Bay Leaf Under Pillow: भारतीय रसोई में तेजपत्ता एक आम मसाला है, जिसकी खुशबू और हल्का सा स्वाद दाल, सब्जी और बिरयानी को खास बना देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं, कि तेजपत्ता सिर्फ खाने तक ही सीमित नहीं रहा है? हजारों सालों से यह पत्ता लोक-मान्यताओं, पारंपरिक विश्वासों और घरेलू कामों का भी हिस्सा रहा है। हाल में सोशल मीडिया पर एक पुरानी परंपरा फिर से चर्चा में आई है, जिसमें लोग रात को सोते समय तेजपत्ता तकिए के नीचे रखते हैं। कोई इसे अच्छी नींद के लिए करता है, तो कोई अच्छे सपनों और पॉज़िटिव एनर्जी की उम्मीद में।
तेजपत्ते से जुड़ा प्राचीन इतिहास-
तेजपत्ते का इतिहास काफी पुराना और रोचक है। प्राचीन ग्रीक और रोमन सभ्यताओं में इसे सुरक्षा, बुद्धि और मार्गदर्शन का प्रतीक माना जाता था। वहां लोगों का विश्वास था, कि तेजपत्ता नकारात्मक विचारों को दूर रखता है और मानसिक स्पष्टता देता है। इसी वजह से कई लोग इसे सोते समय बिस्तर या तकिए के पास रखते थे, ताकि मन शांत रहे और डरावने सपने न आएं। उस दौर में खुशबूदार जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल सोते समय दिमाग को शांत करने के लिए आम बात थी और तेजपत्ता भी उसी परंपरा का हिस्सा था।
आज के समय में क्यों हो रहा है यह ट्रेंड-
आज के डिजिटल युग में यह परंपरा नए रूप में सामने आई है। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर तेजपत्ता को इच्छा और मेनिफेस्ट करने और पॉज़िटिव आउटकम्स से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ लोग मानते हैं, कि सोने से पहले अपने मन में कोई इच्छा सोचकर तेजपत्ता तकिए के नीचे रखने से वह इच्छा मजबूत होती है। भले ही इसके पीछे वैज्ञानिक आधार न हो, लेकिन यह लोगों को एक इमोशनल कम्फर्ट जरूर देता है। एक छोटा सा काम, जो दिनभर की भागदौड़ के बाद मन को सुकून का एहसास कराता है।
क्या तेजपत्ता वाकई नींद बेहतर करता है?
अगर साइंस की बात करें, तो अभी तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, कि तेजपत्ता सीधे तौर पर नींद को बेहतर बनाता है या सपनों को बदल देता है। लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं, कि सोते समय इसका असर हमारे मन पर पड़ता है। जब हम रोज एक ही तरह की शांति से भरा काम करते हैं, तो दिमाग को संकेत मिलता है, कि अब आराम करने का समय है। ऐसे में तेजपत्ता रखने की आदत भी एक तरह से रिलेक्शेसन का जरिया बन सकती है।
क्या यह परंपरा अपनाना सुरक्षित है?
तेजपत्ता तकिए के नीचे रखना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। बस ध्यान रखें, कि पत्ता सूखा हो और बेहतर होगा कि उसे किसी छोटे कपड़े की थैली में रख दिया जाए, ताकि बिस्तर गंदा न हो। यह एक सिंबोलिक और सांस्कृतिक अभ्यास है, जिसे लोग अपनी आस्था और मानसिक शांति के लिए अपनाते हैं।
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आस्था और आधुनिक जीवन का कनेक्शन-
कुल मिलाकर, तकिए के नीचे तेजपत्ता रखना कोई वैज्ञानिक इलाज नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और सांस्कृतिक परंपरा है। यह हमें याद दिलाती है, कि आधुनिक जीवन में भी लोग छोटे-छोटे रिचुअल के जरिए खुद को पुराने समय और अपनी जड़ों से जोड़ना चाहते हैं।
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