Origin of Samosa: भारत में अगर लोग किसी एक स्नैक की सबसे ज्यादा दीवाने हैं, तो वह है समोसा। बाहर से करारा और अंदर से मसालेदार, यह हर गली-नुक्कड़ से लेकर घरों तक का सबका फेवरेट है। लेकिन हाल ही में एक वायरल पोस्ट ने इस ‘देसी’ समोसे की जड़ों पर ही सवाल खड़ा कर दिया है, जिससे सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है।
वायरल पोस्ट ने छेड़ी बहस-
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर Dr MF Khan नाम के एक यूजर, जो खुद को इतिहास और पुरातत्व का शोधकर्ता बताते हैं, ने समोसे की उत्पत्ति को लेकर दिलचस्प दावा किया है। उनके अनुसार, समोसा जितना आज आम लोगों का स्ट्रीट फूड है, उतना पहले नहीं था। उन्होंने एक 500 साल पुराने पर्शियन (फारसी) पांडुलिपि का हवाला दिया है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
The samosa is one of the most eaten street foods on the planet. This is a 500-year-old recipe for it, written in Persian in a manuscript sitting in the British Museum.
The manuscript is called the Ni'matnama, the Book of Delights, written between 1501-1510 AD, for the Sultan of… pic.twitter.com/uEjIe77zQl
— Dr. M.F. Khan (@Dr_TheHistories) April 8, 2026
‘निमतनामा’ में मिला अलग समोसा-
Dr Khan ने जिस पांडुलिपि का जिक्र किया है, उसका नाम है Ni’matnama। यह किताब 1501 से 1510 के बीच मांडू के सुल्तान के लिए लिखी गई थी और आज British Museum में सुरक्षित है। इसमें दिए गए समोसे की रेसिपी आज के समोसे से बिल्कुल अलग है। इसमें आलू या हरी मिर्च का कोई जिक्र नहीं है, बल्कि इसमें भुना बैंगन, सूखा अदरक और मटन (लैम्ब) का इस्तेमाल बताया गया है, जिसे घी में फ्राई किया जाता था।
This proves it’s Indian as Pharsi was the language of the Muslim elite in India, just like French was the language of the Russian Court.
— S Dipak (@sangamdipak01) April 9, 2026
आलू और मिर्च बाद में आए-
पोस्ट में यह भी बताया गया, कि आज के समोसे की पहचान बने आलू और मिर्च उस समय भारत में थे ही नहीं। ये दोनों चीजें बाद में भारत पहुंचीं। यानी जो समोसा हम आज खाते हैं, वह समय के साथ बदलता गया और अपनी मौजूदा पहचान तक पहुंचा।
शाही रसोई से स्ट्रीट फूड तक-
इस वायरल पोस्ट के मुताबिक, समोसा पहले आम लोगों का नहीं बल्कि शाही रसोई का हिस्सा था। यह मुगल सम्राट अकबर और टीपू सुल्तान के दौर से होते हुए ब्रिटिश कलेक्शन तक पहुंचा। यानि जो समोसा आज सड़क किनारे 10-20 रुपये में मिलता है, वह कभी शाही पकवान हुआ करता था।
सोशल मीडिया पर लोगों की राय-
इस पोस्ट के वायरल होने के बाद लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने कहा, कि समोसे की शुरुआत ओमान से हुई, जहां इसे आज भी ‘संबोसा’ कहा जाता है। वहीं कुछ ने इसे मिडिल ईस्ट और सेंट्रल एशिया से जुड़ा बताया, जहां इसे ‘संबुसक’ या ‘संबोसाग’ कहा जाता था, जिसका मतलब फारसी में ‘त्रिकोण’ होता है। कुछ यूजर्स ने मजाक में समोसे को “इमिग्रेंट” तक बता दिया, जबकि कुछ ने इसे भारतीय संस्कृति का ही हिस्सा माना।
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इतिहास से जुड़ी दिलचस्प परतें-
एक यूजर ने बताया, कि ‘निमतनामा’ सिर्फ रेसिपी बुक नहीं है, बल्कि इसमें शाही जीवनशैली, पान बनाने के तरीके, शिकार और यहां तक कि युद्ध के दौरान आनंद लेने के तरीकों का भी जिक्र है। यानी यह एक तरह का ‘रॉयल लाइफस्टाइल गाइड’ था।
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आखिर सच क्या है?
समोसे की असली उत्पत्ति चाहे जहां भी हुई हो, एक बात साफ है, कि यह समय के साथ बदलता हुआ भारत की पहचान बन गया है।



