Haryana Electricity Strike: हरियाणा में बिजली विभाग के कर्मचारी तीन दिन की राज्यव्यापी हड़ताल पर जा रहे हैं, जो बुधवार रात 10 बजे से शुरू होनी है। गुरुग्राम के लोगों को पहले ही चेता दिया गया है, कि इस दौरान बिजली में खराबी आई तो उसे ठीक करने वाला कोई नहीं होगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि हड़ताल क्यों हो रही है और इसका आप पर क्या असर पड़ सकता है।
हड़ताल क्यों हो रही है?
हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) ने Eleven Power Private Limited नाम की निजी कंपनी को गुरुग्राम और नूंह में पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस दिया है। इसी फ़ैसले के विरोध में कर्मचारी संघ हड़ताल कर रहे हैं। उनकी चिंता है कि इससे नौकरियाँ असुरक्षित होंगी और बिजली विभाग का निजीकरण होगा।
क्या है ये लाइसेंस?
अधिकारियों के मुताबिक, लाइसेंस 25 साल के लिए है। घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ता दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) से हटकर इस निजी कंपनी से बिजली ले सकेंगे। ऐसा तब होगा जब कंपनी चरणों में अपना वितरण ढाँचा तैयार कर लेगी और ये भी व्यवहार्यता (feasibility) पर निर्भर करेगा।
लोगों को क्या चेतावनी मिली?
DHBVN के फील्ड कर्मचारियों ने WhatsApp ग्रुप के ज़रिए सोसाइटियों के निवासियों को बता दिया है, कि हड़ताल में बिजली सप्लाई बाधित हो सकती है और मरम्मत सेवाएं उपलब्ध नहीं होंगी। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, हड़ताल में हर स्तर के कर्मचारी शामिल हैं, जिनमें संविदा कर्मी और थर्ड-पार्टी वेंडर के ज़रिए रखे गए कर्मचारी भी हैं। बिजली कटने की सूरत में खराबी ठीक करने के लिए कोई स्टाफ़ मौजूद नहीं रहेगा।
कौन-कौन से संगठन हड़ताल में हैं?
हड़ताल की अगुवाई चार संगठन कर रहे हैं, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन, ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर्स यूनियन, हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड वर्कर्स यूनियन, हरियाणा पावर कॉरपोरेशन SC-ST एंड BC वर्कर्स यूनियन कई दूसरे संगठन भी इनका समर्थन कर रहे हैं।
यूनियनों का क्या कहना है?
हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव रविंदर घनघस के मुताबिक, दूसरे शहरों में जहाँ निजी कंपनियाँ हैं, उन्हें खास इलाके दिए जाते हैं और वो ज़्यादातर घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली देती हैं। गुरुग्राम और नूंह पहली बार पूरी तरह निजी कंपनी के पैरेलल वितरण के लिए खोले गए हैं।
- उनका कहना है कि ये सरकारी क्षेत्र को निजीकरण की तरफ़ धकेलना है और उन्होंने BSNL का उदाहरण दिया।
- हड़ताल पर आगे का फ़ैसला शनिवार को लिया जाएगा।
एसोसिएशन के गुरुग्राम ज़िला अध्यक्ष सुरेश रुहिल ने कहा, कि गुरुग्राम से DHBVN को हर महीने 450 से 500 करोड़ रुपये की कमाई होती है। उनका सवाल है, कि जब निगम मुनाफ़े में है, तो निजीकरण की जल्दबाज़ी क्यों?
निवासियों की क्या राय है?
द्वारका एक्सप्रेसवे गुरुग्राम डेवलपमेंट एसोसिएशन के डिप्टी कन्वीनर सुनील सरीन ने कहा, कि उपभोक्ता के तौर पर वे एक से ज़्यादा बिजली कंपनियों का स्वागत करते हैं, क्योंकि इससे विकल्प मिलता है। उनके मुताबिक, मुकाबले से DHBVN को अपनी सेवाएं और ढांचा सुधारने का दबाव मिलेगा।
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सरकार ने क्या कहा?
- ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बुधवार को कहा, कि किसी निजी कंपनी से बिजली सप्लाई के लिए आवेदन माँगा ही नहीं गया था। उन्होंने कहा कि HERC के नियमों के तहत कोई भी कंपनी लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकती है। उन्होंने यूनियनों को बुधवार दोपहर 3 बजे बैठक के लिए बुलाया, लेकिन संगठनों ने ये कहकर इनकार कर दिया कि आख़िरी वक़्त की बातचीत का कोई फ़ायदा नहीं।
- मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार HERC के आदेश के खिलाफ़ विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal for Electricity) में अपील करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार यूनियनों की पसंद के वकीलों की पूरी टीम रखने को तैयार है और इस मुद्दे पर पूरी तरह उनके साथ है। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि त्योहारों के मौसम में आम जनता को परेशानी न हो।
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