India Oil Reserves: पीएम मोदी ने संसद के बजट सत्र में West Asia में जारी युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने देशवासियों को भरोसा दिलाया, कि भले ही वैश्विक स्तर पर एनर्जी क्राइसिस गहराता जा रहा हो, लेकिन भारत में तेल और गैस की सप्लाई फिलहाल स्टेबल है। PM मोदी ने साफ कहा, कि सरकार ने पहले से ही ऐसे हालात के लिए तैयारी कर रखी है।
West Asia War का असर-
West Asia में चल रहा युद्ध अब चौथे हफ्ते में पहुंच चुका है, जिससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट हिल गया है। भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का लगभग 40% क्रूड ऑइल और 60% गैस मिडल ईस्ट से आयात करते हैं, अब इस संकट का असर महसूस करने लगे हैं। संसद में बोलते हुए PM मोदी ने कहा, कि इस युद्ध ने दुनिया भर में फ्यूल सप्लाई को प्रभावित किया है और भारत के व्यापारिक सिस्टम पर भी इसका असर पड़ा है।
उन्होंने कहा, कि ये सिर्फ किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया इससे प्रभावित हो रही है। भारत भी इससे अछूता नहीं है, लेकिन हमने हालात को संभालने के लिए मजबूत व्यवस्था की है।”
क्या भारत में तेल की कमी होगी?
सबसे बड़ा सवाल यही है, कि क्या भारत में फ्यूल स्टोरेज होगा? इस पर PM मोदी ने साफ कहा, कि देश में एनर्जी सिक्योरिटि का कोई संकट नहीं है। पेट्रोल और डीजल की सप्लाई देशभर में बिना रुकावट जारी है।
सरकार के मुताबिक, भारत के पास 5.3 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा का स्ट्रैटजिक पैट्रोलियम रिज़र्व (SPR) मौजूद है। इसके अलावा 6.5 मिलियन मीट्रिक टन अतिरिक्त स्टोरेज पर भी काम चल रहा है। पिछले 10 सालों में रिफाइनिंग कैपेसिटी को भी काफी बढ़ाया गया है, जिससे देश की आत्मनिर्भरता में इजाफा हुआ है।
कितने दिन चल सकता है भारत का तेल भंडार?
संसद में जानकारी देते हुए, पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया, कि भारत के पास अभी करीब 3.372 मिलियन टन SPR उपलब्ध है, जो उसकी कुल क्षमता का लगभग दो-तिहाई है। यह आंकड़ा पेट्रोल-डीजल जैसे रिफाइंड प्रोडक्ट को शामिल नहीं करता।
अनुमानों के अनुसार भारत को रोजाना करीब 5.5 मिलियन बैरल क्रूड ऑइल की जरूरत होती है। मौजूदा भंडार के आधार पर SPR लगभग 74 दिनों तक देश की जरूरत पूरी कर सकता है। हालांकि, भारत की अपनी उत्पादन क्षमता केवल 15-18% मांग को ही पूरा कर पाती है, जिससे आयात पर निर्भरता बनी रहती है।
सरकार की रणनीति-
PM मोदी ने यह भी बताया कि सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए 7 एम्पावर्ड ग्रुप बनाए हैं। ये ग्रुप्स फ्यूल सप्लाई, सप्लाई चेन, फर्टिलाइज़र्स और अन्य जरूरी क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया, कि चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ को बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
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आम लोगों के लिए क्या मतलब?
सरल शब्दों में समझें तो फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार के पास पर्याप्त तेल भंडार है और अल्टरनेट सप्लाई सोर्स पर भी काम हो रहा है। लेकिन अगर युद्ध लंबा चलता है, तो ग्लोबल प्राइज़ बढ़ सकते हैं, जिसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
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