Rekha Gupta: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता एक ऐसे बयान की वजह से घिर गई हैं, जिसने न सिर्फ राजनीतिक हलचल मचाई, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा पर भी सवाल खड़े कर दिए। फरवरी 2026 में एक निचली अदालत ने अरविंद केजरीवाल को दिल्ली आबकारी नीति मामले में आरोपमुक्त कर दिया था। इस फैसले के बाद मार्च 2026 में रेखा गुप्ता ने एक ऐसा बयान दिया, जिसने तूफान खड़ा कर दिया।
क्या बोलीं रेखा गुप्ता?
रेखा गुप्ता ने कथित तौर पर यह कहा, कि केजरीवाल और AAP नेताओं के पक्ष में आया अदालती फैसला पता नहीं कैसे आया कोई सेटिंग की क्या किया। उन्होंने यह भी कहा, कि भले ही केजरीवाल को “सबूत के अभाव” में आरोपमुक्त किया गया हो लेकिन “जनता की नज़र में वो दोषी हैं।” यह बयान तुरंत वायरल हो गया और विपक्ष को आक्रामक होने का मौका मिल गया।
AAP का पलटवार-
AAP सांसद संजय सिंह ने रेखा गुप्ता के बयान को “न्यायपालिका का घोर अपमान” और संवैधानिक शपथ का उल्लंघन बताया। उन्होंने और अन्य AAP नेताओं ने मांग की, कि मुख्यमंत्री पर न्यायालय की अवमानना का मामला दर्ज किया जाए। AAP का कहना है, कि एक संवैधानिक पद पर बैठी व्यक्ति का इस तरह का बयान देना न सिर्फ अनुचित है, बल्कि लोकतंत्र के लिए खतरनाक भी है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि-
यह विवाद उस बड़े राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा है, जो दिल्ली में BJP और AAP के बीच लंबे समय से चल रहा है। रेखा गुप्ता फरवरी 2025 में दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं जब BJP ने विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करके लगभग एक दशक बाद AAP का शासन खत्म किया। तब से उनकी सरकार लगातार केजरीवाल पर आबकारी नीति घोटाले और “शीश महल” यानी उनके पूर्व सरकारी आवास के नवीनीकरण को लेकर निशाना साधती रही है।
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रेखा गुप्ता का बचाव-
रेखा गुप्ता ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा, कि कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है और निचली अदालत के आरोपमुक्ति के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। लेकिन सवाल यह है, कि एक मुख्यमंत्री का न्यायपालिका के बारे में इस तरह का बयान देना क्या संवैधानिक मर्यादा के दायरे में आता है? यह बहस अभी थमने वाली नहीं है।
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