Haryana Electricity Strike: हरियाणा में करीब 40,000 बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की तीन दिन की हड़ताल का असर अब सीधे आम लोगों की ज़िंदगी पर दिख रहा है। गुरुग्राम, फ़रीदाबाद और नूंह सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। बुधवार, 21 अक्टूबर की रात 10 बजे से घरों, दफ़्तरों, दुकानों और फ़ैक्ट्रियों में बिजली गुल होने की शिकायतें आ रही हैं। इनवर्टर की बैटरी जवाब दे चुकी है, नलों में पानी नहीं है और वाई-फ़ाई भी बंद है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है।
हड़ताल क्यों हो रही है?
हड़ताल की जड़ हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) का 19 अक्टूबर का आदेश है। इसमें आयोग ने निजी कंपनी Eleven Power Private Limited को गुरुग्राम और नूंह के लिए 25 साल का पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस दिया है। हरियाणा में अब तक बिजली बाँटने का काम दो सरकारी कंपनियाँ, UHBVN और DHBVN, करती आई हैं। लाइसेंस लागू होने पर Eleven Power राज्य की पहली निजी बिजली वितरण कंपनी होगी।
24 घंटे से हरियाणा में बिजली गुल है ।
क्योंकि बिजली कर्मचारी हड़ताल पर है ; बिजली मंत्री और मुख्यमंत्री बोल रहे हैं कि हम केस लड़ेंगे ।
जब डंबल इंजन की सरकार है ; फिर प्राइवेट बिजली किसने किया है ?
नेहरू ने किया या फिर हुड्डा कर गया ?
गुरुग्राम की जनता सड़क पर है👇 https://t.co/8cVGhOBSHq— ashokdanoda (@ashokdanoda) October 22, 2026
“पैरेलल” का मतलब है, कि एक ही इलाके में दूसरी कंपनी भी बिजली बांट सकेगी। इससे गुरुग्राम और नूंह के 8.3 लाख से ज़्यादा उपभोक्ताओं (घर, खेत, दुकानें और उद्योग) को दो कंपनियों में से एक चुनने का मौका मिल सकता है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है, कि ज़्यादा कमाई वाले इलाकों में निजी कंपनी को लाने से DHBVN कमज़ोर होगा, नौकरियां खतरे में पड़ेंगी और ये बिजली क्षेत्र के निजीकरण की तरफ़ पिछले दरवाज़े से कदम है। “हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा” की माँग है कि लाइसेंस रद्द हो और पैरेलल लाइसेंसिंग के खिलाफ़ साफ़ नीति बने। संगठनों का ये भी कहना है कि मामला सिर्फ़ नौकरी का नहीं, बल्कि सरकारी बिजली व्यवस्था के भविष्य और किसानों व उपभोक्ताओं के हित का है।
VIDEO | Haryana: Residents blocked the Daulatabad flyover in Gurugram on Thursday evening alleging power outages in several parts of the city.
This comes amid strikes by the All India Power Corporation and various employee unions over demands for the restoration of power supply.
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/bIyFWTfmBd)
— Press Trust of India (@PTI_News) October 22, 2026
गुरुग्राम में क्या हाल है?
