Work Life Balance: एक सामान्य बिज़नेस कॉल के दौरान जो बात सामने आई, वो आज पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है। Energy AI Labs के फाउंडर और CEO शुभम मिश्रा ने सोशल मीडिया पर अपने नए चाइनीज डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर के साथ हुई बातचीत शेयर की, जिसने वर्क-लाइफ बैलेंस की पूरी बहस को एक नए नज़रिए से देखने पर मजबूर कर दिया।
शुभम ने बताया, कि उनकी कंपनी जल्द ही चीन में अपना आधिकारिक डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर बनाने जा रही है। हाँ, आपने सही पढ़ा एक इंडियन प्रोडक्ट के लिए चीन में पार्टनर। कॉल खत्म होने से पहले शुभम ने अपने पार्टनर से एक सिंपल सवाल पूछा, जिसका जवाब उन्हें सोचने पर काफी मजबूर कर गया।
एक सवाल जिसने सब कुछ बदल दिया-
शुभम ने पूछा, “भारतीय और चीनी उद्यमियों के बीच सबसे बड़ा फर्क क्या है?” उन्हें उम्मीद थी, कि शायद कोई फिलॉसफिकल या गहरा जवाब मिलेगा। लेकिन जो जवाब आया, वो बिल्कुल सीधा और साफ था। चाइनीज एंटरप्रेन्योर ने अपनी टूटी-फूटी इंग्लिश में कहा, “हम वर्क-लाइफ बैलेंस और इसकी ऑनलाइन बहसों में यकीन नहीं करते। हमारे लिए सिर्फ दो चीजें हैं, वर्क टाइम या पर्सनल टाइम।”
यह जवाब सुनकर शुभम को लगा, कि जहां हम भारत में बैलेंस की बात को रोमांटिक बना रहे हैं, वहीं दूसरे देश क्लियरिटी के साथ काम को एक्जीक्यूट कर रहे हैं। यह सिर्फ एक स्टेटमेंट नहीं था, बल्कि दो अलग-अलग कल्चर और मानसिकता के बीच का फर्क दिखाता है।
सोशल मीडिया पर क्या रहा रिएक्शन-
शुभम की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर एक यूज़र ने लिखा, “कभी-कभी बैलेंस का मतलब टाइम बांटना नहीं होता, बल्कि यह तय करना होता है, कि हर पल में किस चीज़ को आपका पूरा ध्यान मिलना चाहिए।” वहीं एक और यूज़र ने कहा, “यह तो काम और ज़िंदगी पर एक रिफ्रेशिंग टेक है।”
इसी के साथ शुभम ने एक और खबर दी, कि कुछ चाइनीज इलेक्ट्रिक व्हीकल बिज़नेस जल्द ही इंडियन बैटरी टेस्टर का इस्तेमाल करने वाले हैं।
क्या रिवर्स इंजीनियरिंग का खतरा नहीं?
इस खबर के बीच एक X यूज़र ने सवाल उठाया, “क्या इन्हें रिवर्स इंजीनियर करने से कोई चीज़ नहीं रोक रही?” शुभम ने तुरंत जवाब दिया और अपनी सेफ्टी मेजर्स के बारे में बताया, “फर्मवेयर, सर्वर-साइड एन्क्रिप्शन, प्रोप्राइटरी रियल-टाइम डेटासेट्स, ट्रेंड अल्गोरिदम और घोस्ट सर्किट्स।” यानी टेक्नोलॉजी की हर परत पर सुरक्षा का इंतज़ाम है।
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भारत में वर्क-लाइफ बैलेंस की बहस-
यह पूरा किस्सा ऐसे वक्त सामने आया है जब भारत में वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर काफी डिबेट चल रही है। एक तरफ हसल कल्चर को सपोर्ट करने वाले कई सीनियर फाउंडर्स हैं, जो मानते हैं, कि लंबे वर्किंग आवर्स और रिलेंटलेस फोकस ज़रूरी हैं, अगर हमें ग्लोबल स्टेज पर कंपीट करना है। दूसरी तरफ बिज़नेस लीडर्स और प्रोफेशनल्स हैं, जो सस्टेनेबल वर्क प्रैक्टिसेस की वकालत कर रहे हैं। उनका तर्क है, कि क्रॉनिक बर्नआउट क्रिएटिविटी और लॉन्ग-टर्म इनोवेशन को खत्म कर देता है।
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इस बहस में अब चीनी पार्टनर का यह सीधा जवाब एक नया आयाम लेकर आया है। शायद बैलेंस का मतलब सिर्फ टाइम बांटना नहीं, बल्कि हर काम को उसके वक्त पर पूरी शिद्दत से करना भी हो सकता है।



