Assam Bihu Gift Scheme: असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शर्मा ने फरवरी महीने में राज्य की महिलाओं के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। प्रदेश की 37 लाख महिलाओं को बिहू के स्पेशल गिफ्ट के रूप में ₹8000 की राशि सीधे उनके खाते में ट्रांसफर की जाएगी। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब अप्रैल में असम विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
₹2960 करोड़ की योजना पर सवाल-
जब हम इस योजना का गणित समझते हैं, तो तस्वीर साफ होती है। 37 लाख महिलाओं को ₹8000 देने का मतलब है कुल ₹2960 करोड़ का खर्च। यह वह राशि है, जिससे राज्य में 70 से 80 नए स्कूल खोले जा सकते हैं, जहां लाखों बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन मिल सकती है। हर स्कूल में करीब 7000 बच्चों की क्षमता के हिसाब से यह देश के एजुकेशन सेक्टर में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता था।
चुनावी पैटर्न-
दिलचस्प बात यह है, कि यह फॉर्मूला पहली बार नहीं अपनाया जा रहा है। बिहार में भी महिलाओं को ₹1000 प्रति महीना देने की घोषणा की गई थी, जिसमें कुल ₹7000 करोड़ का बजट था। अब असम में भी इसी तरह की स्कीम चुनाव से ठीक दो महीने पहले लॉन्च हो रही है। यह टाइमिंग कई सवाल खड़े करती है, कि क्या यह जनकल्याण है या वोट बैंक की राजनीति।
टैक्सपेयर्स के पैसे का इस्तेमाल-
यह पूरी राशि आम टैक्सपेयर्स के पैसे से ही आएगी। सवाल उठता है, कि क्या यह सही दिशा में निवेश है? एक तरफ देश में एजुकेशन, हेल्थकेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है, वहीं दूसरी तरफ चुनाव के समय फ्री गिफ्ट्स बांटने का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है। यह रणनीति शॉर्ट टर्म में तो फायदेमंद लग सकती है, लेकिन लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट के लिए क्या यह सही रास्ता है?
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विकास बनाम लोकलुभावन योजनाएं-
असम जैसे राज्य में जहां बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है, वहां ₹2960 करोड़ से कितना कुछ किया जा सकता था। स्कूल, अस्पताल, रोड, रोजगार के अवसर, ये सब चीजें महिलाओं को लंबे समय तक आत्मनिर्भर बना सकती थीं। लेकिन वन टाइम कैश ट्रांसफर से क्या वाकई में किसी की जिंदगी बदल जाएगी?
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यह सवाल सिर्फ असम तक सीमित नहीं है। पूरे देश में फ्रीबीज कल्चर तेजी से बढ़ रहा है। क्या हम चाहते हैं, कि हमारा देश हैंडआउट्स पर निर्भर रहे या फिर एजुकेशन और स्किल डेवलपमेंट से आगे बढ़े?



