Women MPs Assaulted: आज संसद भवन में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने पूरे देश की राजनीति को हिला दिया है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने एक गंभीर आरोप लगाया है, कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और रवनीत सिंह बिट्टू ने संसद में प्रदर्शन के दौरान पार्टी की दो महिला सांसदों शताब्दी रॉय और मिताली के साथ मारपीट की है।
यह घटना तब हुई जब संसद में तीन विवादास्पद बिलों को लेकर तीव्र विरोध प्रदर्शन चल रहा था। ये बिल प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को गंभीर आरोपों में गिरफ्तार होने पर 30 दिन तक हिरासत में रखे जाने की स्थिति में पद से हटाने की व्यवस्था करते हैं।
TMC का आक्रोश और इस्तीफे की मांग-
कल्याण बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, “जब हम नारेबाजी कर रहे थे, तो बिट्टू और किरेन रिजिजू हमारी दो महिला सांसदों शताब्दी रॉय और मिताली पर हमला करने आए। उन्होंने धक्का दिया महिला सांसदों को।” उन्होंने आगे कहा, कि उन्हें इस्तीफा देना चाहिए वह एक मंत्री है, क्योंकि महिलाओं पर वह हमला कर रहे हैं। दोनों मंत्रियों के तुरंत इस्तीफे की तृणमूल कांग्रेस ने मांग की है। पार्टी का कहना है, कि यह व्यवहार बिल्कुल अस्वीकार्य है और लोकतंत्र की गरिमा के विपरीत है।
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— Surbhi (@SurrbhiM) August 20, 2025
TMC MP Mitali Bag has alleged that while the opposition was protesting the 130th Constitutional Amendment in the Lok Sabha, Union Ministers Ravneet Bittu and Kiren Rijiju attacked her and pushed her…pic.twitter.com/VlRqrlxgHO
BJP का खंडन और सबूतों का अभाव-
हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पार्टी के सांसद संजय जायसवाल ने कहा, “TMC का यह दावा कि कुछ सदन के सदस्यों ने महिला सांसदों के साथ मारपीट की है, बिल्कुल निराधार है।”
लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, घटना की फुटेज की जांच की गई है, लेकिन ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है। एक सूत्र ने बताया, “अधिकारियों द्वारा फुटेज को देखा गया और बारीकी से समीक्षा की गई। उन्होंने कहा, कि कुछ विपक्षी सांसद सदन के बीच में गए और सत्तापक्ष की तरफ दौड़े, लेकिन धक्का-मुक्की का कोई सबूत नहीं है।”
विवादास्पद बिलों पर भारी विरोध-
यह पूरा विवाद तीन बिलों को लेकर शुरू हुआ था जिन्हें विपक्ष असंवैधानिक बता रहा है। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने बिल की प्रतियों को फाड़ दिया और कागज के गोले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तरफ फेंके।
जब कल्याण बनर्जी से बिल फाड़ने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “तो क्या हुआ अगर हमारे किसी व्यक्ति ने बिल फाड़ा है? यह बिल असंवैधानिक है। क्या यह संभव है, कि वे मुख्यमंत्री को हटा देंगे? क्या यह कहीं होता है? मान लीजिए ED केस करती है, CBI केस करती है, सभी जानते हैं, कि वे फर्जी केस करते हैं।”
संविधान में संशोधन का प्रस्ताव-
इन तीन बिलों – Government of Union Territories (Amendment) Bill 2025, Constitution (One Hundred And Thirtieth Amendment) Bill 2025, और Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Bill 2025 को अब 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा जाएगा।
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प्रस्तावित कानून के तहत, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री, जो गिरफ्तार होकर लगातार 30 दिन हिरासत में रहें, को 31वें दिन तक इस्तीफा देना होगा या वे अपने आप हटा दिए जाएंगे। इस कानून के लिए संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन की आवश्यकता होगी। तृणमूल के अभिषेक बनर्जी ने कहा, “BJP सरकार बिना किसी जवाबदेही के सत्ता का आनंद लेना और नियंत्रण करना चाहती है। यह बिल विपक्षी पार्टियों का मुंह बंद करने के लिए लाया गया है, जो लोगों की तरफ से सवाल उठा रही हैं।”
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