Bijwasan Toll Plaza U-Turn Flyover
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    Bijwasan Toll Plaza U-Turn Flyover: द्वारका एक्सप्रेसवे पर रोज़ सफर करने वाले गुरुग्राम के लाखों लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। बिजवासन टोल प्लाज़ा पर एक ऊंचा यू-टर्न फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिससे लोग दिल्ली में घुसे बिना ही गुरुग्राम की तरफ वापस मुड़ सकेंगे। यह जानकारी NHAI और GMDA के अधिकारियों ने दी है।

    उच्चस्तरीय बैठक में हुई चर्चा-

    यह प्रस्ताव NHAI के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में सामने आया, जिसमें GMDA के अधिकारी भी मौजूद थे। बैठक में NHAI को एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार करने के निर्देश दिए गए। साथ ही GMDA को कहा गया, कि वो इस ढांचे के लिए ज़रूरी सरकारी और निजी ज़मीन की पहचान करे।

    एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, कि अगर निजी ज़मीन की ज़रूरत पड़ी, तो राजमार्ग प्राधिकरण उसे अधिग्रहित करेगा। यह फ्लाईओवर बिजवासन टोल प्लाज़ा के गुरुग्राम वाले हिस्से पर बनेगा, हालांकि रिपोर्ट तैयार होने की कोई समयसीमा अभी तय नहीं हुई है।

    टोल की मार से परेशान हैं स्थानीय निवासी-

    29 किलोमीटर लंबे Dwarka Expressway पर गुरुग्राम में करीब 19 किलोमीटर और दिल्ली में 10 किलोमीटर का हिस्सा पड़ता है। 29 नवंबर से वाहन चलने शुरू होने के बाद से ही टोल को लेकर लोगों में नाराज़गी है। एक कार के लिए एकतरफा ₹220 और आने-जाने का ₹330 टोल देना पड़ता है।

    सबसे बड़ी समस्या यह है, कि बिजवासन टोल प्लाज़ा पर कोई यू-टर्न की सुविधा नहीं है। ऐसे में अगर कोई चालक बाजघेड़ा निकास से नहीं निकल पाता, तो उसे या तो टोल भरना पड़ता है या फिर सर्विस रोड पर गलत दिशा में गाड़ी चलानी पड़ती है, जो बेहद खतरनाक है।

    दिल्ली नहीं जा रहे, फिर टोल क्यों?-

    यूनाइटेड आरडब्ल्यूए फेडरेशन के संस्थापक राकेश राणा ने बताया, कि उन्होंने GMDA और NHAI को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने कहा, कि यू-टर्न न होने की वजह से स्थानीय निवासियों को रोज़ाना भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। सेक्टर 106 से 115, साई कुंज, बाजघेड़ा, चंदन विहार, पालम विहार, न्यू पालम विहार, उपवन सोसाइटी, साहिब कुंज, निहाल कॉलोनी, प्रकाशपुरी, चौमा, बाबूपुर और जहाजगढ़ के हज़ारों परिवार इस परेशानी से जूझ रहे हैं। इन सभी इलाकों के लोग बार-बार अधिकारियों से गुहार लगा रहे थे, कि जब वो दिल्ली नहीं जा रहे तो टोल क्यों भरें।

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    फिलहाल एक स्थानीय NHAI अधिकारी ने कहा है, कि मुख्यालय पर चर्चा हुई होगी, लेकिन उनके पास अभी कोई आधिकारिक निर्देश नहीं आए हैं। यानी यह प्रस्ताव अभी शुरुआती दौर में है। विस्तृत रिपोर्ट बनने के बाद ज़मीन अधिग्रहण और निर्माण की समयसीमा स्पष्ट होगी। लेकिन इस घोषणा ने लाखों यात्रियों में उम्मीद की एक नई किरण जगाई है, कि जल्द ही उन्हें इस रोज़ की परेशानी से छुटकारा मिलेगा।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।