Gurugram School Fake CBSE Affiliation: माता-पिता जब किसी स्कूल में बच्चे का दाखिला कराते हैं, तो उनका भरोसा होता है, कि स्कूल उनके बच्चे का भविष्य बनाएगा। लेकिन गुरुग्राम के सेक्टर 9बी स्थित एजुक्रस्ट इंटरनेशनल स्कूल ने यह भरोसा बुरी तरह तोड़ा। स्कूल ने नकली CBSE मान्यता दिखाकर 25 छात्रों को कक्षा 9 और 10 में दाखिला दिया और फीस भी वसूलती रही। जब बोर्ड परीक्षा का वक्त आया, तो एडमिट कार्ड नहीं मिले और पूरा सच सामने आ गया। अब पुलिस ने स्कूल की प्रिंसिपल रिद्धिमा कटारिया को गुजरात से गिरफ्तार किया है।
17 फरवरी को खुला सच-
यह मामला तब सामने आया, जब कक्षा 10 के 11 छात्र CBSE की गणित की बोर्ड परीक्षा देने नहीं जा सके, क्योंकि उन्हें एडमिट कार्ड ही नहीं मिले। अगले दिन 18 फरवरी को स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। एक छात्रा के पिता ने शिकायत में बताया, कि स्कूल ने दाखिले के वक्त CBSE से मान्यता प्राप्त होने का दावा किया था, नकली प्रमाणपत्र और गलत रजिस्ट्रेशन नंबर भी दिखाया था। लेकिन जब सच सामने आया तो पता चला, कि स्कूल को दसवीं तक CBSE की कोई मान्यता ही नहीं थी।
8 साल से चल रहा था यह खेल-
पूछताछ में स्कूल के चेयरमैन विनय कटारिया ने खुलासा किया, कि वे पिछले 8 साल से स्कूल चला रहे थे और CBSE की मान्यता सिर्फ कक्षा 8 तक थी। बावजूद इसके उन्होंने नकली दसवीं की मान्यता, दिखाकर 25 छात्रों को कक्षा 9 और 10 में भर्ती किया और उनसे फीस भी वसूलते रहे। विनय कटारिया को 6 मार्च को बिलासपुर से गिरफ्तार किया जा चुका था।
प्रिंसिपल भागी गुजरात-
एफआईआर दर्ज होते ही स्कूल की प्रिंसिपल रिद्धिमा कटारिया बासई गांव से भागकर गुजरात चली गई। लेकिन गुरुग्राम पुलिस ने उसे वहां से ढूंढकर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने चेयरमैन, प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल सिमर बत्रा, कोऑर्डिनेटर सोनिया और अन्य स्टाफ सदस्यों के खिलाफ बीएनएस की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।
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बच्चों का एक साल बर्बाद-
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी पीड़ित हैं, वे 25 बच्चे जिनका एक साल बर्बाद हो गया। उनके माता-पिता ने न सिर्फ भारी फीस दी बल्कि अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य का सपना भी देखा था। यह मामला उन सभी अभिभावकों के लिए एक सबक है, कि दाखिले से पहले स्कूल की CBSE या किसी भी बोर्ड से मान्यता की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर जांच ज़रूर करें।
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