Corruption Perception Index: दुनिया भर में करप्शन की बात होती है, तो हमेशा भारत का नाम सामने आता है। लेकिन इस बार की कहानी थोड़ी अलग है। जहां यूरोप और अमेरिका जैसे विकसित देशों में करप्शन के मामले बढ़े हैं, वहीं भारत ने अपनी रैंकिंग में सुधार दिखाया है। ग्लोबल ट्रांसपेरेंसी की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत का करप्शन स्कोर बढ़कर 39 हो गया है और देश 180 देशों की लिस्ट में 91वें स्थान पर पहुंच गया है।
तीन साल में धीरे-धीरे हो रहा सुधार-
अगर पिछले तीन सालों की बात करें, तो भारत की करप्शन रैंकिंग में मामूली सुधार देखा जा रहा है। 2023 में भारत करप्शन परसेप्शन इंडेक्स पर 93वें नंबर पर था। 2024 में यह रैंकिंग 92वें स्थान पर आ गई और अब 2025 में देश 91वें पायदान पर पहुंच गया है। भले ही यह सुधार धीमा है, लेकिन दिशा सही है। हालांकि 39 का स्कोर अभी भी हाई-रिस्क ज़ोन में माना जाता है और चिंता की बात यह है, कि सरकारी डेटा से साफ तौर पर यह नहीं पता चलता, कि यह सुधार किन कारणों से हुआ है। भारत को अभी भी करप्शन से प्रभावी तरीके से लड़ने के लिए लंबा रास्ता तय करना है।
किस बेसिस पर होता है यह सर्वे-
ग्लोबल ट्रांसपेरेंसी की यह रिपोर्ट चार मुख्य फैक्टर्स पर आधारित होती है। पहला, डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशंस को दिए जाने वाले पॉलिटिकल डोनेशन। दूसरा, इन संस्थानों की स्थिति और मजबूती। तीसरा, एक्सेस पाने के लिए कैश पेमेंट्स की प्रैक्टिस और चौथा, जर्नलिस्ट्स को टारगेट करने की सरकारी नीति।
रिपोर्ट जारी करते हुए, ग्लोबल ट्रांसपेरेंसी ने लिखा, कि बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिद्वंद्विता और इंटरनेशनल नॉर्म्स की खतरनाक अनदेखी के कारण ग्लोबल ऑर्डर दबाव में है। सशस्त्र संघर्ष और क्लाइमेट क्राइसिस का विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है और समाज पहले से ज्यादा ध्रुवीकृत हो रहे हैं।
दुनिया के सबसे करप्ट देश कौन से हैं-
रिपोर्ट के मुताबिक, साउथ सूडान और सोमालिया दुनिया के सबसे करप्ट देश हैं। वहीं सिर्फ सात देश ऐसे हैं, जिनका स्कोर 80 से ऊपर है, यानी जो करप्शन के मामले में काफी क्लीन माने जाते हैं। दिलचस्प बात यह है, कि यूरोप के देशों में करप्शन तेजी से बढ़ा है। ब्रिटेन, फ्रांस और इटली जैसे देशों के स्कोर में गिरावट आई है। पूरे यूरोप में सिर्फ जर्मनी ही एक ऐसा देश है, जहां करप्शन के मामले घटे हैं। ब्रिटेन तो टॉप 20 देशों की लिस्ट से भी बाहर हो गया है।
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अमेरिका और चीन की क्या है स्थिति
अमेरिका का स्कोर भी गिरा है। 2024 में अमेरिका की रैंक ग्लोबल करप्शन इंडेक्स में 28वें से गिरकर 29वें स्थान पर आ गई है। वहीं चीन की बात करें, तो तमाम कोशिशों के बावजूद वहां करप्शन के केस कम नहीं हुए हैं। चीन का स्कोर 43 पर स्थिर है और देश करप्शन के मामले में 76वें नंबर पर है।
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क्या है समाधान-
ग्लोबल ट्रांसपेरेंसी के मुताबिक, इन चुनौतियों से निपटने के लिए दुनिया को सिद्धांतवादी नेताओं और मजबूत, स्वतंत्र संस्थानों की जरूरत है, जो ईमानदारी के साथ जनहित की रक्षा करें।



