Nitai Roy Chowdhury
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    Nitai Roy Chowdhury: बांग्लादेश की राजनीति में मंगलवार का दिन एक नया इतिहास लेकर आया। देश की नई सरकार ने जब शपथ ली, तो उसमें एक नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में रहा Nitai Roy Chowdhury। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता और हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय का यह जाना-पहचाना चेहरा अब देश के नए मंत्रिमंडल का हिस्सा है। 50 सदस्यीय कैबिनेट में उनकी शामिल होने को अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व के नज़रिए से अहम माना जा रहा है।

    ढाका में ऐतिहासिक शपथ समारोह-

    शपथ ग्रहण समारोह जातीय संसद भवन के साउथ प्लाज़ा में हुआ, जहां राष्ट्रपति मोहम्मद साहाबुद्दीन ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान और उनके कैबिनेट सदस्यों को शपथ दिलाई। तारिक रहमान, जो BNP की अगुवाई करते हैं और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के बेटे हैं, ने करीब 17 साल के एक्साइल के बाद अपने देश लौटकर यह जीत हासिल की। वे बांग्लादेश के पिछले 35 वर्षों में पहले चुने गए पुरुष प्रधानमंत्री बने हैं।

    कौन हैं Nitai Roy Chowdhury?

    निताई रॉय चौधरी बांग्लादेश के एक अनुभवी राजनीतिज्ञ और वकील हैं, जिनका राजनीतिक सफर दशकों पुराना है। 7 जनवरी 1949 को मगुरा जिले के हाटबरिया गाँव में जन्मे निताई ने ढाका यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और फिर कानून की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने स्टूडेंट यूनियन से राजनीति की शुरुआत की। 1988 में जातीय पार्टी के टिकट पर मगुरा-2 से सांसद बने और एजुकेशन, यूथ एंड स्पोर्ट्स, लॉ और न्याय जैसे मंत्रालयों में स्टेट मिनिस्टर रहे।

    HM एरशाद सरकार के पतन के बाद वह BNP में शामिल हो गए और धीरे-धीरे पार्टी के टॉप लीडरशिप तक पहुंचे। वे BNP के वाइज़ प्रैज़िडेंट रह चुके हैं और पार्टी की सर्वोच्च पॉलिसी-मेकिंग स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य हैं। 13वें संसदीय चुनाव में उन्होंने मगुरा-2 से 1,47,896 वोटों से जीत हासिल की।

    BNP की जबरदस्त वापसी-

    यह चुनाव बांग्लादेश के लिए भी खास था, क्योंकि यह 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता से बेदखली के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव था। BNP ने 300 सीटों वाली संसद में 209 सीटें जीतीं और अलायंस के साथ मिलकर पूरी मैज्योरिटी हासिल की। नई कैबिनेट में 25 मंत्री, 24 राज्य मंत्री और 3 टेक्नोक्रेट शामिल हैं। मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर, अमीर खसरू महमूद चौधरी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने भी शपथ ली।

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    अल्पसंख्यकों के लिए उम्मीद की किरण-

    निताई रॉय चौधरी उन चार अल्पसंख्यक उम्मीदवारों में शामिल हैं, जिन्होंने इस चुनाव में जीत हासिल की। बांग्लादेश की करीब 17 करोड़ की आबादी में हिंदू समुदाय लगभग 8 फीसदी है। उनके साथ ढाका से गोयेश्वर चंद्र रॉय भी जीते। सरकार में उनके शामिल होने को BNP का अल्पसंख्यक समुदाय की तरफ आउटरीच का हिस्सा माना जा रहा है। एक ऐसे दौर में जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं, निताई रॉय चौधरी की कैबिनेट में मौजूदगी एक सकारात्मक संदेश देती है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।