Delhi Police vs Himachal Police
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    Delhi Police vs Himachal Police: शिमला के हाईवे पर बुधवार की सुबह से गुरुवार तक दिल्ली पुलिस और हिमाचल प्रदेश पुलिस लगभग 24 घंटे तक आमने-सामने रहीं। बैरिकेड लगे, आधी रात को अदालत खुली, एफआईआर पर एफआईआर दर्ज हुई और हाईवे पर घंटों जाम लगा रहा। यह सब शुरू हुआ, तीन यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से, जो AI इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत मंडपम में हुए “शर्टलेस विरोध प्रदर्शन” से जुड़े थे।

    रोहरू से उठाया, शिमला में रोका-

    बुधवार सुबह दिल्ली पुलिस ने शिमला जिले के रोहरू में एक होटल से तीन यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं सौरभ, सिद्धार्थ और अरबाज को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी 20 फरवरी को भारत मंडपम में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ी थी, जिसमें दंगा भड़काने और वैमनस्य फैलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।

    लेकिन जैसे ही दिल्ली पुलिस की टीम आरोपियों को लेकर निकली, हिमाचल पुलिस ने रास्ते में ही काफिले को रोक लिया और आरोपियों को वापस शिमला ले आई, जहां उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया।

    आधी रात, अदालत और ट्रांजिट रिमांड-

    बुधवार देर रात दीनदयाल उपाध्याय ज़ोनल अस्पताल में तीनों आरोपियों का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। इसके बाद रात करीब डेढ़ बजे दिल्ली पुलिस की टीम को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एकांश कपिल के आवास पर ले जाया गया, जहां अदालत ने ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर लिया, जिसके बाद लगा की मामला सुलझ गया। लेकिन सुबह होते ही हिमाचल पुलिस ने शहर के भीतर ही काफिले को फिर से रोक लिया और कुछ अधिकारियों से अपहरण के मामले में सहयोग मांगा।

    शोघी बॉर्डर पर बैरिकेड और चाबी की मांग-

    तड़के करीब चार बजे काफिला शिमला से करीब 15 किलोमीटर दूर शोघी सीमा पर पहुंचा, जहां हिमाचल पुलिस ने एक बार फिर रास्ता रोक लिया। इस बार दिल्ली पुलिस की एक गाड़ी को बैरिकेड से घेर दिया गया। हिमाचल पुलिस का कहना था, कि उस गाड़ी में सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल सबूत हैं, इसलिए वाहन की चाबी सौंपी जाए।

    दिल्ली पुलिस ने साफ इनकार कर दिया। दिल्ली पुलिस के एसीपी राहुल विक्रम ने कहा, कि हिमाचल पुलिस को कोई डिजिटल सामग्री चाहिए तो उसके लिए लिखित अनुरोध करना होगा। आखिरकार जब दिल्ली पुलिस ने बरामदगी की लिस्ट शेयर की, तब जाकर रास्ता खुला।

    अपहरण का मुकदमा vs कानूनी गिरफ्तारी-

    हिमाचल पुलिस ने दिल्ली पुलिस की टीम के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया। आरोप था, कि 15-20 सादे कपड़ों में आए लोगों ने रोहरू के एक रिसॉर्ट से तीन व्यक्तियों को जबरन उठाया और बिना रसीद दिए सीसीटीवी कैमरा भी ले गए। दिल्ली पुलिस ने इसे पूरी तरह गलत बताया और कहा, कि उन्होंने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया।

    एक दिल्ली पुलिस अधिकारी ने मौके से वीडियो में कहा, “हमने सुबह पांच बजे गिरफ्तार किया और 24 घंटे में अदालत में पेश करना ज़रूरी है, आपने रात आठ बजे एफआईआर दर्ज कर हमें रोका।”

    राजनीति भी गर्माई-

    यह मामला जल्द ही राजनीतिक रंग ले बैठा। हिमाचल प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा, कि देश की छवि खराब करने वालों को हिमाचल में संरक्षण देना शर्मनाक है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर “अराजकता की राजनीति” का आरोप भी लगाया। वहीं सुक्खू पहले ही दिल्ली में हिमाचल सदन पर हुई देर रात की कार्रवाई को “दुर्भाग्यपूर्ण और असंवैधानिक” बता चुके हैं।

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    गुरुवार तड़के टकराव खत्म हुआ और दिल्ली पुलिस तीनों आरोपियों को लेकर हिमाचल से रवाना हो गई। अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु छिब और पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता भूदेव शर्मा भी शामिल हैं। हाईवे का नाटक भले खत्म हो गया, लेकिन अधिकारिता, प्रक्रिया और पुलिस शक्तियों को लेकर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई अभी लंबी चलनी है।

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    By sumit

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