Nawada Incident: बिहार के नवादा जिले में अंधविश्वास के नाम पर एक और घिनौना अपराध हुआ है। पंचुगढ़ मुसहरी गांव में 55 वर्षीय गया मांझी की निर्मम हत्या कर दी गई और उसकी पत्नी को बुरी तरह पीटा गया। आरोप था, कि इस दंपति ने टोना-टोटका करके एक निजी कार्यक्रम में संगीत सिस्टम खराब कर दिया था। इस घटना में पुलिस ने 17 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने इस भीषण हमले में हिस्सा लिया था।
एक सामान्य तकनीकी खराबी बनी मौत की वजह-
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मामला तब शुरू हुआ, जब आरोपी के घर में एक जश्न के दौरान साउंड सिस्टम में तकनीकी खराबी आई। मोहन मांझी ने गया मांझी और उसकी पत्नी समुद्री पर इस सामान्य सी घटना को लेकर आरोप लगाया, कि उन्होंने काला जादू करके कार्यक्रम को बिगाड़ने की कोशिश की है।
नवादा के पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमन ने बताया, कि आरोपी ने पीड़ितों पर इस बात का आरोप लगाया था, कि उन्होंने अपनी तांत्रिक शक्तियों का उपयोग करके इवेंट को खराब करने की कोशिश की थी। यह आरोप इतना हास्यास्पद है, कि इस पर विश्वास करना ही मुश्किल है, लेकिन दुखद बात यह है, कि पूरे गांव ने इस बकवास को सच मान लिया।
भीड़ की बर्बरता और अमानवीय व्यवहार-
मंगलवार को एक भीड़ ने इस दंपति के घर पर धावा बोला और जो कुछ किया वह इंसानियत की सभी हदें पार कर गया। द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, भीड़ ने पति-पत्नी को घर से बाहर घसीटा और उनके साथ बेहद क्रूरता से पेश आया। उन्होंने दोनों के बाल मुंडवा दिए, उन पर चूने का पेस्ट लगाया और चप्पलों की माला पहनाकर पूरे गांव में घुमाया।
यह सिर्फ शारीरिक हिंसा नहीं थी, बल्कि मानसिक रूप से तोड़ने वाली यातना थी। एक इंसान को इस तरह अपमानित करना और फिर उसकी हत्या करना दिखाता है, कि अंधविश्वास लोगों को कैसे जानवर बना देता है। यह व्यवहार किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
पुलिस की कार्रवाई और मृतक की दशा-
बुधवार सुबह 8 बजे पुलिस को इस हमले की जानकारी मिली। जब अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे तो उन्होंने गया, मांझी को मृत पाया और उसकी पत्नी समुद्री को बुरी तरह घायल अवस्था में देखा। घायल महिला को तुरंत स्थानीय जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है और वह खतरे से बाहर है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, हिंसा यहीं नहीं रुकी थी। बुधवार की सुबह अधिकारियों को एक और फोन आया जिसमें बताया गया, कि भीड़ गया मांझी के शव को श्मशान घाट ले जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी, कि भीड़ की योजना घायल विधवा को भी जिंदा जला देने की थी। सिर्फ पुलिस के हस्तक्षेप की वजह से इस घिनौने कृत्य को रोका जा सका।
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न्याय की दिशा में कदम-
अधीक्षक ने बताया, कि पीड़िता समुद्री के बयान के आधार पर तुरंत कार्रवाई की गई है। सत्रह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें नौ महिलाएं और सात पुरुष शामिल हैं। इनमें मुख्य आरोपी मोहन मांझी भी है। यह गिरफ्तारियां पीड़ित की पत्नी के बयान के आधार पर की गई हैं और आगे की जांच जारी है।
पुलिस ने यह भी बताया, कि इस दंपति को पहले भी इसी तरह के टोना-टोटके के आरोपों में परेशान किया जाता था। यह दिखाता है, कि समाज में इस तरह की सोच कितनी गहरी है और कैसे निर्दोष लोगों को बार-बार प्रताड़ित किया जाता है।
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