Ways to Save LPG Gas: दुनिया भर में जब भी कोई बड़ा भू-राजनीतिक तनाव होता है, तो उसकी आंच सबसे पहले आम आदमी के रसोई घर तक पहुंचती है। ईरान और पश्चिम एशिया में इन दिनों जो हालात बने हुए हैं, उसका असर भारत में LPG सप्लाई पर भी पड़ रहा है। देश के कई हिस्सों से गैस सिलेंडर की कमी की खबरें आ रही हैं और बुकिंग सिस्टम में भी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में हर घर में एक ही सवाल है, सिलेंडर कब तक चलेगा?
Indian Oil ने दिया जवाब-
इसी चिंता को समझते हुए Indian Oil ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल पर एक जरूरी पोस्ट शेयर की। कंपनी ने बताया कि अगर आप खाना पकाने के तरीकों में बस थोड़े से स्मार्ट बदलाव करें, तो हर महीने 25 प्रतिशत तक LPG की बचत हो सकती है। BPCL भी इसी बात को सपोर्ट करती है। यानी ये कोई जुगाड़ नहीं, बल्कि साइंटिफिक तरीके हैं।
उबाल आते ही आंच धीमी करें — LPG की समझदारी भरी बचत करें।
— Indian Oil Corp Ltd (@IndianOilcl) March 11, 2026
उबाल के बाद तेज़ आंच रखने से खाना जल्दी नहीं पकता, सिर्फ़ गैस ज़्यादा खर्च होती है।
धीमी आंच अपनाकर 25% तक LPG बचाएं, बिना अतिरिक्त समय गंवाए।
छोटी आदत, बड़ी बचत-
ऊर्जा संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की दिशा में यह एक… pic.twitter.com/PqIVGz3Tls
उबाल आए तो आंच धीमी कर दो-
अक्सर हम सोचते हैं, कि तेज आंच पर खाना जल्दी पकेगा, लेकिन Indian Oil का कहना है, कि एक बार उबाल आ जाने के बाद आंच तेज रखना सिर्फ गैस की बर्बादी है। खाना उतनी ही स्पीड से पकता है, बस फ्यूल ज्यादा जलता है। आंच धीमी करने की ये एक आदत आपको 25% तक बचत दे सकती है।
प्रेशर कुकर है असली हीरो-
अगर आप अभी भी पुराने खुले बर्तनों में दाल-चावल बना रहे हैं, तो आप बेवजह पैसे जला रहे हैं। प्रेशर कुकर में चावल बनाने पर 20%, दाल पर 46% और नॉनवेज पकाने पर लगभग 41.5% तक गैस की बचत होती है। इसके साथ ही खाना हमेशा ढककर पकाएं, ढक्कन लगाने से भाप और गर्मी अंदर रहती है, जिससे खाना जल्दी और कम गैस में तैयार हो जाता है।
रात को ही भिगो दें दाल, चने-
चने, राजमा या दाल इन्हें पकाने से पहले कुछ घंटे या रात भर पानी में भिगोना एक पुरानी दादी-नानी की ट्रिक है, लेकिन इसके पीछे सॉलिड साइंस है। सिर्फ चने को रात भर भिगोने से गैस की खपत में 22% की कमी आती है।
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बर्नर साफ रखो, गीले बर्तन मत रखों-
कुछ और स्मार्ट किचन हैक्स भी हैं, जिन्हें अक्सर लोग इग्नोर करते हैं। बर्नर पर जमी गंदगी और कार्बन गैस की लौ कमजोर कर देती है। नीली लौ अच्छी होती है, लेकिन अगर लौ पीली या नारंगी दिखे तो समझ लीजिए बर्नर की सफाई जरूरी है। गीले बर्तन को सीधे चूल्हे पर रखने से बचें। क्योंकि उसमें लगा पानी सुखाने में एक्स्ट्रा गैस खर्च होती है। साथ ही बर्तन के साइज के हिसाब से बर्नर चुनें, छोटा बर्नर, बड़े बर्नर की तुलना में 6 से 10% कम गैस लेता है और हां, गैस जलाने से पहले सब्जियां काट लें और मसाले तैयार रखें, ताकि चूल्हा बेकार में न जलता रहे।
ये सारे टिप्स अपनाकर न सिर्फ आप हर महीने पैसे बचा सकते हैं, बल्कि देश की एनर्जी सिक्योरिटी में भी अपना छोटा सा योगदान दे सकते हैं।
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