Samrat Choudhary: बिहार की राजनीति में साल 2022 का एक दृश्य आज भी लोगों के ज़हन में ताज़ा है, जब सम्राट चौधरी ने केसरिया पगड़ी बांधकर एक बड़ा ऐलान किया था। यह सिर्फ एक पहनावा नहीं था, बल्कि एक राजनीतिक व्रत था। उन्होंने साफ कहा था, कि जब तक नीतीश कुमार सत्ता से बाहर नहीं होंगे, तब तक वह अपनी पगड़ी नहीं उतारेंगे। उस समय बिहार में महागठबंधन की सरकार थी और बीजेपी विपक्ष में बैठकर लगातार हमलावर थी।
विधानसभा में हुआ था सीधा टकराव-
यह संकल्प उस वक्त और चर्चा में आया जब विधानसभा में बहस के दौरान नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी से उनके मुरेठा (पगड़ी) को लेकर सवाल किया। जवाब में चौधरी ने तीखे अंदाज़ में कहा, कि यह उनकी प्रतिज्ञा है, जब तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से हटेंगे नहीं, तब तक यह पगड़ी उनके सिर पर रहेगी। यह बयान उस समय बिहार की राजनीति में बड़ा संदेश बन गया और पगड़ी एक तरह से विरोध का प्रतीक बन गई।
महागठबंधन से NDA तक-
बिहार की राजनीति अपने अचानक बदलावों के लिए जानी जाती है और जनवरी 2024 में वही हुआ। नीतीश कुमार ने महागठबंधन छोड़कर एक बार फिर NDA का दामन थाम लिया। इस फैसले ने सियासी समीकरण पूरी तरह बदल दिए। कागज़ों पर देखा जाए, तो सम्राट चौधरी का संकल्प यहीं पूरा हो गया, क्योंकि जिस गठबंधन के खिलाफ उन्होंने यह व्रत लिया था, वह सत्ता से बाहर हो गया।
अयोध्या में खत्म हुआ संकल्प का अध्याय-
कुछ महीनों बाद, जुलाई 2024 में सम्राट चौधरी अयोध्या पहुंचे। वहां उन्होंने सरयू नदी में स्नान किया, मुंडन करवाया और राम जन्मभूमि में रामलला के चरणों में अपनी पगड़ी अर्पित कर दी। उन्होंने इसे अपने संकल्प का प्रतीकात्मक समर्पण बताया। यह पल उनके राजनीतिक सफर का एक भावनात्मक मोड़ भी था, जहां एक नेता ने अपने वादे को धार्मिक आस्था के साथ जोड़कर पूरा किया।
22 महीने तक पगड़ी बनी रही पहचान-
करीब 22 महीनों तक सम्राट चौधरी की यह पगड़ी उनकी पहचान बन गई थी। हर मंच, हर रैली और हर बयान में यह साफ दिखता था, कि यह सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि एक कमिटमेंट है। हालांकि उन्होंने पगड़ी उस वक्त उतारी जब परिस्थितियां पूरी तरह साफ नहीं थीं, लेकिन उनका संकल्प राजनीतिक तौर पर पूरा माना गया।
अब कुर्सी की बारी-
अब कहानी ने एक और बड़ा मोड़ ले लिया है। खबर है, कि नीतीश कुमार राज्यसभा की ओर बढ़ रहे हैं और ऐसे में सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री बनने की तैयारी में हैं। यानी जिस नेता ने कभी नीतीश को हटाने का संकल्प लिया था, वही अब उनकी जगह लेने जा रहा है।
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पगड़ी गई, लेकिन ‘ताज’ आ गया-
राजनीति में प्रतीक और संदेश बहुत मायने रखते हैं। सम्राट चौधरी की पगड़ी एक समय विरोध का प्रतीक थी, लेकिन आज वही सफर उन्हें सत्ता के शिखर तक ले आया है। यह कहानी बताती है कि राजनीति में समय और रणनीति कैसे सब कुछ बदल देती है।
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