Childbirth in Exam Center: मध्य प्रदेश के धार जिले के पिथमपुर इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था, पारिवारिक संवाद और किशोरियों की सेहत पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बोर्ड परीक्षा जैसे तनाव भरे माहौल के बीच कक्षा 10 की एक छात्रा ने परीक्षा केंद्र के बाथरूम में बच्चे को जन्म दे दिया। यह घटना मंगलवार को सेक्टर-1 थाना क्षेत्र के एक निजी स्कूल में हुई, जिसे बोर्ड परीक्षा केंद्र बनाया गया था।
गणित की परीक्षा दे रही थी छात्रा-
जानकारी के मुताबिक, छात्रा गणित का पेपर देने परीक्षा केंद्र पहुंची थी। वह करीब डेढ़ घंटे तक लगातार परीक्षा लिखती रही। आसपास बैठे छात्र-छात्राओं को अंदाजा भी नहीं था, कि उसके साथ कुछ असामान्य हो रहा है। इसी दौरान उसे तेज पेट दर्द की शिकायत हुई और वह परीक्षा हॉल से उठकर बाथरूम चली गई।
परीक्षा चल रही थी, इसलिए शुरुआत में किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। लेकिन कुछ ही देर बाद बाथरूम के अंदर से नवजात बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनते ही पूरे परीक्षा केंद्र में अफरा-तफरी मच गई। एक महिला स्टाफ को तुरंत अंदर भेजा गया, जहां पता चला, कि छात्रा ने वहीं बच्चे को जन्म दिया है।
एंबुलेंस बुलाई गई, मां और बच्चा दोनों स्वस्थ-
घटना की सूचना, मिलते ही 108 एंबुलेंस सेवा को कॉल किया गया। छात्रा और नवजात को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया, कि मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। फिलहाल दोनों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
परिवार को नहीं थी गर्भावस्था की जानकारी-
सेक्टर-1 थाने की उप-निरीक्षक चांदनी सिंगार ने बताया, कि मामले में एफआईआर दर्ज की गई है और केस को बेटमा थाने ट्रांसफर किया जा रहा है। शुरुआती जानकारी में सामने आया, कि छात्रा के परिवार को उसकी गर्भावस्था के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
परिवार के अनुसार, उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदेशा नहीं था, कि उनकी बेटी प्रेग्नेंट है। छात्रा की सगाई हो चुकी है, इसलिए शुरुआत में शक उसके मंगेतर पर गया। हालांकि पूछताछ में छात्रा ने बताया, कि बच्चा उसके मंगेतर का नहीं है।
गरबा के दौरान हुई थी पहचान-
छात्रा ने बयान में कहा, कि उसकी पहचान बेटमा के एक युवक से गरबा खेलने के दौरान हुई थी। साल 2024 में पहली मुलाकात के बाद दोनों संपर्क में रहे। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और संबंधित युवक की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
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यह घटना सिर्फ एक क्राइम या सनसनीखेज खबर नहीं है, बल्कि यह समाज के उस हिस्से को भी आईना दिखाती है, जहां किशोरियों से खुलकर बातचीत नहीं की जाती। सेक्स एजुकेशन, हेल्थ अवेयरनेस और पारिवारिक संवाद की कमी कई बार ऐसी परिस्थितियां पैदा कर देती है। बोर्ड परीक्षा के तनाव के बीच एक नाबालिग छात्रा का इस स्थिति से गुजरना अपने आप में संवेदनशील मामला है।
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