When to change Kalava: हर पूजा, हर शुभ काम, हर मंदिर जाने के बाद एक लाल-पीला धागा कलाई पर बंध जाता है. जिसे हम कलावा, मौली या रक्षा सूत्र कहते हैं। पुरुषों और अविवाहित स्त्रियों की दाईं कलाई पर और विवाहित स्त्रियों की बाईं कलाई पर यह धागा पंडित जी मंत्रों के साथ बांधते हैं। माना जाता है, कि यह धागा एक रक्षा कवच की तरह काम करता है, जो शरीर और आत्मा दोनों की रक्षा करता है।
लाल रंग शक्ति और सूर्य ऊर्जा का प्रतीक है और पीला रंग समृद्धि और पवित्रता का। लेकिन क्या आपने कभी सोचा, कि यह कवच हमेशा के लिए नहीं रहता? और अगर सही समय पर नहीं बदला, तो यही धागा उल्टा असर करने लगता है?
कलावे की तीन अवस्थाएं-
प्राचीन तांत्रिक और योगिक परंपराओं के अनुसार कलावा तीन अलग-अलग अवस्थाओं से गुजरता है। पहली अवस्था बंधाई के बाद पहले 11 दिनों की होती है। इस दौरान धागे में मंत्रों और संकल्प की ऊर्जा भरी होती है।
यह आपकी आभा के चारों तरफ एक सुरक्षा घेरा बना देता है, बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से बचाता है और मन में स्पष्टता और सकारात्मकता बनाए रखता है। यजुर्वेद की रक्षा विधि में भी ऐसे धागों का उल्लेख मिलता है।
इसके बाद अगले 7 दिन यानी 12वें से 18वें दिन तक धागा एक तटस्थ अवस्था में आ जाता है। इस समय यह न तो फायदेमंद रहता है और न ही नुकसानदेह, बिल्कुल उस बैटरी की तरह जो खत्म होने की कगार पर हो।
18 दिन बाद शुरू होता है असली खतरा-
यहीं से बात गंभीर हो जाती है। 18 दिन के बाद अगर कलावा नहीं बदला गया, तो वो एक ऊर्जा स्पंज बन जाता है, यानी आसपास की नकारात्मक ऊर्जा, तनाव, बीमारी और झगड़ों की कंपन को सोखने लगता है। जो धागा कभी आपकी रक्षा करता था वही अब आपकी ऊर्जा को खींचने लगता है।
भीड़-भाड़ वाले शहरों में रहने वाले, दबाव भरे माहौल में काम करने वाले और भावनात्मक रूप से थके हुए लोगों के लिए यह और भी ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है। इसके असर में मूड का अचानक बिगड़ना, थकान, एकाग्रता में कमी और साधना में रुकावट आना शामिल हो सकते हैं।
पुराने कपड़े वाली बात समझें-
इसे ऐसे समझिए, आप एक साफ कपड़ा पहनते हैं, अच्छा लगता है। लेकिन अगर उसी कपड़े को बिना धोए रोज पहनते रहें तो? पहले धूल, फिर बदबू और फिर बैक्टीरिया। बाहर से कपड़ा वही दिखता है, लेकिन अंदर से वो आपको नुकसान पहुंचाने लगता है। कलावे का भी यही हाल है।
ये भी पढ़ें- Manorath Chaturthi 2026: गणपति बप्पा की पूजा से पूरी होंगी सारी इच्छाएं, जानें राशि के हिसाब से खास मंत्र
हर 11 दिन में बदलें कलावा-
समाधान बहुत सीधा है, हर 11 दिन में कलावा बदलें। पुराने धागे को नदी में प्रवाहित करें, किसी पेड़ से बांध दें या मिट्टी में दबा दें। अगर पंडित जी उपलब्ध न हों, तो साफ मन से खुद भी बांध सकते हैं, साथ में “ॐ रक्ष रक्ष महादेव” या “ॐ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें। यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि अपनी ऊर्जा को ताजा रखने का एक वैज्ञानिक तरीका है — ठीक वैसे ही जैसे शरीर को रोज नहलाते हैं।
कलावा एक धागा नहीं, एक संकल्प है। इसका सम्मान करें, इसे समय पर बदलें और अपनी ऊर्जा को हमेशा ताजा और सुरक्षित रखें।
ये भी पढ़ें- Meen Sankranti 2026: जानिए तिथि से लेकर शुभ मुहुर्त तक सब कुछ



