Sub-Inspector Bribery Case: दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर पर जब खुद रिश्वतखोरी का आरोप लगे और कार्रवाई सीधे थाने में घुसकर हो, तो मामला चर्चा में आना तय है। प्रशांत विहार थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर लेखराज को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिश्वत मांगने और लेने के आरोप में हिरासत में ले लिया है। CBI की टीम ने थाने पहुंचकर ही उन्हें अपने कब्जे में लिया, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
अग्रिम जमानत मिली, फिर भी चैन नहीं-
पूरा मामला एक धोखाधड़ी के केस से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक, एक व्यक्ति को इस केस में पहले ही कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी थी। आम तौर पर इसका मतलब होता है, कि गिरफ्तारी की तलवार हट गई और इंसान थोड़ी राहत की सांस ले सकता है। लेकिन आरोप है, कि सब-इंस्पेक्टर लेखराज ने इस बात को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करते हुए उस व्यक्ति को लगातार परेशान किया। सोचिए, जिस इंसान के पास कोर्ट की राहत हो, उसे भी कानून के रखवाले का डर सताता रहे, तो आम आदमी का भरोसा किस पर टिकेगा।
Delhi: CBI detained Prashant Vihar Police Station Sub-Inspector Lekhraj in an alleged bribery case. He was accused of harassing a person in a cheating case despite the person receiving anticipatory bail. According to the complaint, the accused police officer allegedly first took Rs 20,000 and later demanded an additional Rs 80,000. Following the complaint, the CBI took action and detained him from the police station. Further investigation is underway.
— IANS (@ians_india) October 4, 2026
पहले 20 हज़ार लिए, फिर मांगे 80 हज़ार-
शिकायत में दावा किया गया है कि परेशान करने के बदले आरोपी पुलिसकर्मी ने पहले ही 20,000 रुपये ले लिए थे। इतने से भी पेट नहीं भरा, तो उसने 80,000 रुपये की और मांग रख दी। यानी कुल मिलाकर एक लाख रुपये का सौदा। पीड़ित के लिए यह दोहरी मार थी, एक तरफ केस का तनाव और दूसरी तरफ जेब पर बढ़ता बोझ। आखिरकार उसने चुपचाप सहने के बजाय हिम्मत दिखाई और CBI का दरवाज़ा खटखटाया।
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शिकायत पर तुरंत एक्शन में आई CBI-
पीड़ित की शिकायत मिलते ही CBI ने देर नहीं की। एजेंसी ने प्रशांत विहार थाने में ऑपरेशन चलाया और आरोपी सब-इंस्पेक्टर को वहीं से हिरासत में ले लिया। फिलहाल CBI इस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश में है, कि क्या इस केस में और भी सबूत या दूसरे लोग शामिल हैं। जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी, कि आरोप कितने ठोस साबित होते हैं। तब तक यह याद रखना भी ज़रूरी है, कि अभी ये आरोप हैं और अंतिम फैसला कानून की प्रक्रिया से ही तय होगा।
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