Nitish Kumar
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    Nitish Kumar: बिहार की राजनीति में वो दिन आने वाला है, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक मुश्किल लगती थी, नीतीश कुमार के बिना बिहार। खराब सेहत की वजह से उनका सियासी मंच से हटना लगभग तय माना जा रहा है और जैसे ही यह खबर सियासी गलियारों में फैली, एक ही सवाल हर जुबान पर आ गया, कि अब सत्ता की चाबी किसके हाथ जाएगी? BJP, RJD या फिर JDU खुद अपनी ज़मीन बचा पाएगी? यह सवाल जितना आसान लगता है, जवाब उतना ही पेचीदा है।

    EBC वोटबैंक होगा असली खेल-

    Nitish Kumar की सबसे कीमती सियासी विरासत है EBC यानी अत्यंत पिछड़े वर्गों का वोटबैंक, जो बिहार की आबादी का पूरे 36 फीसदी है। यह कोई एक जाति नहीं, बल्कि कई छोटी-छोटी जातियों का वो समूह है, जिसे नीतीश ने दो दशकों की मेहनत से अपने साथ जोड़ा था। अब जब नीतीश जा रहे हैं, तो BJP, RJD और JDU तीनों इस वोटबैंक को अपनी तरफ खींचने में जुट जाएंगे।

    नीतीश के बेटे निशांत कुमार अभी सियासत में एकदम नए हैं, ऐसे में JDU के लिए यह वोटबैंक थामे रखना सबसे कठिन इम्तिहान होगा। नीतीश की अपनी जाति कुर्मी, जो करीब 2.8 फीसदी हैं, शायद JDU के साथ बनी रहे, लेकिन बाकी EBC जातियां किसके पाले में जाएंगी, यही तय करेगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।

    BJP को बढ़त, लेकिन चुनौती भी कम नहीं-

    फिलहाल बिहार विधानसभा में BJP के 89 विधायक हैं, जबकि RJD के पास महज 25। संख्या के हिसाब से शुरुआती बढ़त BJP की साफ दिखती है। लेकिन BJP को यह नहीं भूलना चाहिए, कि 2025 के चुनाव में मिली यह जीत काफी हद तक नीतीश की साख पर टिकी थी, वो वोट नीतीश को मिले थे।

    जिसका फायदा BJP को भी हुआ। नीतीश के बिना वही वोट अपने दम पर खींच पाना आसान नहीं होगा। दूसरी तरफ RJD के लिए यह एक बड़ा मौका है, अगर तेजस्वी यादव EBC वोटरों को साध सके, तो तस्वीर पूरी तरह पलट सकती है।

    Nitish Kumar की असली विरासत-

    अगर लालू प्रसाद के 1990 से 2005 के दौर ने बिहार में स्वर्ण वर्चस्व तोड़ा, तो नीतीश के 20 सालों ने यादवों का दबदबा भी कमज़ोर कर दिया। उन्होंने गैर-यादव OBC, EBC, महिलाओं और महादलितों को एक साथ लाकर एक बिल्कुल नया सियासी ढांचा खड़ा किया। मंडल की पुरानी “अगड़े बनाम पिछड़े” की लकीर को मिटाकर उन्होंने एक नई लकीर खींची, जिसमें स्वर्ण और कुछ पिछड़े एक साथ खड़े नज़र आए। नीतीश भले जा रहे हों, लेकिन यह ढांचा बिहार की सियासत को आने वाले कई सालों तक आकार देता रहेगा।

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    दो-ध्रुवीय होगी बिहार की सियासत?

    2029 के लोकसभा और 2030 के विधानसभा चुनाव तक बिहार की सियासत मुख्यतः BJP और RJD के बीच सीधी टक्कर की शक्ल लेती दिखेगी। JDU को अपनी ज़मीन बचाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी होगी, वरना वो हाशिये पर जा सकती है। सत्ता की चाबी अभी किसी एक के हाथ नहीं है, यह खुली नीलामी है और बोली अभी शुरू हुई है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।