Septic Tank Accident: दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने एक बार फिर सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई करने वाले मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज 600 रुपये की दिहाड़ी कमाने के लिए घर से निकले अरुण को शायद अंदाजा भी नहीं था, कि यह उसके जीवन का आखिरी दिन साबित होगा।
अरुण बाहरी दिल्ली के सुल्तानपुरी में अपनी पत्नी आरती और तीन छोटे बेटों के साथ एक साधारण से दो कमरों के मकान में रहता था। दिहाड़ी मजदूर होने के कारण उसकी आमदनी पूरी तरह काम मिलने पर निर्भर थी। जिस दिन काम मिलता, उसी दिन घर का राशन, बच्चों की पढ़ाई और परिवार की छोटी-बड़ी जरूरतें पूरी हो पाती थीं।
सुबह आया फोन और बदल गई जिंदगी-
शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे तक अरुण घर पर ही था। तभी उसके ठेकेदार की ओर से फोन आया, कि एक टैंक की सफाई करनी है। आरती बताती हैं, कि अरुण ने कहा, कि उसे काम के लिए बुलाया गया है और वह तुरंत घर से निकल गया। लेकिन कुछ ही घंटों बाद फोन आया, कि अरुण सेप्टिक टैंक के अंदर बेहोश हो गया है। जब वह मौके पर पहुंचीं तो उन्हें बताया गया, कि उनके पति की मौत हो चुकी है। सदमे में डूबी आरती बार-बार यही सवाल पूछ रही हैं, कि आखिर अरुण टैंक के अंदर गया ही क्यों, जबकि उसका काम बाहर मशीन चलाने का था।
#WATCH | Delhi: Brother of a deceased, Narendra says, “…I learned that they were poisoned by gas inside the tank. I went to the scene, but the police didn't let anyone enter…they are saying that the first person went in, then he was overcome by gas and collapsed inside. Another… pic.twitter.com/KGqvNawfzy
— ANI (@ANI) June 27, 2026
सुरक्षा उपकरणों के बिना कराया गया खतरनाक काम-
परिजनों का आरोप है, कि मजदूरों को किसी भी तरह के सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए थे। अरुण अपने पड़ोसियों संदीप और चांद के साथ वहां पहुंचा था। शुरुआत में उन्हें टैंक से पानी निकालने के लिए बुलाया गया था। लेकिन जब मशीन से सफाई पूरी नहीं हो सकी, तो कथित तौर पर मजदूरों पर टैंक के अंदर उतरकर सफाई करने का दबाव बनाया गया।
बताया जा रहा है, कि सबसे पहले चांद को टैंक में उतारा गया। काफी देर तक बाहर न आने पर अरुण उसे बचाने के लिए अंदर गया। इसके बाद संदीप भी अपने साथियों को बचाने के लिए टैंक में उतर गया। जहरीली गैसों और ऑक्सीजन की कमी के कारण तीनों मजदूर बाहर नहीं लौट सके।
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पीछे छूट गए रोते-बिलखते परिवार-
अरुण की पत्नी आरती अब अपने तीन मासूम बेटों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। वहीं संदीप की पत्नी निशा के सामने भी परिवार चलाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। निशा की 10 साल की बेटी है और घर में बुजुर्ग सास-ससुर भी हैं।
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