Great Nicobar Project: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बुधवार को ग्रेट निकोबार द्वीप पहुंचे और वहां से जो उन्होंने देखा और महसूस किया, वह उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के दुनिया के सामने रख दिया। उन्होंने केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी 81,000 करोड़ रुपये के रणनीतिक बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट को “हमारी पीढ़ी में इस देश की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ सबसे बड़े घोटालों और सबसे गंभीर अपराधों में से एक” करार दिया।
लाखों पेड़ों पर कुल्हाड़ी का निशान-
एक्स पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने लिखा, “सरकार यहां जो कर रही है उसे ‘प्रोजेक्ट’ कहती है। मैंने जो देखा वह कोई प्रोजेक्ट नहीं है। यह लाखों पेड़ हैं जिन पर कुल्हाड़ी के निशान लगे हैं। यह 160 वर्ग किलोमीटर वर्षावन है जिसे मिटाने की सज़ा दी जा रही है। यह वे समुदाय हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ किया गया जबकि उनके घर उनसे छिने जा रहे हैं।” ग्रेट निकोबार के जंगलों में घूमते हुए उन्होंने कहा, कि यहां के पेड़ “स्मृति से भी पुराने” हैं।
I travelled through Great Nicobar today.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 29, 2026
These are the most extraordinary forests I have ever seen in my life. Trees older than memory. Forests that took generations to grow.
The people on this island are equally beautiful – both the adivasi communities and the settlers – but… pic.twitter.com/vYdBWdYfIJ
आदिवासियों का दर्द-
राहुल गाँधी ने द्वीप पर रहने वाले लोगों को “खूबसूरत” कहा और कहा कि पीढ़ियों से पले-बढ़े ये जंगल और इनमें बसने वाले लोग लूटे जा रहे हैं। उनका कहना था, कि यह समुदाय तब भी अनदेखा किया गया जब उनके घरों पर फैसले हो रहे थे। यह सिर्फ पेड़ों की बात नहीं, यह उन लोगों के अस्तित्व की बात है जो सदियों से इस प्रकृति के साथ जीते आए हैं।
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क्या है यह प्रोजेक्ट जिस पर इतना विवाद है?
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी रणनीतिक बुनियादी ढांचा योजना है। इसमें एक बड़े बंदरगाह, हवाई अड्डे और टाउनशिप का निर्माण शामिल है। इसकी अनुमानित लागत 81,000 करोड़ रुपये है। लेकिन पर्यावरणविदों और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ताओं ने शुरू से इस प्रोजेक्ट का विरोध किया है, क्योंकि इसमें बड़े पैमाने पर वर्षावन काटने और आदिवासी समुदायों के विस्थापन की आशंका है। राहुल गांधी का यह दौरा इस मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ले आया है।
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