Ban on Indian Mangoes: भारत को दुनिया के सबसे बड़े आम उत्पादक देशों में से एक माना जाता है और यहां के अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसे आम विदेशों में भी काफी पसंद किए जाते हैं। लेकिन हाल ही में भारत के आमों को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने लोगों के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं। जापान के बाद अब नेपाल ने भी भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में कई लोग यह सोचने लगे हैं, कि क्या भारत के आम वाकई सेहत के लिए खतरनाक हैं?
रोक के पीछे की वजह-
नेपाल सरकार ने भारतीय आमों पर रोक लगाने का फैसला अत्यधिक कीटनाशक अवशेष (Pesticide Residues) और सीमावर्ती इलाकों में पर्याप्त क्वारंटीन व्यवस्था की कमी को कारण बताया है। अधिकारियों के अनुसार कुछ रिपोर्टों में आयातित आमों में अधिक मात्रा में कीटनाशकों की आशंका जताई गई थी, जिसके बाद एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया। इसका मतलब यह नहीं है कि भारत के सभी आम असुरक्षित हैं, बल्कि कुछ खेपों की जांच और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई गई है।
स्थानीय किसानों को फायदा-
नेपाल के मधेश प्रांत के अधिकारियों का कहना है कि भारतीय आमों पर लगी रोक से स्थानीय किसानों को इस सीजन में फायदा हुआ है क्योंकि बाजार में प्रतिस्पर्धा कम हो गई है। सिराहा, सप्तरी और धनुषा जैसे जिलों में उगाए जाने वाले आमों की मांग बढ़ी है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी माना कि घरेलू उत्पादन पूरे देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।
व्यापारियों ने जताई चिंता-
फल और सब्जी व्यापारियों का मानना है कि भारतीय आमों पर पूरी तरह रोक लगाने से बाजार में आपूर्ति की कमी हो सकती है। उनका सुझाव है कि सरकार को आधुनिक क्वारंटीन सुविधाएं विकसित करनी चाहिए और गुणवत्ता जांच के बाद भारतीय आमों को प्रवेश की अनुमति देनी चाहिए। व्यापारियों के अनुसार यदि प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहा तो आमों की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
जापान ने क्यों रोके भारतीय आम?
कुछ दिन पहले जापान ने भी इस सीजन के लिए भारत से ताजे आमों के आयात को रोक दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक जापानी प्लांट क्वारंटीन अधिकारियों ने भारतीय ट्रीटमेंट सुविधाओं के निरीक्षण के दौरान फ्यूमिगेशन और संक्रमण नियंत्रण प्रक्रियाओं में कुछ कमियां पाई थीं। इसी वजह से अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी लोकप्रिय किस्मों की खेपों को रोक दिया गया। यह फैसला मुख्य रूप से प्रोसेसिंग और क्वारंटीन मानकों से जुड़ा था, न कि सभी भारतीय आमों की गुणवत्ता पर सामान्य टिप्पणी।
क्या भारतीय आम खाना सुरक्षित है?
बाजार में बिकने वाले आमों को अच्छी तरह धोकर और स्वच्छ तरीके से खाने पर सामान्य रूप से कोई समस्या नहीं होती। कीटनाशकों का उपयोग केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में खेती का हिस्सा है और निर्यात के लिए तय मानकों का पालन करना जरूरी होता है। यदि किसी खेप में निर्धारित सीमा से अधिक अवशेष पाए जाते हैं, तो संबंधित देश एहतियाती कदम उठा सकते हैं।
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नेपाल और जापान द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को यह मान लेना सही नहीं होगा, कि भारत के सभी आम सेहत के लिए खतरनाक हैं। ये फैसले मुख्य रूप से गुणवत्ता जांच, कीटनाशक अवशेषों की निगरानी और क्वारंटीन प्रक्रियाओं से जुड़े हैं। भारत के आम आज भी दुनिया भर में अपनी मिठास और गुणवत्ता के लिए मशहूर हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानकों का सख्ती से पालन करना भविष्य में ऐसे विवादों से बचने के लिए बेहद जरूरी है।
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