Shankh Air: आधुनिक भारत की कहानियों में Shankh Air का नाम अब सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। उत्तर प्रदेश के श्रवण कुमार विश्वकर्मा की यह कहानी साबित करती है, कि मेहनत और जुनून के आगे कोई मंजिल दूर नहीं। सिर्फ सात साल पहले कानपुर की सड़कों पर टेम्पो चलाने वाले 35 वर्षीय श्रवण आज यूपी की पहली होमग्रोन एयरलाइन के मालिक बनने जा रहे हैं।
सड़क से आसमान तक का सफर-
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रवण कुमार विश्वकर्मा का जन्म कानपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। बचपन से ही पढ़ाई में उनका मन नहीं लगता था, लेकिन जिंदगी को समझने और संघर्ष करने की उनमें अद्भुत क्षमता थी। श्रवण ने खुद माना है, कि उन्होंने न सिर्फ टेम्पो में सफर किया, बल्कि खुद टेम्पो भी चलाया। उनका कहना है कि, “नीचे से ऊपर आने वाला इंसान सब कुछ देखता है, साइकिल, बस, ट्रेन, टेम्पो, सब कुछ।”
श्रवण ने अपने परिचितों के साथ ऑटो चलाया और कई छोटे-छोटे बिजनेस की शुरुआत की, जिनमें से ज़्यादातर कामयाब नहीं रहे। लेकिन हार न मानने वाले श्रवण को 2014 में सीमेंट के व्यापार से असली सफलता मिली। यहीं से उनके बिजनेस को रफ्तार मिली और यहीं से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
स्टील से लेकर एयरलाइन तक-
श्रवण ने बिजनेस की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। उनकी पहली बड़ी सफलता टीएमटी रीबार उद्योग में आई। इस सफलता को आधार बनाकर उन्होंने अपना विस्तार सीमेंट, माइनिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में किया। ट्रकों का बड़ा बेड़ा खड़ा करके श्रवण ने अपनी बिजनेस पहचान मजबूत की और शंख एयर के भविष्य की नींव रखी।
शंख एयर की शुरुआत कैसे हुई-
एयरलाइन की शुरुआत की कहानी याद करते हुए श्रवण ने बताया, कि करीब चार साल पहले उनके मन में एविएशन सेक्टर में उतरने का विचार आया। उन्होंने कहा, “जैसे ही यह विचार आया, मैंने प्रोसेस को समझना शुरू किया, एनओसी कैसे मिलती है, नियम क्या हैं और सिस्टम कैसे काम करता है। चार साल पहले जो सिर्फ एक विचार था, आज वह साकार हो रहा है।”
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, शंख एयर को सिविल एविएशन मंत्रालय से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट मिल चुका है और यह 2026 की शुरुआत में अपना परिचालन शुरू करने वाली है। चेयरमैन श्रवण कुमार विश्वकर्मा ने मंगलवार को बताया, कि एयरलाइन जनवरी के पहले पखवाड़े में तीन एयरबस विमानों के शुरुआती बेड़े के साथ उड़ान भरेगी। शुरुआत में लखनऊ को दिल्ली, मुंबई और अन्य मेट्रो शहरों से जोड़ने पर फोकस रहेगा।
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आम लोगों के लिए हवाई सफर का सपना-
मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले श्रवण का कहना है, कि जिस माहौल में वे पले-बढ़े, वहां बड़े सपने देखना भी अव्यावहारिक माना जाता था। उन्होंने कहा, “जिन परिस्थितियों में हम बड़े हुए, वहां सिर्फ रोजी-रोटी कमाना ही काफी समझा जाता था। उससे आगे सोचना लगभग असंभव था।” लेकिन श्रवण चाहते हैं, कि हवाई यात्रा आम लोगों के लिए सुलभ हो। उनका मानना है, “विमान भी बस या टेम्पो की तरह परिवहन का एक साधन है। इसे कुछ खास या एक्सक्लूसिव नहीं समझा जाना चाहिए।”
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श्रवण की यह कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो संघर्ष कर रहा है और अपने सपनों को पूरा करना चाहता है। यह साबित करती है, कि मंजिल कितनी भी दूर क्यों न हो, मेहनत और दृढ़ संकल्प से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।



