Amravati Case: महाराष्ट्र के अमरावती से सामने आया यह मामला पूरे देश को हिला देने वाला है। 19 वर्षीय आरोपी Ayan Ahmed Tanveer, जिसे मोहम्मद अयाज़ के नाम से भी जाना जा रहा है, पर आरोप है, कि उसने सोशल मीडिया के जरिए नाबालिग लड़कियों को अपने जाल में फंसाया। बताया जा रहा है, कि आरोपी ने Snapchat और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी पहचान बनाकर पहले भरोसा जीता और फिर “लव ट्रैप” के जरिए शिकार बनाया।
180 से ज्यादा पीड़ित और सैकड़ों वीडियो-
इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि जांच में अब तक करीब 180 पीड़ितों की आशंका जताई जा रही है। आरोपी के डिवाइस से 350 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो बरामद हुए हैं। यह सिर्फ एक व्यक्ति का अपराध नहीं लग रहा, बल्कि एक बड़े संगठित नेटवर्क की तरफ इशारा कर रहा है। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है, कि क्या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय था।
ब्लैकमेल और जबरन शोषण का आरोप
अंग्रजी समाचार वेबसाइट टाइम्स नाउ के मुताबिक, जांच में सामने आया है, कि आरोपी न सिर्फ वीडियो बनाता था, बल्कि उन्हें हथियार बनाकर पीड़ितों को ब्लैकमेल भी करता था। कई मामलों में लड़कियों पर दबाव डालकर उनसे और शोषण करवाने तथा उन्हें गलत कामों में धकेलने की भी आशंका जताई जा रही है। इसने पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया है।
सहयोगियों की भूमिका और वायरल नेटवर्क-
पुलिस ने इस मामले में दो अन्य आरोपियों टरबन खान और मोहम्मद सदी खान को भी गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है, कि इन्होंने वीडियो को वायरल करने में मदद की। इससे साफ होता है, कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का काम नहीं था, बल्कि एक नेटवर्क मिलकर इस गंदे खेल को चला रहा था।
पुलिस कार्रवाई और सख्त कदम-
आरोपी को फिलहाल 21 अप्रैल 2026 तक पुलिस कस्टडी में रखा गया है। उसके खिलाफ POCSO Act, भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। वहीं प्रशासन ने 15 अप्रैल को आरोपी के घर के अवैध हिस्से पर बुलडोजर चलाकर सख्त संदेश दिया है।
पीड़ितों के लिए बनाई गई विशेष टीम-
इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती यह है, कि कई पीड़ित सामने आने से डर रहे हैं। समाज के डर और बदनामी के कारण शिकायत दर्ज नहीं हो पा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए पुलिस ने महिला अधिकारियों की एक विशेष टीम बनाई है, जिससे पीड़ित सुरक्षित महसूस करें और अपनी बात रख सकें।
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क्या और खुलासे होंगे?
फिलहाल साइबर सेल वायरल वीडियो हटाने में जुटी है और फॉरेंसिक टीम डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे इस नेटवर्क के और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में छिपे खतरों की गंभीर चेतावनी भी है।
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