Viral Video: अरुणाचल प्रदेश से आई एक डांस टीम पटना में अपने हुनर का प्रदर्शन करने पहुंची थी। लेकिन उनका यह सफर एक दर्दनाक अनुभव में बदल गया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। 2 अप्रैल को पटना के एक अस्पताल में टीम की कुछ महिलाएं जब पब्लिक वॉशरूम इस्तेमाल करने गईं, तो वहां मौजूद एक अटेंडेंट ने उन्हें रोक दिया। सिर्फ रोका ही नहीं, बल्कि उनसे पहचान पत्र मांगकर उनके भारतीय होने पर सवाल उठा दिया।
गालियां, हंसी और कैमरे में कैद सच-
जब टीम ने इसका विरोध किया, तो आरोप है कि अटेंडेंट ने उन्हें “मोमोज”, “चिंकी” और “चाइनीज” जैसे अपमानजनक शब्दों से पुकारा। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही, कि वह इस पूरे व्यवहार के दौरान हंसती रहा, जैसे यह सब एक मजाक हो। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई, जिसमें एक महिला की आवाज साफ सुनाई देती है, “हम लोग नॉर्थ ईस्ट से घूमने के लिए आते हैं, लेकिन ऐसे इंसिडेंट्स की वजह से डर लगता है।” यह आवाज सिर्फ गुस्से की नहीं, बल्कि सालों से जमा हुए दर्द की भी थी।
🚨Racism incident in Patna! Arunachal dance team faced abuse, asked for ID to use public washroom, called derogatory names. Northeast Indians feel unsafe in own country pic.twitter.com/M0DgY0PeAf
— indiainlast24hr (@indiain24hr) April 3, 2026
वीडियो ने मचाया बवाल-
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और नागालैंड से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक लोगों में गुस्सा फैल गया। लोगों ने बिहार पुलिस और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांदू से तुरंत कार्रवाई की मांग की। हालांकि कुछ लोगों ने इसे अस्पताल की ID पॉलिसी से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसे सीधा-सीधा नस्लीय भेदभाव माना। अभी तक न कोई FIR दर्ज हुई है और न ही कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।
सोशल मीडिया पर बवाल-
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई लोगों ने इस घटना पर शर्मिंदगी जताई। कुछ यूजर्स ने माफी मांगी, तो कुछ ने गुस्से में प्रशासन को टैग करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। एक यूजर ने लिखा, “नॉर्थ ईस्ट के लोग देश के लिए सेना में सेवा देते हैं, टैक्स भरते हैं और फिर भी उन्हें अपने ही देश में विदेशी समझा जाता है।” यह बात कई लोगों के दिल को छू गई।
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बार-बार क्यों दोहराई जाती है यह कहानी?
यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ महीनों में ही कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां नॉर्थ ईस्ट के लोगों को नस्लीय टिप्पणियों और हिंसा का सामना करना पड़ा। दिसंबर 2025 में देहरादून में एक छात्र की हत्या, जनवरी 2026 में दिल्ली के करोल बाग में हमला और फरवरी-मार्च में साउथ दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में हुई घटनाएं, ये सब एक ही दर्दनाक सच्चाई को दिखाती हैं।
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