Budget 2026 Rahul Gandhi: यूनियन बजट 2026-27 पेश होने के कुछ ही घंटों बाद लोक सभा में विरोधी दल के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट किया, जो पूरे चर्चा में बना हुआ है। उन्होंने लिखा, कि यह बजट “भारत की असली संकटों से बिल्कुल बेखबर है।” लेकिन आखिर वो इतना बड़ा दावा क्यों कर रहे हैं? चलिए समझते हैं, कि पिछले कुछ महीनों में क्या हो रहा है और उसके बदले में बजेट में क्या मिला और क्या नहीं मिला।
राहुल गांधी ने बजेट में क्या देखा और क्या नहीं दिखा?
राहुल गांधी ने अपने X पोस्ट में इन सब मुद्दों को बहुत साफ़ से लिखा। उन्होंने कहा, कि नौजवान बिना नौकरी के बैठे हैं, मैनुफैक्चरिंग गिर रहा है, निवेशक पूंजी निकाल रहे हैं, घरों की बचत कम हो रही है और किसान बहुत दिक्कतों में हैं। इसके बावजूद बजट में इनमें से किसी एक समस्या का भी सीधा हल नहीं दिखा। यही वजह है, कि उन्होंने कहा, कि यह बजट “कोई course correction करने को तैयार नहीं।” सीधे शब्दों में कहें, तो उनका कहना है, कि जब देश इतनी बड़ी बड़ी दिक्कतों में हो तब बजट को इन्हें पहले एड्रेस करना चाहिए था।
लेकिन सरकार ने क्या कहा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण ने बजट में कुछ बड़े फैसले ज़रूर सुनाए। सरकार ने इस साल कैपेक्स यानी पूंजीगत व्यय को 11.2 लाख करोड़ से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ कर दिया है। इसका मतलब है, कि सरकार रोड़ों, पुलों और इंफ़्रास्ट्रक्चर पर पहले से ज़्यादा पैसा खर्च करेगी। छोटे शहरों जैसे tier-2 और tier-3 के लिए भी कई योजनाएं शामिल किए गए हैं। NDA सरकार के तीसरे कार्यकाल का यह तीसरा बजट है और सरकार की दलील है, कि इंफ़्रास्ट्रक्चर मज़बूत करने से आगे चलकर रोज़गार भी बढ़ेंगे।
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तो आखिर सच क्या है?
दोनों पक्ष अपनी अपनी बात कह रहे हैं। सरकार कह रही है, कि बड़े इंवेस्टमेंट से आगे बेहतरी आएगी, जबकि राहुल गांधी कह रहे हैं, कि आज जो लोग मुश्किलों में हैं, चाहे वो नौकरी ढूंढ रहे नौजवान हों या खेत में काम करने वाले किसान उनके लिए इस बजट में कोई सीधा जवाब नहीं है। यह बहस अब पूरे देश में शुरू हो चुकी है और आने वाले दिनों में इसका असली प्रभाव कैसा होगा, यह करीब से देखने वाली बात होगी।
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