Ibrahim Raisi
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    Ibrahim Raisi: इज़राइल-अमेरिका हमले की खबरों के बीच ईरान एक बार फिर पूरी दुनिया की नज़रों में है और इन्हीं चर्चाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय मीडिया में एक नाम बार-बार सामने आ रहा है और वह है तेहरान का कसाई। यह नाम किसका था? इसके पीछे की कहानी क्या है? जवाब जितना दिलचस्प है, उतना ही रूह कंपा देने वाला भी।

    एक मौलवी जो बना राष्ट्रपति-

    “तेहरान का कसाई” कहे जाने वाले शख्स का नाम था इब्राहिम रईसी। 14 दिसंबर 1960 को मशहद में जन्मे रईसी ने किशोरावस्था में ही धार्मिक शिक्षा शुरू कर दी थी। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद जब नई सरकार को वफादार लोगों की ज़रूरत थी, तो रईसी ने न्यायपालिका का रास्ता चुना। करज और हमदान जैसे शहरों में सरकारी वकील के तौर पर काम करते हुए वो धीरे-धीरे तेहरान पहुंचे। दशकों की मेहनत के बाद 2019 में वो ईरान के मुख्य न्यायाधीश बने और फिर 2021 में ईरान के आठवें राष्ट्रपति।

    1988 वो काली रात जिसने दिया यह नाम-

    रईसी की ज़िंदगी का सबसे विवादित और काला अध्याय है 1988 का साल। ईरान-इराक युद्ध की समाप्ति के बाद तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खुमैनी ने कथित तौर पर एक गुप्त फतवा जारी किया, जिसमें जेलों में बंद राजनीतिक कैदियों को फांसी देने का आदेश था। इसके लिए “डेथ कमीशन” नाम के चार सदस्यीय पैनल बनाए गए, जिनमें एक धार्मिक न्यायाधीश, एक सरकारी वकील और खुफिया विभाग के प्रतिनिधि शामिल थे। इन पैनलों में कैदियों से पूछताछ महज कुछ मिनटों की होती थी और उसी के आधार पर तय होता था, कि वो वापस जेल जाएंगे या फांसी के तख्ते पर।

    रईसी उस वक्त सिर्फ 27 साल के थे, जब उन्हें तेहरान की क्रांतिकारी अदालत में डेथ कमीशन का सबसे युवा सदस्य बनाया गया। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, हजारों कैदियों को इन्हीं जल्दबाजी में होने वाली सुनवाइयों के बाद फांसी दे दी गई। आलोचकों ने इसे न्यायिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामूहिक हत्या करार दिया और रईसी ने बाद में भी इन फैसलों का बचाव किया यही वजह है, कि उनपर”तेहरान का कसाई का ठप्पा लग गया, जो जीवनभर उनके साथ रहा।

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    राष्ट्रपति बने, विवाद साथ रहा-

    2021 के चुनाव में रईसी कम मतदान और कई प्रतिद्वंद्वियों की अयोग्यता के बीच राष्ट्रपति बने। उनका कार्यकाल भी उतना ही उथल-पुथल भरा रहा। 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद देशभर में भड़के विरोध प्रदर्शनों को उनकी सरकार ने जिस तरह दबाया, उसकी दुनियाभर में निंदा हुई। उनके कार्यकाल में ईरान ने चीन और रूस से संबंध और गहरे किए। फिर 19 मई 2024 को अज़रबैजान सीमा के पास खराब मौसम में उनका हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया और 63 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई।

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    ईरानी हुकूमत के भीतर रईसी को क्रांति का रक्षक माना जाता था, लेकिन दुनिया की नज़र में वो हमेशा उस काले अतीत के साथ जुड़े रहे, जिसे न वो मिटा सके, न इतिहास भूल सका।

    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।