Crude Oil Price Fall
    Photo Source - Google

    Crude Oil Price Fall: अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों का सीज़फायर घोषित हो चुका है, जिसके बाद से ऊर्जा बाजारों में राहत देखने को मिल रही है। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। भारत जैसे देश के लिए खबर और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पश्चिमी एशिया देशों से खरीदता है। ऐसे में क्षेत्र में तनाव कम होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और इंपोर्ट बिल पर सीधा असर पड़ेगा।

    कीमतों में कब होगा बदलाव-

    ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की गिरावट होने से ब्रेंट क्रूड करीब 16% तक गिरकर 93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है। इसके बावजूद भारत में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में भी तुरंत बदलाव आने की उम्मीद नहीं है। दरअसल बात यह है, कि भारत में फ्यूल प्राइस 15 दिन की रोलिंग एवरेज के आधार पर ही तय किया जाता है। फिलहाल दिल्ली में पैट्रोल 94.77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपए प्रति लीटर पर बना हुआ है।

    महंगाई पर कंट्रोल-

    एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अगर यह सीज़फायर जारी रहता है और सप्लाई रूट नॉर्मल रहते हैं, तो अगले 7 से 10 दिनों के अंदर 3 से ₹5 प्रति लीटर तक की राहत मिल सकती है। हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपए कमजोर हो चुका है, जो कि अब 94.70 पर जा चुका है। इसलिए यह राहत को थोड़ा कम कर सकता है। सरकार भी चुनाव से पहले महंगाई को कंट्रोल में रखना चाहती है। इसलिए कीमतों में बदलाव सोच समझ कर ही किया जाएगा।

    क्या LPG पर मिलेगी राहत?

    हाल ही के दिनों में LPG सेक्टर पर भी काफी दबाव था। 1 अप्रैल को कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 195 की बढ़ोतरी हुई थी। जिससे दिल्ली में 19 किलो का सिलेंडर ₹2000 के पास पहुंच चुका था। घरेलू सिलेंडरों की कीमत अभी तो स्थिर है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी कीमतों का असर उन पर भी देखने को मिल रहा था। अब सीज़फायर के बाद सप्लाई चेन में सुधार की उम्मीद है। तनाव के दौरान भारत में घरेलू जरूरत को प्राथमिकता दी गई थी, जिससे कमर्शियल सेक्टर प्रभावित हुआ था।

    एक्स्ट्रा खर्च तुरंत खत्म नहीं-

    अब जो शिपमेंट लेट हो रही थी, वह धीरे-धीरे सामान्य हो सकती हैं। सीज़फायर के बावजूद एक बड़ी चिंता बनी हुई है और वह है, होर्मोज़ से गुजरने पर लगने वाला टोल संघर्ष के दौरान तेल टैंकरों पर ज्यादा सुरक्षा शुल्क लगाए जा रहे थे। हालांकि अब स्थिति सामान्य होने की कोशिश है।

    लेकिन यह एक्स्ट्रा खर्च तुरंत खत्म नहीं होगा, इसका मतलब यह है, कि भले ही कच्चे तेल की कीमत गिरी हो, लेकिन भारत के लिए इंपोर्ट कास्ट कुछ समय तक ऊंची ही रह सकती है। इस सब के बीच भारत अपनी उर्जा रणनीति को मजबूत करने में लगा हुआ है। देश घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने सप्लाई चेन को बेहतर बनाने और अमेरिका और नॉर्वे जैसे नए स्रोतों से आयात बढ़ने पर फोकस कर रहा है।

    ये भी पढ़ें- FASTag नहीं तो ज़्यादा देना होगा टैक्स, 10 अप्रैल से Toll पर नहीं चलेगा नकद

    आम लोगों तक फायदा जाने में लगेगा समय-

    इसके अलावा सरकार इस मौके का फायदा उठाकर अपने रणनीतिक भंडार को भी मजबूत करने की तैयारी में है। जिससे भविष्य में ऐसे संकटों का सामना बेहतर तरीके से किया जा सके। कुल मिलाकर अमेरिका ईरान सीज़फायर से हालत स्थिर जरूर हुए हैं। लेकिन आम लोगों तक इसका फायदा पहुंचने में थोड़ा समय लग सकता है। अभी के लिए बाजार में शांति का माहौल है, लेकिन पेट्रोल पंप और रसोई गैस पर असली राहत तभी मिलेगी, जब यह स्थिरता लंबे समय तक बनी रहेगी।

    ये भी पढ़ें- क्या है Chitta? जिसके चलते पंजाब की मां खो दिए अपने पांच बेटे

    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।