Harish Rana Euthanasia: सुप्रीम कोर्ट की ऐतिहासिक अनुमति के बाद 32 वर्षीय हरीश राणा को AIIMS के पैलिएटिव केयर यूनिट में शिफ्ट कर दिया गया है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम की देखरेख में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एक भावुक वीडियो में परिवार को हरीश से आखिरी विदाई लेते देखा जा सकता है।
2013 में हुआ हादसा और तब से थम गई जिंदगी-
साल 2013 में हरीश राणा अपने पीजी आवास की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे में उन्हें गंभीर मस्तिष्क चोटें आईं और तब से वो जीवन रक्षक प्रणाली के सहारे जी रहे हैं। पिछले 12 सालों से ऑक्सीजन, कृत्रिम पोषण और तमाम चिकित्सा उपकरणों के बल पर उनकी सांसें चल रही थीं। इस दौरान उनके माता-पिता ने हर संभव कोशिश की लेकिन हरीश की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। आखिरकार परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपने बेटे के लिए इच्छामृत्यु की मांग की।
"Forgive everyone… apologize to everyone… it’s time to go now, okay?"
Harish Rana has been brought to AIIMS, Delhi. His life support will now be removed.
13 yrs of a family’s hope, prayers and sacrifice ending today 💔 pic.twitter.com/qZt4RYtA3x
— BALA (@erbmjha) March 15, 2026
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला-
11 मार्च को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह ऐतिहासिक निर्णय सुनाया जिसने परिवार को अस्पताल में जीवन रक्षक उपकरण हटाकर हरीश को सम्मान के साथ जीवन समाप्त करने की अनुमति दी। इस फैसले के बाद हरीश को AIIMS के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर हॉस्पिटल के पैलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती कराया गया है। अब धीरे-धीरे ऑक्सीजन, कृत्रिम पोषण और अन्य चिकित्सा सहायता हटाई जाएगी, जिससे मरीज को किसी तरह की तकलीफ न हो। यह प्रक्रिया हर मरीज में अलग-अलग समय लेती है।
वो 22 सेकंड जिसने रुला दिया पूरे देश को-
सोशल मीडिया पर एक 22 सेकंड का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें हरीश की मां बिस्तर के पास खड़ी हैं और एक महिला की आवाज सुनाई देती है जो कह रही है, “सबको माफ करो, सबसे माफी मांगो। अब जाने का वक्त आ गया है, ठीक है?” इसके बाद उनके माथे पर तिलक लगाया जाता है। यह देखकर हर किसी की आंखें भर आईं। एक मां की पीड़ा, एक परिवार का टूटा हुआ दिल और एक बेटे को अंतिम विदाई यह पल शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
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पिता बोले “बेटे का दर्द देखना असहनीय था”-
फैसले के बाद हरीश के पिता अशोक राणा ने कहा कि यह निर्णय शायद उनके परिवार को कोई राहत नहीं देगा लेकिन यह उन तमाम परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन सकता है जो ऐसी ही पीड़ा से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक पिता के रूप में अपने बेटे को इस हालत में देखना बेहद दर्दनाक था और कोई भी माता-पिता ऐसा नहीं चाहेंगे। लेकिन व्यापक जनहित में यह फैसला उन परिवारों की मदद कर सकता है जिनके अपने हरीश जैसी स्थिति में हैं।
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