DRDO Satellite
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    DRDO Satellite: कल्पना कीजिए कि आपके पास ऐसी सुपरपावर हो, जिससे आप जंगलों, खेतों, पहाड़ों या फिर युद्धक्षेत्र में छुपी हर छोटी-बड़ी चीज़ को पहचान सकें, वो भी बिना आँखों से देखे। कुछ ऐसा ही कमाल करने जा रहा है ISRO का अगला मिशन। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन 12 जनवरी को PSLV-C62 के जरिए EOS-N1 Anvesha सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी में है। यह सैटेलाइट DRDO द्वारा विकसित किया गया है और इसमें इस्तेमाल की गई टेक्नोलॉजी का नाम है हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग, यानी HRS।

    क्या है हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग का कमाल-

    पहले के दौर में सैटेलाइट तस्वीरें सिर्फ रंग, आकार और पैटर्न के आधार पर जानकारी देती थीं। जैसे हरियाली देखकर जंगल का अंदाज़ा या घुमावदार रेखाओं से नदी की पहचान। लेकिन हाइपरस्पेक्ट्रल टेक्नोलॉजी इस सोच से कई कदम आगे है। इसमें सामान्य तस्वीरों की बजाय रोशनी के सैकड़ों बेहद बारीक हिस्सों को कैप्चर किया जाता है, जो इंसानी आंखों को दिखाई भी नहीं देते। हर सतह, चाहे वो मिट्टी हो, पानी हो, पेड़-पौधे हों या इंसानी ढांचा, रोशनी को अलग-अलग तरीके से रिफ्लेक्ट करती है। यही उसका यूनिक “फिंगरप्रिंट” बन जाता है।

    Anvesha कैसे करेगा काम-

    Anvesha सैटेलाइट धरती से आने वाली रोशनी को स्कैन करेगा और उसे डेटा में बदलेगा। वैज्ञानिक पहले से तैयार किए गए स्पेक्ट्रल सिग्नेचर लाइब्रेरी से इस डेटा को मैच करेंगे। यह लाइब्रेरी असल ज़मीन से जुटाए गए सैंपल्स पर आधारित होती है, जिन्हें स्पेक्ट्रोरेडियोमीटर जैसे खास उपकरणों से मापा जाता है। जब इस पूरे सिस्टम को GIS यानी जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम से जोड़ा जाता है, तो एक हाई-टेक मैप तैयार होता है, जिसे 3D में देखा, घुमाया और एनालाइज किया जा सकता है।

    डिफेंस के लिए क्यों है गेम चेंजर-

    आज के समय में युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि जानकारी से जीते जाते हैं। हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग सेना को ज़मीन की सटीक जानकारी देती है। कौन सी मिट्टी पर टैंक चल सकता है, कहां दलदल है, या कौन सा इलाका सुरक्षित रास्ता बन सकता है, ये सब पहले से पता लगाया जा सकता है। सबसे खास बात यह है कि यह टेक्नोलॉजी कैमुफ्लाज को भी पहचान सकती है। नकली झाड़ियों, छुपाए गए उपकरणों या असामान्य मटीरियल को पकड़ना इसके लिए मुश्किल नहीं है। इससे रणनीतिक प्लानिंग और सैनिकों की सुरक्षा दोनों मजबूत होती हैं।

    आपदा प्रबंधन और आम लोगों को भी फायदा-

    Anvesha सिर्फ डिफेंस तक सीमित नहीं है। बाढ़, भूकंप या भूस्खलन जैसी आपदाओं के बाद ज़मीन में आए बदलाव को जल्दी पहचानकर राहत कार्य तेज़ किए जा सकते हैं। खेती के क्षेत्र में किसान फसलों की बीमारी या मिट्टी की हालत पहले ही जान सकेंगे। यानी यह सैटेलाइट देश की सुरक्षा के साथ-साथ आम जीवन को भी स्मार्ट बनाने वाला है।

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    चुनौतियां-

    हालांकि HRS टेक्नोलॉजी महंगी है और इससे मिलने वाला डेटा बहुत ज्यादा होता है, जिसे संभालना आसान नहीं। मौसम भी कभी-कभी तस्वीरों को प्रभावित कर सकता है। लेकिन AI और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों के साथ ये चुनौतियां धीरे-धीरे कम हो रही हैं। 12 जनवरी को जब Anvesha सैटेलाइट लॉन्च होगा, तब यह भारत की रणनीतिक ताकत को नई ऊंचाई देगा और यह साबित करेगा कि अंतरिक्ष से देखने वाली आंखों से अब कुछ भी छुपा नहीं रह सकता।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।