने क्या किया था?
बैठक में अधिकारियों ने ये साफ कर दिया था, कि सरकार मज़दूरों और नियोक्ताओं, दोनों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इंडस्ट्रियल यूनिट को निर्देश दिए गए थे, कि वे सरकारी गाइडलाइन्स का पालन करें, मज़दूरों से सीधा संवाद बनाए रखें और काम-काज में पारदर्शिता लाएं। अफवाहों पर रोक लगाने के लिए सभी स्टेकहोल्डर्स से अपील की गई थी, कि वह सिर्फ ऑफिशियल जानकारी पर भरोसा रखें और गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। जिला प्रशासन ने कंट्रोल रुम भी स्थापित किया था और हेल्पलाइन नंबर्स भी जारी किए थे।
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तो फिर हिंसा क्यों भड़की?
यही सवाल अब सबसे बड़ा है। जब बातचीत हो चुकी थी, आश्वासन दिए जा चुके थे और हेल्पलाइन तक चालू थी, तो अगले ही दिन ऐसा क्या हुआ, जिसने मज़दूरों को इतना आक्रामक बना दिया? प्रशासन अभी तक इसका जवाब ढूंढ रहा है। अधिकारी स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं और सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिशें जारी हैं। यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ जाती है, क्या सिर्फ बैठकें और आश्वासन काफी हैं, या ज़मीन पर कुछ और ठोस करने की ज़रूरत है?
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