Mustafabad Incident
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    Mustafabad Incident: दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके में शनिवार तड़के एक इमारत ढह गई, जिसमें कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और दिल्ली पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं और बचाव अभियान जारी है।

    Mustafabad Incident मौसम की मार-

    शुक्रवार को दिल्ली के मौसम में अचानक बदलाव देखा गया, जिसमें भारी बारिश और आंधी-तूफान ने शहर के कई हिस्सों को प्रभावित किया। इसी के चलते कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से दिल्ली-एनसीआर में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है।

    “सुबह से ही आसमान में बादल छाए हुए थे और दोपहर तक बारिश शुरू हो गई थी। हमने तो सोचा था कि गर्मी से थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन इस तरह की tragedy की उम्मीद नहीं थी,” मुस्तफाबाद के एक स्थानीय निवासी अहमद ने बताया।

    Mustafabad Incident पिछले हफ्ते भी हुआ था हादसा-

    यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली में इस तरह का हादसा हुआ है। पिछले हफ्ते धूल भरी आंधी के दौरान मधु विहार पुलिस स्टेशन के पास एक निर्माणाधीन इमारत की दीवार गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और दो अन्य घायल हो गए थे।

    पुलिस के अनुसार, यह दीवार निर्माणाधीन छह मंजिला इमारत की थी। पूर्वी दिल्ली के अतिरिक्त उपायुक्त विनीत कुमार ने बताया, “शाम लगभग 7 बजे हमें PCR कॉल मिली। मौके पर पहुंचने पर हमने पाया कि धूल भरी आंधी के दौरान एक छह मंजिला निर्माणाधीन इमारत की दीवार ढह गई थी। एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो घायल हो गए। घायलों को अस्पताल ले जाया गया।”

    बचाव कार्य तेजी से जारी-

    मुस्तफाबाद इमारत हादसे के बाद, स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिया और प्रशासन को सूचित किया। बचाव दल रात भर मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों की तलाश में जुटे रहे। “हमने ढही हुई इमारत से आवाजें सुनी हैं। NDRF की टीमें बिना रुके काम कर रही हैं ताकि हर एक व्यक्ति को सुरक्षित निकाला जा सके,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।

    निर्माण मानकों पर उठे सवाल-

    इस घटना के बाद एक बार फिर दिल्ली में निर्माण गतिविधियों और भवन मानकों पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश इमारतें नियमों का पालन किए बिना बनाई जाती हैं, जिससे इस तरह के हादसे होते हैं। “मुस्तफाबाद जैसे कई पुराने इलाकों में अवैध निर्माण और अनियमित योजना एक बड़ी समस्या है। जब मौसम की मार पड़ती है, तो ऐसी कमजोर इमारतें आसानी से ढह जाती हैं,” शहरी विकास विशेषज्ञ राजीव शर्मा ने कहा।

    स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया-

    स्थानीय निवासी इस हादसे से काफी दुखी और परेशान हैं। कई लोग अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों का पता लगाने के लिए घटनास्थल पर जमा हैं। “मेरा भाई उस इमारत में रहता था। सुबह से उसका फोन नहीं लग रहा है। मैं बहुत परेशान हूं,” मोहम्मद शाकिर ने आंसू भरी आंखों से बताया।

    इलाके के एक अन्य निवासी सोनू ने कहा, “हमने पिछले कुछ दिनों में तेज हवाएं और बारिश देखी है। लेकिन कभी नहीं सोचा था कि इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। सरकार को ऐसी पुरानी इमारतों की जांच करनी चाहिए जो खतरनाक हो सकती हैं।”

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    मौसम की चेतावनी-

    मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए भी तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताई है। नागरिकों से सावधानी बरतने और आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की गई है। “अगले 48 घंटों में दिल्ली-एनसीआर में मौसम अस्थिर रहने की संभावना है। नागरिकों से अनुरोध है कि वे पुरानी और कमजोर इमारतों में न रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें,” मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया।

    इस घटना ने एक बार फिर शहरी नियोजन और आपदा प्रबंधन की कमियों को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए निवारक उपायों और कड़े निर्माण मानकों की आवश्यकता है।

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