Cloudburst Jammu Kashmir
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    Cloudburst Jammu Kashmir: प्रकृति की मार ने एक बार फिर से हिमालयी राज्यों को हिलाकर रख दिया है। जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के राजगढ़ गांव में शनिवार तड़के अचानक बादल फटने से तबाही मच गई। इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम तीन लोगों की जान चली गई है, जबकि चार अन्य लोग अभी भी लापता हैं। यह घटना रात के 12.30 बजे के आसपास हुई, जब पूरा गांव गहरी नींद में सोया हुआ था।

    अचानक आई तबाही ने सब कुछ बहा दिया-

    अधिकारियों के मुताबिक, अचानक आए पानी के तेज़ बहाव ने गांव के दो पूरे घरों को जड़ से उखाड़कर बहा दिया। इसके साथ ही एक स्कूल की बिल्डिंग भी इस प्राकृतिक कहर की चपेट में आ गई। यह बादल फटना इतना तेज़ और अचानक था, कि लोगों को भागने का मौका ही नहीं मिला।

    गांव के बुजुर्गों का कहना है, कि उन्होंने इतनी तेज़ी से पानी को बहते हुए पहले कभी नहीं देखा था। “पहले तो केवल बारिश की आवाज़ आ रही थी, लेकिन फिर अचानक पानी का एक पूरा पहाड़ ही टूट पड़ा,” एक स्थानीय निवासी ने बताया। गांव वाले अभी भी इस हादसे के सदमे में हैं।

    बचाव दलों की तत्काल तैनाती-

    घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। बचाव दलों को तत्काल घटनास्थल पर भेजा गया है और लापता लोगों की तलाश का अभियान पूरी तेज़ी से चल रहा है। राज्य आपदा मोचन बल के साथ-साथ स्थानीय पुलिस भी बचाव कार्य में लगी हुई है।

    जिला कलेक्टर ने बताया, कि हर संभव कोशिश की जा रही है, लापता व्यक्तियों को ढूंढने के लिए। “हमारी प्राथमिकता अभी लापता लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकालना है। चिकित्सा टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति को संभाला जा सके। हेलीकॉप्टर से भी एरियल सर्वे किया जा रहा है।

    उत्तराखंड में भी ऐसी ही घटना-

    यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब पहाड़ी राज्य लगातार प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे हैं। कल ही उत्तराखंड में आए बादल फटने की घटना में पांच लोगों की मौत हो गई थी और 11 लोग अभी भी लापता हैं। मनाली में भी नदी के किनारे वाले हिस्से पूरी तरह से बह गए हैं।

    मौसम विज्ञानियों का कहना है, कि जलवायु परिवर्तन की वजह से ऐसी अत्यधिक मौसमी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है। मानसून का पैटर्न भी बदल रहा है, जिससे अचानक से भारी बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है। पहाड़ी इलाकों में मिट्टी की कटाव भी इस समस्या को और गंभीर बना रहा है।

    यातायात और संपर्क की समस्या-

    इन सब के बीच जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग लगातार पांचवें दिन भी बंद है। यह मुख्य मार्ग कश्मीर घाटी को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। राजमार्ग के बंद होने से न केवल पर्यटकों को परेशानी हो रही है, बल्कि ज़रूरी सामान की आपूर्ति भी बाधित हो रही है। मौसम की स्थिति में सुधार का इंतज़ार किया जा रहा है। सुरक्षा पहली प्राथमिकता है, इसलिए जब तक स्थिति अनुकूल नहीं होगी, राजमार्ग को फिर से नहीं खुलेंगे। ट्रकों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।

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    चुनौतियां और तैयारियां-

    यह घटना एक बार फिर से इस बात को उजागर करती है, कि हमारे पहाड़ी क्षेत्र कितने संवेदनशील हैं। सरकार को इन इलाकों के लिए बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करनी होगी। स्थानीय लोगों को भी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित करना होगा।

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