PTI के हवाले से एक अधिकारी ने बताया, कि गुरुग्राम में पहले 12 घंटों में ही 3,000 से ज़्यादा बिजली शिकायतें आईं। इनवर्टर और बैकअप खत्म होने से कई इलाकों में बिजली के साथ पानी और इंटरनेट भी चला गया।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, निवासियों का कहना है, कि बुधवार रात करीब 10 बजे बिजली गई। गुरुवार सुबह तक इनवर्टर खाली हो गया, पानी बंद हो गया और वाई-फ़ाई भी नहीं चला। वो घर से काम नहीं कर पाए और इंजीनियरिंग व सरकारी भर्ती की तैयारी कर रहे उनके बच्चे पढ़ नहीं सके। उन्होंने ये भी बताया, कि हेल्पलाइन 1912 पर शिकायत दर्ज नहीं हो सकी और अधिकारियों के फ़ोन नहीं लगे।
सेक्टर 5 में बिजली से चलने वाला पानी का सिस्टम बंद होने से घरों में पानी नहीं पहुंचा। वहां की रेज़िडेंट्स वेलफ़ेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष टी.आर. अडालखा के मुताबिक, कुछ लोग दफ़्तर नहीं जा सके और कुछ घर से काम नहीं कर सके। बिजली कटौती सेक्टर 5, 7, 10A और 52, पालम विहार और दौलताबाद में रही। DLF फ़ेज़ 2 में गुरुवार दोपहर तक बिजली लौट आई। सेक्टर 7 में शाम करीब 4 बजे बिजली आई, जबकि सेक्टर 5 में रिपोर्ट लिखे जाने तक कटौती जारी थी। द्वारका एक्सप्रेसवे की सोसाइटियों ने लंबी कटौती की आशंका में जनरेटर के लिए डीज़ल जमा कर लिया।
फ़रीदाबाद में सड़कों पर उतरे लोग-
फ़रीदाबाद के सेक्टर 16 और 31 में भी कई लोगों ने कहा, कि आधी रात से बिजली नहीं है। न्यू इंडस्ट्रियल टाउनशिप-2 में करीब 13 घंटे बिजली न रहने पर लोगों ने सड़क जाम कर दिया, जिसके बाद पुलिस को दख़ल देना पड़ा। गुरुग्राम में भी गुरुवार शाम लोगों ने दौलताबाद फ़्लाईओवर पर जाम लगाया, जिससे यातायात और बिगड़ गया।
प्रशासन ने क्या किया?
गुरुग्राम के उपायुक्त उत्तम सिंह ने बिजली अधिकारियों और यूनियन प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं। बुधवार देर रात तक बातचीत चली, लेकिन हड़ताल खत्म कराने पर सहमति नहीं बनी। प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिया है, कि अस्पतालों, पीने के पानी के पंपिंग स्टेशनों, मेट्रो और दूसरी ज़रूरी सेवाओं को बिजली देने में प्राथमिकता रखें और जहां संभव हो, स्थानीय खराबियां ठीक करते रहें।
शिकायत के लिए प्रशासन ने ये नंबर जारी किए हैं:-
- DHBVN टोल-फ़्री हेल्पलाइन: 1912
- अतिरिक्त हेल्पलाइन: 180010804334
- WhatsApp शिकायत नंबर: 8813999708
- अतिरिक्त WhatsApp नंबर: 9540954768
कुछ उपभोक्ताओं की शिकायत है, कि कटौती के दौरान उनके कॉल उठे ही नहीं या कट गए।
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सरकार और यूनियनों का क्या रुख़ है?
सरकार का कहना है, कि वो इस फ़ैसले के खिलाफ़ है और HERC के आदेश को कानूनी रास्ते से चुनौती देगी, साथ ही बिजली सेवाएं चलती रहनी चाहिए। उसने कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील भी की है। दूसरी तरफ़ यूनियनों का कहना है, कि जब तक लाइसेंस रद्द नहीं होता, आंदोलन वापस नहीं होगा। कुछ निवासी और कारोबारी ये भी मानते हैं, कि निजी कंपनी आने से सेवा बेहतर हो सकती है और कटौती घट सकती है। असली सवाल यही है, कि मुकाबले से सेवा सुधरेगी या सरकारी व्यवस्था और उसके कर्मचारी कमज़ोर होंगे। लाइसेंस से अपने आप कोई एक नतीजा तय नहीं होता, ये इस पर निर्भर करेगा, कि इसे कैसे लागू किया जाता है और सेवा कैसी रहती है।
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हड़ताल 24 अक्टूबर तक चलनी है और लोग राहत का इंतज़ार कर रहे हैं। फ़िलहाल सबसे बड़ी ज़रूरत बिजली, पानी और मरम्मत सेवाओं की बहाली है। Eleven Power के आने का बड़ा विवाद हड़ताल खत्म होने के बाद भी कानूनी लड़ाई और बातचीत में चलता रहेगा।



