LPG Gas Cylinder: पश्चिम एशिया में जंग के बादल गहराते जा रहे हैं और इसकी आंच सीधे भारतीय रसोई तक पहुंच रही है। दरअसल, भारत अपनी जरूरत का 85 से 90 फीसदी LPG यानी रसोई गैस इसी युद्धग्रस्त इलाके से मंगाता है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी था, कि अगर सप्लाई रुकी, तो करोड़ों घरों के चूल्हे कैसे जलेंगे? लेकिन सरकार ने वक्त रहते दो बड़े मोर्चे खोले हैं और इन फैसलों से आम आदमी को सीधी राहत मिलने की उम्मीद है।
छोटे सिलेंडर, बड़ी राहत-
पहला बड़ा कदम उठाया गया है, 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG सिलेंडरों की सप्लाई में जबरदस्त बढ़ोतरी करके। इन सिलेंडरों की डेली सेल अब 1 लाख यूनिट के पार पहुंच चुकी है। ये छोटे सिलेंडर उन प्रवासी मजदूरों और कम आय वाले परिवारों के लिए लाइफलाइन हैं, जो बड़े सिलेंडर का खर्च नहीं उठा सकते। किराए के कमरों में रहने वाले वर्कर्स से लेकर छोटी दुकान चलाने वालों तक, इस फैसले से लाखों लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा।
PNG की क्रांति-
दूसरा बड़ा और दूरदर्शी फैसला है, पाइप वाले नेचुरल गैस यानी PNG के नेटवर्क को तेज़ी से फैलाना। मार्च से अब तक रिकॉर्ड 4.24 लाख नए PNG कनेक्शन चालू किए जा चुके हैं। इसके साथ ही IGL और GAIL जैसी कंपनियों को सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं, कि होटल, मॉल और रेस्टोरेंट जैसे कमर्सियल यूज़ को जल्द से जल्द PNG से जोड़ा जाए। इससे जो LPG बचेगी, वो सीधे घरेलू रसोई के काम आएगी। फिलहाल कमर्शियल LPG की उपलब्धता संकट से पहले के मुकाबले सिर्फ 70 फीसदी तक ही बहाल हो पाई है, इसलिए यह शिफ्ट काफी जरूरी है।
कालाबाजारी पर डिजिटल लगाम-
संकट के वक्त गैस की कालाबाजारी एक बड़ा डर था। इससे निपटने के लिए सरकार ने 98 फीसदी बुकिंग ऑनलाइन कर दी है और 93 फीसदी डिलीवरी OTP-बेस्ड ऑथेंटिकेशन सिस्टम से जोड़ी गई है। इसका मतलब साफ है, अब गैस वहीं जाएगी जहां उसकी असली जरूरत है, बिचौलियों और जमाखोरों का खेल बंद होगा।
ये भी पढ़ें- भारत पर पड़ने वाला भयानक असर, ईरान-अमेरिका की शांति वार्ता विफल, डाटा से समझिए
रसोई के साथ खेत भी सुरक्षित-
सरकार की नज़र सिर्फ रसोई पर नहीं, बल्कि खेत पर भी है। Natural Gas का आवंटन फर्टिलाइज़र प्लांट्स के लिए 95 फीसदी तक बढ़ा दिया गया है, जिससे खाद की कमी न पड़े और किसान की फसल प्रभावित न हो। यानी एक तरफ आम आदमी का चूल्हा जलता रहे और दूसरी तरफ अन्नदाता का खेत लहलहाता रहे। यही है भारत का दोहरा दांव, जो वैश्विक उथल-पुथल के बीच देश को स्थिर रखने की कोशिश है।
ये भी पढ़ें- नोएडा में मज़दूरों का आंदोलन हुआ हिंसक, जानिए क्यों बैठक के बाद भी नहीं थमी हिंसा?



