Gurugram Taxidermy Centre: गुरुग्राम, जिसे साइबर सिटी के नाम से जाना जाता है, अब वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी एक नई पहचान बनाने जा रहा है। यहां प्रदेश का पहला टैक्सिडर्मी सेंटर तैयार हो चुका है और अगले महीने से इसके शुरू होने की पूरी संभावना है। यह सेंटर जिला अदालत के पास वन विभाग कार्यालय के पीछे बनाया गया है और इसे खासतौर पर वन्यजीवों के संरक्षण और जागरूकता के लिए डिजाइन किया गया है।
अब तक अगर किसी वन्यजीव की मौत हो जाती थी, चाहे वो प्राकृतिक कारणों से हो या किसी हादसे में, तो पोस्टमार्टम के बाद उसे जला दिया जाता था। लेकिन इस नए सेंटर के शुरू होने के बाद यह प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी।
अब नहीं जलेंगे वन्यजीव-
इस सेंटर की सबसे खास बात यह है, कि यहां मृत वन्यजीवों को जलाने की बजाय उनकी खाल और अन्य अंगों को सुरक्षित रखा जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी, जिसमें पहले खाल को कीटाणुरहित किया जाएगा और फिर उसे एक कृत्रिम ढांचे पर लगाया जाएगा।
इस तरह तैयार किया गया मॉडल बिल्कुल असली वन्यजीव जैसा दिखाई देगा। इसका मकसद सिर्फ संरक्षण नहीं, बल्कि लोगों को वन्यजीवों के प्रति जागरूक करना भी है। सेंटर में फ्रीजर की सुविधा भी होगी, जिससे मृत वन्यजीवों के शरीर को कई दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। प्रदेश में कहीं भी किसी वन्यजीव की मृत्यु होने पर उसे यहां लाया जाएगा।
अरावली क्षेत्र में मिलेगा बड़ा फायदा-
हरियाणा के अरावली क्षेत्र में तेंदुआ, हिरण, गीदड़ जैसे कई वन्यजीव बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। ऐसे में यह सेंटर इन जीवों के संरक्षण और अध्ययन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। वन विभाग के अनुसार, इस सेंटर के जरिए वन्यजीवों के बारे में गहराई से जानकारी जुटाई जा सकेगी और उनकी प्रजातियों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।
जंगल सफारी पार्क में बनेगा जागरूकता केंद्र-
इस पहल का एक और बड़ा हिस्सा है प्रस्तावित अरावली जंगल सफारी पार्क, जिसे गुरुग्राम और नूंह जिले में करीब 10 हजार एकड़ जमीन पर विकसित किया जाएगा। यह दुनिया का सबसे बड़ा जंगल सफारी पार्क बनने की ओर बढ़ रहा है। इस पार्क में एक खास जागरूकता केंद्र भी बनाया जाएगा, जहां टैक्सिडर्मी सेंटर में तैयार किए गए वन्यजीवों के मॉडल लगाए जाएंगे।
यहां आने वाले लोग इन मॉडलों को देखकर वन्यजीवों के बारे में आसानी से जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसके अलावा भोंडसी स्थित भारती यात्रा केंद्र में भी ऐसा ही एक अवेयरनेस सेंटर बनाने की योजना है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह जानकारी पहुंच सके।
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जागरूकता और संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम-
वन संरक्षक डॉ. सुभाष यादव के अनुसार, यह सेंटर एक तरह की लेबोरेट्री की तरह काम करेगा, जहां वन्यजीवों को इस तरह संरक्षित किया जाएगा कि वे बिल्कुल जीवित जैसे दिखें। यह पहल न सिर्फ वन्यजीवों को संरक्षित करने में मदद करेगी, बल्कि आम लोगों में उनके प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता भी बढ़ाएगी।
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